निकाय चुनाव के बाद बदले समीकरण, निर्दलीयों की बढ़ी ताकत

नगर निकाय चुनाव से संबंधित फीचर इमेज, जिसमें मतपेटी, नगर परिषद भवन, विभिन्न राजनीतिक दलों के झंडे, चुनावी परिणाम बोर्ड तथा रिपोर्टर हिमांशु मोदी का नाम प्रदर्शित है।

सुनने के लिए यहां क्लिक करें

रिपोर्टर : हिमांशु मोदी

राजस्थान के डीग जिले में नगर निकाय चुनाव के नतीजों ने स्थानीय राजनीति की तस्वीर बदल दी है। छह नगरीय निकायों के 180 वार्डों में आए परिणामों के बाद सबसे ज्यादा चर्चा निर्दलीय प्रत्याशियों की जीत को लेकर है। चुनाव परिणामों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने 110 वार्डों पर कब्जा जमाया है। भाजपा को 65 वार्ड मिले, जबकि कांग्रेस के खाते में चार और बसपा को एक वार्ड मिला।

इन परिणामों के बाद अब डीग जिले में नगर निकायों के अध्यक्ष और सभापति पदों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कई जगह बहुमत का गणित किसी एक दल के पक्ष में सीधे तौर पर नहीं बैठ रहा है। ऐसे में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। डीग नगर परिषद समेत कई निकायों में बोर्ड गठन से पहले पार्षदों के बीच बैठकों, संपर्क और रणनीति का दौर शुरू हो चुका है।

180 वार्डों में 110 निर्दलीय विजेता

डीग जिले के छह नगरीय निकायों में कुल 180 वार्ड हैं। चुनाव परिणामों में निर्दलीयों ने 110 वार्ड जीतकर सबसे बड़ी संख्या दर्ज की। भाजपा के 65 उम्मीदवार विजयी हुए। कांग्रेस को महज चार वार्डों में सफलता मिली, जबकि बसपा ने एक वार्ड जीता।

डीग नगर परिषद में 40 वार्ड हैं। यहां निर्दलीय उम्मीदवारों ने 24 वार्डों में जीत हासिल की, जबकि भाजपा के 16 उम्मीदवार विजयी रहे। यानी 40 सदस्यीय परिषद में किसी एक खेमे के पास अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा नहीं है। अध्यक्ष पद के लिए 21 पार्षदों का समर्थन जरूरी होगा। उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के अनुसार 24 निर्दलीय और 16 भाजपा पार्षद निर्वाचित हुए हैं।

यही वजह है कि डीग नगर परिषद का अगला सभापति कौन होगा, इसे लेकर स्थानीय स्तर पर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं।

डीग नगर परिषद में सामने आया नया समीकरण

डीग नगर परिषद के परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया कि स्थानीय चुनावों में मतदाताओं का रुझान पार्टी के बजाय स्थानीय प्रत्याशी, व्यक्तिगत पहचान और वार्ड स्तर के समीकरणों से भी प्रभावित हो सकता है।

40 वार्डों में भाजपा के 16 और निर्दलीयों के 24 प्रत्याशियों की जीत के बाद अब बोर्ड गठन के लिए निर्दलीय पार्षदों का समर्थन निर्णायक स्थिति में दिखाई दे रहा है। चुनाव परिणाम के बाद सभापति पद के लिए नामांकन प्रक्रिया में भी अलग-अलग समीकरण सामने आए।

See also  मेजर के स्वागत में निकले रोड शो ने खड़े किए राजनीति, प्रशासन पर कई सवाल कई प्रश्न सार्वजनिक बहस का विषय बने

16 सितंबर को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार भाजपा ने अपने अधिकृत प्रत्याशी के रूप में अर्पित गुप्ता को मैदान में उतारा, जबकि भाजपा से निर्वाचित राहुल लवानिया और मालती देवी ने भी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल किया। इससे सभापति चुनाव को लेकर पार्टी के भीतर के समीकरण भी सार्वजनिक हुए।

