देवरिया-बिहार बॉर्डर बना शराब तस्करों का कॉरिडोर, मेहरौना बॉर्डर से 55 पेटी अंग्रेजी शराब के साथ मेरठ का तस्कर गिरफ्तार
इरफान अली लारी की रिपोर्ट
देवरिया। बिहार में लागू पूर्ण शराबबंदी कानून का असर अब उत्तर प्रदेश की सीमावर्ती जिलों में साफ दिखाई देने लगा है। खासतौर पर देवरिया-बिहार बॉर्डर इन दिनों शराब तस्करों के लिए सबसे सुरक्षित रूट बनता जा रहा है। हालांकि पुलिस की सक्रियता और लगातार चलाए जा रहे चेकिंग अभियान के चलते तस्करों के मंसूबों पर भी लगातार पानी फिर रहा है।
सोमवार को लार थाना पुलिस ने मेहरौना बॉर्डर पर बड़ी कार्रवाई करते हुए हरियाणा निर्मित 55 पेटी अंग्रेजी शराब बरामद की। इस मामले में मेरठ निवासी एक तस्कर को गिरफ्तार किया गया है, जबकि पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने की तैयारी में जुट गई है।
भूसे के नीचे छिपाकर ले जाई जा रही थी शराब
जानकारी के मुताबिक लार थाना पुलिस मेहरौना बॉर्डर पर नियमित वाहन चेकिंग अभियान चला रही थी। बिहार सीमा से सटे इस इलाके को पहले से ही संवेदनशील माना जाता है, क्योंकि यहां से होकर अवैध शराब की खेप बिहार तक पहुंचाई जाती रही है।
चेकिंग के दौरान पुलिस की नजर यूपी 15 एफटी 9915 नंबर की एक पिकअप गाड़ी पर पड़ी। वाहन चालक पुलिस को देखकर घबराया हुआ दिखाई दिया, जिसके बाद पुलिस टीम को शक हुआ और वाहन की गहन तलाशी ली गई।
पहली नजर में पिकअप में भूसा लदा हुआ दिखाई दे रहा था, लेकिन जब पुलिस ने भूसे को हटाकर नीचे देखा तो वहां शराब की पेटियां तह बनाकर छिपाई गई थीं। तलाशी के दौरान हरियाणा मार्का 55 पेटी अंग्रेजी शराब बरामद हुई। इतनी बड़ी मात्रा में शराब मिलने के बाद पुलिस टीम ने तत्काल वाहन को कब्जे में लेते हुए चालक को हिरासत में ले लिया।
मेरठ का रहने वाला है गिरफ्तार तस्कर
पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी की पहचान निशार खान पुत्र अयूब खान निवासी मोदीपुरम, पल्लवपुरम फेज-2, थाना पल्लवपुरम, जनपद मेरठ के रूप में हुई है।
प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने कबूल किया कि शराब की यह खेप बिहार में ऊंचे दामों पर बेचने के लिए ले जाई जा रही थी। बिहार में शराबबंदी लागू होने के कारण वहां शराब की तस्करी करने वाले गिरोह सक्रिय हैं और यूपी की सीमाओं का इस्तेमाल सप्लाई रूट के तौर पर किया जा रहा है।
पुलिस को आशंका है कि यह केवल एक छोटी कड़ी है और इसके पीछे बड़ा संगठित नेटवर्क काम कर रहा है। यही वजह है कि अब पुलिस इस मामले को केवल एक गिरफ्तारी तक सीमित न रखकर पूरे गिरोह की तलाश में जुट गई है।
बिहार शराबबंदी के बाद सक्रिय हुए तस्करी गिरोह
बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद सीमावर्ती जिलों में शराब तस्करी तेजी से बढ़ी है। देवरिया, कुशीनगर, बलिया और गोरखपुर जैसे जिलों के कई सीमावर्ती मार्ग तस्करों के लिए सुरक्षित रास्ते बन चुके हैं।
तस्कर अब शराब की खेप को छिपाने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। कभी फल-सब्जियों के नीचे शराब छिपाई जाती है तो कभी भूसे, लकड़ी या अन्य सामान की आड़ लेकर अवैध शराब बिहार भेजी जाती है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शराब तस्कर छोटे वाहनों का इस्तेमाल ज्यादा कर रहे हैं ताकि वे आसानी से ग्रामीण मार्गों से निकल सकें और पुलिस की निगरानी से बच जाएं। हालांकि लगातार बढ़ती सख्ती के कारण अब तस्करों के लिए यह काम आसान नहीं रह गया है।
चनुकी, पटनेजी और मेहरौना पुल बने तस्करी के प्रमुख रूट
लार थाना क्षेत्र के चनुकी पुल, पटनेजी पुल और मेहरौना पुल लंबे समय से शराब तस्करों के पसंदीदा मार्ग माने जाते रहे हैं। इन रास्तों से बिहार तक पहुंचना आसान माना जाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय इन इलाकों में संदिग्ध वाहनों की आवाजाही अक्सर देखी जाती है। कई बार ग्रामीणों ने इसकी शिकायत भी की, जिसके बाद पुलिस ने निगरानी बढ़ाई है।
गौरतलब है कि दो दिन पहले भी पटनेजी पुल के पास बांध किनारे खड़ी एक लावारिस पिकअप से भारी मात्रा में देसी शराब बरामद हुई थी। हालांकि उस दौरान तस्कर पुलिस को चकमा देकर भागने में सफल रहे थे।
लगातार हो रही बरामदगी यह साबित कर रही है कि शराब तस्करों ने सीमावर्ती इलाकों को अपना स्थायी ट्रांजिट प्वाइंट बना लिया है।
पुलिस ने बढ़ाई निगरानी, ड्रोन और सीसीटीवी से रखी जा रही नजर
सीओ सलेमपुर ने बताया कि बिहार बॉर्डर से जुड़े सभी संवेदनशील मार्गों पर पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है। रात के समय विशेष चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है ताकि किसी भी संदिग्ध वाहन को पकड़ा जा सके।
पुलिस अब आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल कर रही है। ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी की मदद से सीमावर्ती क्षेत्रों की निगरानी की जा रही है। ग्रामीण मार्गों और पुलों के आसपास पुलिस की गश्त भी तेज कर दी गई है।
अधिकारियों का कहना है कि शराब तस्करी में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ गैंगस्टर जैसी सख्त कार्रवाई भी की जा सकती है। पुलिस को उम्मीद है कि लगातार दबिश और निगरानी से जल्द ही इस अवैध कारोबार पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।
करीब 8 लाख रुपये आंकी गई बरामद शराब की कीमत
पुलिस के अनुसार बरामद 55 पेटी अंग्रेजी शराब की कीमत करीब 8 लाख रुपये बताई जा रही है। इतनी बड़ी खेप का पकड़ा जाना पुलिस के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है।
आरोपी के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शराब की खेप हरियाणा से किस माध्यम से यूपी पहुंची और बिहार में इसे किस गिरोह तक सप्लाई किया जाना था। जांच एजेंसियां मोबाइल कॉल डिटेल और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के जरिए पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हुई हैं।
सीमावर्ती इलाकों में बढ़ रही चिंता
लगातार बढ़ रही शराब तस्करी ने सीमावर्ती गांवों के लोगों की चिंता भी बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अवैध कारोबार बढ़ने से अपराध की घटनाओं में भी इजाफा हो सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बॉर्डर से जुड़े रास्तों पर स्थायी पुलिस चौकियां बनाई जाएं और रात के समय विशेष गश्त बढ़ाई जाए ताकि तस्करों पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके।








