रिपोर्ट: संजय सिंह राणा
चित्रकूट। अवैध कच्ची शराब के कारोबार की सूचना पर कार्रवाई करने पहुंची आबकारी विभाग की टीम पर कथित रूप से हमला किए जाने का मामला सामने आया है। घटना में आबकारी विभाग के दो कर्मचारियों को गंभीर चोटें आने की बात प्राथमिकी में दर्ज है। मामले में कर्वी कोतवाली नगर पुलिस ने पांच नामजद आरोपियों समेत करीब 9 से 10 अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्राथमिकी के मुताबिक घटना 14 सितंबर 2026 की शाम ग्राम डिलौरा से गढ़ीवा जाने वाले मार्ग पर तिराहा के पास हुई।
मामले में आबकारी निरीक्षक क्षेत्र-1 कर्वी, चित्रकूट प्रणव कुमार पाण्डेय की ओर से पुलिस को दी गई लिखित सूचना के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस दस्तावेज के अनुसार मुकदमा कर्वी कोतवाली नगर में 15 सितंबर 2026 को रात 1:36 बजे दर्ज हुआ। प्राथमिकी संख्या 0553/2026 दर्ज की गई है। घटना को लेकर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 191(2), 132, 121(1), 121(2), 115(2), 352 और 351(3) के तहत कार्रवाई शुरू की है।
अवैध शराब की सूचना पर डिलौरा पहुंची थी टीम
पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार 14 सितंबर की शाम आबकारी विभाग की टीम को डिलौरा गांव क्षेत्र में अवैध शराब निर्माण और बिक्री की सूचना मिली थी। आबकारी विभाग की टीम में आबकारी सिपाही रोहित गहलोत, शमशेर अली, धर्मेंद्र राजपूत तथा महिला आबकारी सिपाही सुमित्रा देवी के साथ वाहन चालक प्रेमराज यादव और शिवसागर सहित अन्य कर्मचारी शामिल थे।
दस्तावेज में बताया गया है कि टीम सरकारी वाहन के अलावा एक निजी वाहन के साथ कार्रवाई के लिए निकली थी। आबकारी टीम का उद्देश्य अवैध शराब के निष्कर्षण और परिवहन की रोकथाम करना बताया गया है। शिकायत में कहा गया है कि टीम सूचना के आधार पर डिलौरा से गढ़ीवा जाने वाले रास्ते पर पहुंची।
यहीं मुखबिर ने टीम को कथित तौर पर उस स्थान की जानकारी दी, जहां अवैध कच्ची शराब तैयार किए जाने और बेचे जाने की सूचना थी। प्राथमिकी में कहा गया है कि टीम करीब शाम 6:10 बजे मौके पर पहुंची और कार्रवाई शुरू करने लगी।
कार्रवाई शुरू होते ही कथित रूप से जुटे कई लोग
प्राथमिकी के मुताबिक आबकारी टीम द्वारा अवैध शराब के निर्माण और बिक्री की कार्रवाई शुरू किए जाने के दौरान वहां करीब 10 से 15 लोग पहुंच गए। आरोप है कि इन लोगों ने आबकारी कर्मचारियों को गाली देना शुरू कर दिया और अवैध शराब बनाने की कार्रवाई को लेकर विरोध जताया।
शिकायत में दर्ज आरोप के अनुसार भीड़ में शामिल लोगों ने कथित रूप से आबकारी कर्मचारियों के साथ मारपीट शुरू कर दी। लाठी-डंडे और लोहे की रॉड आदि से हमला किए जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायत के मुताबिक टीम के सदस्यों ने बीच-बचाव और बचाव की कोशिश की, लेकिन आरोपित पक्ष की ओर से जान से मारने की धमकी भी दी गई।
यह आरोप पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज शिकायत का हिस्सा हैं। इन आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण पुलिस की विवेचना और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
आबकारी सिपाही के सिर पर गंभीर चोट का आरोप
दर्ज प्राथमिकी में कहा गया है कि घटना के बाद आबकारी सिपाही सागर के सिर पर गंभीर चोट आई। शिकायत के अनुसार चोट लगने के कारण उनका सिर फट गया। इसके अलावा आबकारी सिपाही शिवसागर के हाथ और उंगलियों पर भी चोट लगने की बात दर्ज की गई है।
