रितेश कुमार गुप्ता की रिपोर्ट
सीतापुर। बैराजों से छोड़े गए करीब डेढ़ लाख क्यूसेक पानी का असर अब सीतापुर शहर और उसके आसपास के निचले इलाकों में साफ दिखाई देने लगा है। पिरई और सरायन नदी के बढ़ते जलस्तर ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। गुरुवार दोपहर पिरई नदी के किनारे बसी केशव ग्रीन सिटी कॉलोनी में अचानक बाढ़ का पानी पहुंच गया और देखते ही देखते कॉलोनी के करीब 200 घर इसकी चपेट में आ गए। कई घरों के आसपास पानी जमा होने के साथ लोगों के लिए घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। रोजमर्रा की जरूरतों के लिए आवाजाही भी प्रभावित हुई है।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिस पानी को कुछ समय पहले तक नदी की सीमा के भीतर माना जा रहा था, वही पानी अब रिहायशी इलाके तक पहुंच चुका है। कॉलोनी की सड़कों और संपर्क मार्गों पर पानी बढ़ने से लोगों की दिनचर्या अस्त-व्यस्त हो गई है। घरों में रहने वाले परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षित आवागमन, पीने के पानी, भोजन, दवा और जरूरी सामान की उपलब्धता को लेकर पैदा हो गई है।
डेढ़ लाख क्यूसेक पानी ने बढ़ाई मुश्किल
सीतापुर में बाढ़ की स्थिति को समझने के लिए बैराजों से छोड़े जा रहे पानी को अहम संकेतक माना जा रहा है। करीब 1.50 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद नदियों के जलस्तर में तेजी से बदलाव हुआ है। नदी का पानी बढ़ने के साथ उसका फैलाव भी निचले इलाकों की ओर होता है। यही कारण है कि पिरई और सरायन नदी के किनारे बसे इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
हाल के दिनों में सीतापुर की नदियों में बढ़ते जलस्तर की स्थिति लगातार सामने आती रही है। अगस्त के अंतिम दिनों में बैराजों से लाखों क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद जिले के कई हिस्सों में बाढ़ और कटान का खतरा बढ़ने की रिपोर्ट सामने आई थी। 31 अगस्त की रिपोर्ट में बैराजों से 3.66 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने और घाघरा-शारदा के जलस्तर बढ़ने की जानकारी दी गई थी। वहीं 30 अगस्त की एक अन्य रिपोर्ट में 2.80 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद जिले के 300 से अधिक गांवों में बाढ़ जैसी स्थिति बनने की बात कही गई थी।
सरायन नदी पहले ही खतरे के निशान से ऊपर
केशव ग्रीन सिटी में पानी पहुंचने की घटना को सरायन नदी के मौजूदा जलस्तर से अलग करके नहीं देखा जा सकता। 7 सितंबर 2026 को उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार सरायन नदी का जलस्तर बढ़कर 132.50 मीटर तक पहुंच गया था, जबकि खतरे का निशान 131 मीटर बताया गया। यानी नदी का पानी खतरे के निशान से 1.50 मीटर ऊपर बह रहा था। इससे पहले 2 सितंबर को भी सरायन का जलस्तर 132.25 मीटर दर्ज किया गया था और तब यह खतरे के निशान से 1.25 मीटर ऊपर था।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि सितंबर की शुरुआत से ही सरायन नदी का जलस्तर सामान्य स्थिति में नहीं था। शहर के बीच से होकर गुजरने वाली नदी का बढ़ा हुआ पानी पहले भी निचले मोहल्लों तक पहुंच चुका था। 2 सितंबर की रिपोर्ट में शहर के तरीनपुर मोहल्ले में 25 से अधिक मकानों के भीतर पानी पहुंचने की जानकारी सामने आई थी। ऐसे में केशव ग्रीन सिटी में बड़े पैमाने पर जलभराव होना नदी के बढ़ते दबाव और निचले इलाकों की संवेदनशीलता को दर्शाता है।
केशव ग्रीन सिटी में घरों तक पहुंचा पानी
केशव ग्रीन सिटी के निवासियों के लिए गुरुवार का दिन अचानक आई परेशानी का दिन बन गया। पिरई नदी के किनारे बसे इस रिहायशी क्षेत्र में पानी पहुंचने के बाद कॉलोनी के करीब 200 घर प्रभावित हुए। सड़क और गलियों में पानी भरने के कारण बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए घर से बाहर निकलना विशेष रूप से कठिन हो गया है। सामान्य दिनों में जिन रास्तों से लोग बाजार, काम, स्कूल या अन्य जरूरी स्थानों तक आसानी से पहुंचते हैं, वही रास्ते पानी से घिर गए हैं।
जलभराव का सबसे बड़ा असर उन परिवारों पर पड़ता है जिनके घर निचले स्तर पर हैं। पानी लंबे समय तक जमा रहने की स्थिति में घरेलू सामान खराब होने, दीवारों में सीलन आने, विद्युत उपकरणों को नुकसान पहुंचने और संक्रमण का खतरा बढ़ने की आशंका रहती है। यदि पानी और बढ़ता है तो प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की आवश्यकता भी पैदा हो सकती है।