हालांकि, अंतिम राजनीतिक स्थिति का आकलन अध्यक्ष पद के चुनाव के बाद ही स्पष्ट होगा। केवल पार्षदों की चुनावी जीत के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि बोर्ड किसके नेतृत्व में बनेगा।

जिले के दूसरे निकायों में भी निर्दलीयों का प्रभाव

डीग नगर परिषद अकेला ऐसा निकाय नहीं है जहां निर्दलीय प्रत्याशियों ने मजबूत स्थिति बनाई है। उपलब्ध परिणामों के अनुसार बृजनगर नगरपालिका के 35 वार्डों में निर्दलीयों ने 23 सीटें जीतीं। कामां के 35 वार्डों में 21 निर्दलीय उम्मीदवार विजयी हुए। कुम्हेर के 25 वार्डों में निर्दलीयों ने 13 सीटें हासिल कीं।

पहाड़ी नगरपालिका के 20 वार्डों में भाजपा के 13 और निर्दलीयों के सात उम्मीदवार विजयी हुए। वहीं सीकरी नगरपालिका के 25 वार्डों में 16 निर्दलीय प्रत्याशी जीते। इन परिणामों से साफ है कि निर्दलीय प्रत्याशियों का प्रदर्शन किसी एक निकाय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे जिले के शहरी निकाय चुनावों में व्यापक रूप से दिखाई दिया।

अध्यक्ष पदों पर भी शुरू हुई गतिविधियां

वार्ड चुनाव के बाद अब अध्यक्ष और सभापति पद के चुनाव अगला महत्वपूर्ण चरण हैं। राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव कार्यक्रम के अनुसार सदस्य पदों के चुनाव के बाद निकायों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए 21 सितंबर को चुनाव होना है।

इसी कारण डीग जिले के नगरीय निकायों में निर्वाचित पार्षदों से संपर्क का दौर महत्वपूर्ण हो गया है। जिन निकायों में किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, वहां निर्दलीय पार्षदों की भूमिका स्वाभाविक रूप से बढ़ गई है।

पहाड़ी नगरपालिका में अध्यक्ष पद को लेकर स्थिति अपेक्षाकृत अलग रही। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार वहां भाजपा प्रत्याशी शिशुपाल शर्मा निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए। दूसरी ओर कामां नगरपालिका में अध्यक्ष पद के लिए मुकाबले को लेकर अंतिम समय तक गतिविधियां जारी रहीं।

See also  बृजनगर में अंबेडकर धर्मशाला का शिलान्यास, सामाजिक न्याय और शिक्षा की नई अलख जगाएगा भवन

स्थानीय मुद्दों ने बदली चुनावी तस्वीर?

डीग जिले के निकाय चुनाव परिणामों को केवल दलगत राजनीति के चश्मे से देखना पूरी तस्वीर नहीं बताएगा। नगर निकाय चुनाव वार्ड स्तर के चुनाव होते हैं, जहां प्रत्याशी की व्यक्तिगत पहचान, स्थानीय संपर्क, मोहल्ले की समस्याएं और मतदाताओं से सीधा संबंध महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

भाजपा की ओर से स्थानीय स्तर पर यह तर्क दिया गया है कि कई निर्दलीय प्रत्याशी पार्टी से जुड़े या पार्टी के समर्थक रहे हैं और टिकट न मिलने के बाद अलग चुनाव मैदान में उतरे। डीग-कुम्हेर भाजपा के जिला अध्यक्ष सतीश बंसल ने भी मीडिया से बातचीत में ऐसा दावा किया है। दूसरी ओर चुनाव परिणामों का सीधा तथ्य यही है कि इन प्रत्याशियों ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीता है। इसलिए उनके आगे के राजनीतिक रुख का निर्धारण उनके स्वयं के फैसलों और बोर्ड गठन के समय होने वाले समर्थन से होगा।