घटना के दौरान टीम के कर्मचारियों को चोट लगने के बाद मामला गंभीर हो गया। शिकायत के अनुसार मारपीट करने वाले लोग मौके से चले गए। बाद में घायल कर्मचारियों को चिकित्सा सुविधा के लिए जिला अस्पताल ले जाने की प्रक्रिया की गई।
पुलिस दस्तावेज में घटना के बाद की कार्रवाई का उल्लेख भी है। प्राथमिकी में कहा गया है कि घायल कर्मचारियों का मेडिकल कराया गया। ऐसे मामलों में मेडिकल रिपोर्ट जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है, क्योंकि चोटों की प्रकृति, स्थान और गंभीरता की पुष्टि चिकित्सकीय परीक्षण से होती है।
पांच नामजद, 9 से 10 अज्ञात लोगों का उल्लेख
पुलिस में दर्ज प्राथमिकी में पांच लोगों को नामजद किया गया है। इनमें विजय निषाद पुत्र मोतीलाल, पुरुषोत्तम उर्फ राजा पुत्र मुन्ना निषाद, जानकी निषाद पुत्र देशराज, सुख्खू निषाद पुत्र देशराज और देशराज निषाद पुत्र बच्चन निषाद के नाम दर्ज हैं।
इसके अलावा शिकायत में करीब 9 से 10 अज्ञात व्यक्तियों द्वारा भी मारपीट किए जाने का उल्लेख है। यानी पुलिस की जांच केवल नामजद आरोपियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि घटना में शामिल अन्य अज्ञात लोगों की पहचान भी जांच का हिस्सा हो सकती है।
दस्तावेज में नामजद आरोपियों के पते के रूप में डिलौरा थाना कर्वी और लसरीहन, नया गांव, सतना क्षेत्र आदि का उल्लेख मिलता है। पुलिस अब यह भी जांच करेगी कि घटना के समय मौके पर कौन-कौन लोग मौजूद थे और मारपीट में किसकी क्या भूमिका रही।
पुलिस ने दर्ज की विभिन्न धाराओं में एफआईआर
कर्वी कोतवाली नगर पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। प्राथमिकी में धारा 191(2), 132, 121(1), 121(2), 115(2), 352 और 351(3) का उल्लेख है।
इन धाराओं का शामिल होना इस बात को दर्शाता है कि पुलिस ने शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर सरकारी कार्य में बाधा, मारपीट, चोट पहुंचाने, धमकी तथा अन्य कथित आपराधिक कृत्यों से संबंधित प्रावधानों के तहत प्रारंभिक कानूनी कार्रवाई की है। हालांकि एफआईआर में धाराओं का दर्ज होना आरोपों का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता। विवेचना में सामने आने वाले तथ्यों, मेडिकल रिपोर्ट, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
जांच अधिकारी को सौंपी गई विवेचना
एफआईआर के कार्रवाई वाले हिस्से के अनुसार मामले की विवेचना उपनिरीक्षक यदुवीर सिंह को सौंपी गई है। पुलिस अब घटना के विभिन्न पहलुओं की जांच करेगी। इसमें घटनास्थल का निरीक्षण, घायल आबकारी कर्मचारियों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट, शिकायत में बताए गए आरोपियों की भूमिका और अज्ञात आरोपियों की पहचान जैसे बिंदु महत्वपूर्ण रहेंगे।
इसके साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि आबकारी टीम किस सूचना के आधार पर मौके पर पहुंची थी, वहां वास्तव में अवैध शराब निर्माण या बिक्री से जुड़ी गतिविधि थी या नहीं और कार्रवाई के दौरान विवाद किस परिस्थिति में शुरू हुआ।
अगर घटनास्थल पर मौजूद किसी व्यक्ति के पास घटना से संबंधित वीडियो, मोबाइल रिकॉर्डिंग या अन्य साक्ष्य उपलब्ध हैं, तो वह भी विवेचना में महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि उपलब्ध प्राथमिकी में ऐसे किसी वीडियो या इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है।
24 घंटे बाद भी गिरफ्तारी से जुड़े सवाल
