इरफान अली लारी की रिपोर्ट
देवरिया। महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत, आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने के उद्देश्य से महिला व्यापार मंडल देवरिया की एक महत्वपूर्ण बैठक सोमवार को बरहज रोड स्थित एक मैरेज हाल में आयोजित की गई। बैठक में व्यापार मंडल उत्तर प्रदेश के पदाधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में महिला पदाधिकारी एवं सदस्य शामिल हुईं। कार्यक्रम में महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण, लघु उद्योगों से जोड़ने, हुनर विकसित करने और समाज में उनके मान-सम्मान एवं स्वाभिमान को मजबूत करने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में व्यापार मंडल उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष जनसेवक मंटू बाबू जायसवाल मौजूद रहे। उनके साथ प्रदेश महासचिव ऋषिकेश, प्रदेश उपाध्यक्ष राधेश्याम, आनंद, वीरेंद्र और राजकुमार उर्फ राजू सहित संगठन के कई पदाधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता महिला व्यापार मंडल देवरिया की जिलाध्यक्ष विभा पांडेय ने की, जबकि संचालन आशा ने किया।
महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण पर जोर
बैठक को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष जनसेवक मंटू बाबू जायसवाल ने कहा कि समाज के विकास में महिलाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। महिला समाज का उत्थान और विकास व्यापार मंडल उत्तर प्रदेश के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं हैं। शिक्षा, व्यापार, सामाजिक सेवा, प्रशासन, राजनीति, तकनीक और स्वरोजगार सहित विभिन्न क्षेत्रों में महिलाएं अपनी क्षमता साबित कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को केवल अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि उन्हें ऐसा वातावरण भी देना जरूरी है, जहां वे अपनी प्रतिभा और हुनर के आधार पर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। इसी सोच के साथ महिला व्यापार मंडल देवरिया की ओर से महिलाओं को विभिन्न प्रकार के लघु उद्योगों और स्वरोजगार से जोड़ने के लिए जागरूक एवं प्रशिक्षित किया जा रहा है।
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यदि महिलाओं को सही प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और सहयोग मिले तो वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर सकती हैं। महिला व्यापार मंडल की ओर से किए जा रहे प्रयास इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
लघु उद्योग और कारीगरी से जुड़ेंगी महिलाएं
महिला व्यापार मंडल देवरिया की बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि महिलाओं को पारंपरिक घरेलू गतिविधियों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें ऐसे कौशल से जोड़ा जाए, जिनसे वे घर या छोटे स्तर पर अपना कारोबार शुरू कर सकें। संगठन की ओर से महिलाओं को विभिन्न प्रकार की कारीगरी और लघु उद्योगों का प्रशिक्षण देने की पहल की जा रही है।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि बहुत सी महिलाओं के पास हुनर तो है, लेकिन उचित मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और बाजार की जानकारी के अभाव में वे उसका व्यावसायिक उपयोग नहीं कर पातीं। ऐसे में महिला व्यापार मंडल उन्हें प्रशिक्षण और संगठनात्मक सहयोग देकर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
इस पहल से महिलाओं को स्वरोजगार की ओर बढ़ने का अवसर मिलने के साथ ही उनकी आर्थिक निर्भरता भी कम हो सकती है। संगठन का प्रयास है कि अधिक से अधिक महिलाएं अपने कौशल को व्यवसाय का रूप दें और परिवार की आय बढ़ाने में भागीदार बनें।
महिला सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा का संकल्प
महिला व्यापार मंडल देवरिया की जिलाध्यक्ष विभा पांडेय ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि व्यापार मंडल उत्तर प्रदेश एक गैर-राजनीतिक पंजीकृत व्यापारिक संगठन के रूप में महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि संगठन के प्रदेश अध्यक्ष जनसेवक मंटू बाबू जायसवाल के नेतृत्व में संगठन का विस्तार प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से हो रहा है।