बड़े क्षेत्रीय परिदृश्य में भी चर्चा

डीग के परिणामों को आसपास के क्षेत्र के व्यापक चुनावी परिणामों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। भरतपुर और डीग को मिलाकर 13 शहरी स्थानीय निकायों के कुल 415 वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने 262 वार्ड जीते। यह कुल वार्डों का 63.1 प्रतिशत है। भाजपा को 131 और कांग्रेस को 19 वार्ड मिले।

डीग अकेले जिले की बात करें तो 180 वार्डों में 110 निर्दलीय विजेता रहे। यह लगभग 61 प्रतिशत बैठता है। यानी डीग में भी निर्दलीय प्रत्याशियों की संख्या बहुत अधिक रही। यही कारण है कि चुनाव के बाद सबसे बड़ा सवाल केवल यह नहीं है कि किस दल के कितने पार्षद हैं, बल्कि यह है कि निर्दलीय पार्षद आगे किस तरह के स्थानीय बोर्ड गठन में भूमिका निभाते हैं।

अब निगाह बोर्ड गठन पर

चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद अब डीग जिले की स्थानीय राजनीति का अगला चरण शुरू हो गया है। वार्डों में जीत दर्ज कर चुके पार्षदों की भूमिका अब अध्यक्ष और सभापति के चुनाव में सामने आएगी। जहां किसी एक दल के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है, वहां समर्थन जुटाना बोर्ड गठन की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया होगी।

See also  राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना से बदली जिंदगी: नगला वादीपुर के मुस्तफा को मिला राहत का सहारा

डीग नगर परिषद इसका प्रमुख उदाहरण है। 40 सदस्यीय परिषद में भाजपा के 16 और निर्दलीय 24 पार्षद हैं। अध्यक्ष पद के लिए 21 मतों की जरूरत होगी। ऐसे में निर्दलीय पार्षदों का रुख पूरे चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकता है।

हालांकि स्थानीय निकायों में पार्षदों के चुनाव और अध्यक्ष के चुनाव के बीच राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल सकते हैं। इसलिए वर्तमान संख्या को अंतिम बोर्ड संरचना मानना उचित नहीं होगा। अंतिम तस्वीर अध्यक्ष पद के मतदान के बाद ही सामने आएगी।

जनता की उम्मीदें अब बोर्ड से

डीग जिले में नगर निकाय चुनाव का शोर अब धीरे-धीरे बोर्ड गठन की प्रक्रिया में बदल रहा है। चुनाव के दौरान प्रत्याशियों ने स्थानीय समस्याओं और विकास के मुद्दों को सामने रखा होगा, लेकिन अब निर्वाचित पार्षदों के सामने उन वादों को धरातल पर उतारने की चुनौती होगी।

शहरी क्षेत्रों में सड़क, नाली, पेयजल, सफाई, स्ट्रीट लाइट, यातायात व्यवस्था, अतिक्रमण, पार्कों का रखरखाव और नागरिक सुविधाएं सीधे जनता से जुड़ी समस्याएं हैं। इन विषयों पर नए बोर्ड की कार्यक्षमता आने वाले समय में जनता के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण होगी।

डीग जिले के निकाय चुनाव परिणामों ने एक स्पष्ट संदेश जरूर दिया है कि स्थानीय स्तर पर निर्दलीय प्रत्याशियों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 180 वार्डों में 110 निर्दलीय जीत के साथ अब बोर्ड गठन की पूरी तस्वीर इन निर्वाचित पार्षदों के रुख से भी प्रभावित होगी।

फिलहाल डीग की निगाहें 21 सितंबर को होने वाले अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव पर टिकी हैं। इसके बाद ही यह साफ होगा कि चुनावी मैदान में अलग-अलग नामों से जीते पार्षद किस तरह स्थानीय बोर्ड की सत्ता का ढांचा तैयार करते हैं। जनता ने वार्डों में अपना प्रतिनिधि चुन दिया है; अब बारी निर्वाचित प्रतिनिधियों की है कि वे स्थानीय विकास, नागरिक सुविधाओं और प्रशासनिक जवाबदेही के मुद्दों पर किस तरह काम करते हैं।

यायावर
Author: यायावर

यायावर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Read More

Cricket Live Score

Rashifal

और पढ़ें