घटना 14 सितंबर की शाम करीब 6:10 बजे की बताई गई है, जबकि पुलिस में सूचना 15 सितंबर को रात 1:36 बजे दर्ज हुई। प्राथमिकी में शिकायतकर्ता की ओर से रिपोर्ट दर्ज कराने में देरी के संबंध में कोई विशेष कारण दर्ज नहीं दिखता।
मामले में सबसे बड़ा सवाल अब यह है कि आबकारी टीम पर कथित हमला करने वाले नामजद आरोपियों और अज्ञात आरोपियों की गिरफ्तारी कब होती है। शिकायत में जिन लोगों को नामजद किया गया है, उनकी भूमिका पुलिस जांच में स्पष्ट होनी है। इसके अलावा अज्ञात बताए गए लोगों की पहचान भी पुलिस के लिए चुनौती होगी।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आबकारी विभाग की टीम कथित तौर पर अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई के लिए मौके पर गई थी। यदि सरकारी विभाग की कार्रवाई के दौरान कर्मचारियों पर हमला किए जाने का आरोप सही पाया जाता है, तो यह कानून-व्यवस्था और अवैध शराब के नेटवर्क से जुड़े दबाव दोनों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई और सुरक्षा दोनों जरूरी
चित्रकूट समेत ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध कच्ची शराब के खिलाफ कार्रवाई केवल राजस्व या आबकारी विभाग का विषय नहीं है। इसका सीधा संबंध सार्वजनिक स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था से भी जुड़ता है। अवैध शराब की गुणवत्ता की कोई गारंटी नहीं होती और इसके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले पदार्थ लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।
दूसरी तरफ अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई करने वाली टीमों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यदि कार्रवाई के दौरान सरकारी कर्मचारियों के साथ हिंसा होती है, तो इसका असर भविष्य की प्रवर्तन कार्रवाई पर पड़ सकता है। इसलिए ऐसे मामलों में प्रशासन और पुलिस की भूमिका केवल मुकदमा दर्ज करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि जांच को निष्पक्ष और प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाना भी जरूरी है।
अब जांच बताएगी हमले की पूरी कहानी
इस पूरे मामले में अभी पुलिस के सामने कई सवाल हैं। क्या आबकारी टीम पर हमला पूर्व नियोजित था? क्या मौके पर मौजूद सभी लोग अवैध शराब के कारोबार से जुड़े थे? मारपीट में किस-किस व्यक्ति ने हिस्सा लिया? घायल कर्मचारियों को कितनी गंभीर चोटें आईं? नामजद आरोपियों के अलावा अज्ञात बताए गए लोगों की पहचान कैसे होगी? और क्या घटनास्थल से अवैध शराब निर्माण से संबंधित कोई सामग्री बरामद हुई?
इन सवालों के जवाब पुलिस की विवेचना से सामने आएंगे।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि अवैध शराब की कार्रवाई करने गई आबकारी टीम पर हमले के आरोप में कर्वी कोतवाली नगर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। पांच लोगों को नामजद किया गया है, जबकि करीब 9 से 10 अज्ञात व्यक्तियों का भी उल्लेख प्राथमिकी में है। दो आबकारी कर्मचारियों के घायल होने की बात शिकायत में दर्ज है और मामले की जांच उपनिरीक्षक यदुवीर सिंह को सौंपी गई है।
अब निगाह इस बात पर है कि पुलिस जांच कितनी तेजी से आगे बढ़ती है और कथित हमले में शामिल लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि अवैध शराब निर्माण और बिक्री के मूल आरोप की जांच किस स्तर तक पहुंचती है। क्योंकि मामला केवल एक टीम के साथ कथित मारपीट का नहीं, बल्कि उस अवैध कारोबार की तह तक पहुंचने का भी है, जिसके खिलाफ कार्रवाई करने के दौरान यह विवाद सामने आया।
Author: यायावर
यायावर

