विभा पांडेय ने कहा कि महिला समाज के मान-सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा के लिए संगठन पूरी तरह प्रतिबद्ध है। देवरिया जनपद में भी महिला व्यापार मंडल का विस्तार लगातार किया जा रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को संगठन से जोड़कर उन्हें अपने अधिकारों, संभावनाओं और आर्थिक अवसरों के प्रति जागरूक किया जा सके।
उन्होंने कहा कि जनपद की किसी भी महिला को किसी प्रकार की सहायता या सहयोग की आवश्यकता हो तो वह महिला व्यापार मंडल देवरिया से संपर्क कर सकती है। संगठन अपनी क्षमता के अनुसार महिलाओं को सहयोग उपलब्ध कराने का प्रयास करेगा।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल
जिलाध्यक्ष ने कहा कि संगठन का लक्ष्य केवल महिलाओं को सदस्य बनाना नहीं है, बल्कि उन्हें वास्तविक अर्थों में आत्मनिर्भर बनाना है। इसके लिए महिलाओं को विभिन्न प्रकार की कारीगरी और उपयोगी कौशल का प्रशिक्षण देने की योजना पर काम किया जा रहा है। प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार के लिए तैयार किया जाएगा, जिससे वे अपने घर से भी छोटे स्तर पर आर्थिक गतिविधियां शुरू कर सकें।
उन्होंने कहा कि किसी महिला की आर्थिक मजबूती केवल उसके व्यक्तिगत जीवन को नहीं बदलती, बल्कि उसका प्रभाव पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है। जब महिला आर्थिक रूप से मजबूत होती है तो उसके निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है और परिवार के भविष्य को बेहतर बनाने में उसकी भूमिका और मजबूत होती है।
संगठन के विस्तार पर भी हुई चर्चा
बैठक में महिला व्यापार मंडल देवरिया के संगठनात्मक विस्तार पर भी चर्चा हुई। पदाधिकारियों ने कहा कि महिलाओं की बढ़ती भागीदारी संगठन के लिए सकारात्मक संकेत है। आने वाले समय में जनपद के अलग-अलग क्षेत्रों में महिलाओं को संगठन से जोड़ने और उन्हें स्वरोजगार तथा व्यापार से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।
कार्यक्रम में मौजूद पदाधिकारियों ने कहा कि महिलाओं की प्रतिभा और क्षमता को पहचानकर उन्हें उचित मंच उपलब्ध कराना समय की जरूरत है। यदि महिलाओं को प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और बाजार से जोड़ने का अवसर मिले तो वे छोटे उद्योगों को बड़े कारोबार में बदलने की क्षमता रखती हैं।
बड़ी संख्या में महिलाएं रहीं मौजूद
महिला व्यापार मंडल देवरिया की बैठक में व्यापार मंडल उत्तर प्रदेश के पदाधिकारियों के साथ संतोष बर्नवाल, डॉ. शैलेन्द्र जायसवाल, दिनेश जायसवाल, संजय, संजीव और शम्भू सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा महिला व्यापार मंडल देवरिया की पदाधिकारी और सदस्य बड़ी संख्या में कार्यक्रम में शामिल हुईं।
बैठक के दौरान महिलाओं को संगठन के उद्देश्यों और आगामी गतिविधियों के बारे में जानकारी दी गई। महिला सदस्यों ने भी महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में चलाए जा रहे प्रयासों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने कहा कि महिला सशक्तीकरण केवल भाषणों और बैठकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। महिलाओं को प्रशिक्षण, रोजगार, व्यापार और आर्थिक अवसरों से जोड़कर ही आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस बदलाव लाया जा सकता है। महिला व्यापार मंडल देवरिया की ओर से लघु उद्योग और कारीगरी के प्रशिक्षण पर दिया जा रहा जोर इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाने वाला प्रयास माना जा रहा है।
महिला व्यापार मंडल देवरिया की बैठक इस संदेश के साथ संपन्न हुई कि महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने, उनके हुनर को पहचान दिलाने और उन्हें स्वावलंबी बनाने के प्रयासों को लगातार आगे बढ़ाया जाएगा। संगठन का मानना है कि जब महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होंगी, तभी परिवार, समाज और स्थानीय अर्थव्यवस्था भी अधिक मजबूत होगी।

