दो नदियों के बढ़ते जलस्तर से बढ़ी चिंता
सीतापुर में मौजूदा बाढ़ संकट को केवल एक स्थान तक सीमित समस्या मानना जल्दबाजी होगी। पिरई और सरायन नदी के जलस्तर में वृद्धि के साथ आसपास के निचले क्षेत्रों पर दबाव बढ़ रहा है। नदी का पानी जब अपने सामान्य प्रवाह क्षेत्र से बाहर निकलता है तो सबसे पहले निचले इलाकों, खेतों, संपर्क मार्गों और नदी किनारे बनी बस्तियों को प्रभावित करता है। शहरी विस्तार के कारण नदी के आसपास विकसित हो चुकी रिहायशी कॉलोनियां ऐसी परिस्थितियों में अधिक संवेदनशील हो जाती हैं।
केशव ग्रीन सिटी का मौजूदा जलभराव इसी चुनौती की ओर संकेत करता है। नदी किनारे बसे रिहायशी क्षेत्रों में जल निकासी की क्षमता और नदी के बढ़े हुए जलस्तर के बीच संतुलन बिगड़ते ही पानी तेजी से आबादी में प्रवेश कर सकता है। इस स्थिति में केवल पंपिंग या अस्थायी जल निकासी पर्याप्त नहीं होती, बल्कि नदी के जलस्तर, बैराज डिस्चार्ज और निचले क्षेत्रों की निगरानी को एक साथ देखना पड़ता है।
पहले भी सामने आ चुका है सीतापुर का बाढ़ संकट
इस वर्ष सीतापुर में बाढ़ और नदी के बढ़ते जलस्तर की स्थिति कई चरणों में सामने आई है। जुलाई में भी शारदा और सरयू के जलस्तर में वृद्धि दर्ज की गई थी। 28 जुलाई की रिपोर्ट के अनुसार सरयू का जलस्तर 118.20 मीटर तक पहुंच गया था और खतरे के निशान से वह 80 सेंटीमीटर नीचे था। उस समय करीब 115 बीघा फसल जलमग्न होने की जानकारी दी गई थी।
अगस्त के दौरान भी बैराजों से छोड़े गए पानी के कारण घाघरा और शारदा नदी के किनारे बसे इलाकों में कटान और बाढ़ का खतरा बढ़ा। सितंबर की शुरुआत तक स्थिति कई क्षेत्रों में गंभीर बनी रही। 7 सितंबर की रिपोर्ट में जिले के गांजर क्षेत्र में 60 से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी पहुंचने की जानकारी दी गई थी। उसी रिपोर्ट में शारदा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 11 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज होने की बात कही गई।
अब राहत और निगरानी पर टिकी नजर
केशव ग्रीन सिटी में करीब 200 घरों के प्रभावित होने के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल राहत और बचाव व्यवस्था का है। स्थानीय लोगों को सुरक्षित आवागमन उपलब्ध कराना, जलभराव वाले हिस्सों में विद्युत सुरक्षा सुनिश्चित करना, जरूरतमंद परिवारों तक पेयजल और खाद्य सामग्री पहुंचाना तथा गंभीर स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाना प्रशासन के सामने तत्काल चुनौती है।
पानी के बढ़ते स्तर को देखते हुए लोगों के लिए भी सावधानी जरूरी है। बाढ़ के पानी में पैदल या दोपहिया वाहन से निकलने से बचना चाहिए, विशेषकर वहां जहां सड़क की वास्तविक गहराई दिखाई नहीं देती। बिजली के खंभों, खुले तारों और पानी में डूबे विद्युत उपकरणों से दूरी रखना जरूरी है। बच्चों को जलभराव वाले स्थानों के पास नहीं जाने देना चाहिए।
केशव ग्रीन सिटी की स्थिति यह सवाल भी सामने लाती है कि शहर के नदी किनारे बसे रिहायशी इलाकों में बाढ़ के पानी की निकासी और आपदा प्रबंधन की दीर्घकालिक व्यवस्था कितनी मजबूत है। हर वर्ष मानसून में नदियों का जलस्तर बढ़ता है, लेकिन आबादी और निर्माण क्षेत्र बढ़ने के साथ बाढ़ का जोखिम भी बढ़ता जा रहा है। ऐसे में नदी के जलस्तर की निगरानी के साथ जल निकासी मार्गों, नालों और निचले इलाकों की पूर्व तैयारी पर भी ध्यान देना जरूरी है।
सीतापुर बाढ़: आगे क्या?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि बैराजों से छोड़े गए पानी का असर अगले कुछ घंटों और दिनों में किस दिशा में जाता है। यदि नदी का जलस्तर लगातार बढ़ता रहा तो केशव ग्रीन सिटी समेत आसपास के दूसरे निचले क्षेत्रों में भी पानी का दबाव बढ़ सकता है। इसके विपरीत यदि जलस्तर स्थिर होता है और निकासी तेज होती है तो प्रभावित परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ेगी। इसलिए प्रशासनिक निगरानी और स्थानीय स्तर पर जलस्तर की लगातार जानकारी इस समय सबसे महत्वपूर्ण है।
सीतापुर में केशव ग्रीन सिटी का जलभराव केवल एक कॉलोनी की समस्या नहीं, बल्कि बदलते जलस्तर और तेजी से बढ़ती शहरी आबादी के बीच बाढ़ प्रबंधन की चुनौती का संकेत है। करीब डेढ़ लाख क्यूसेक पानी के प्रभाव और पिरई-सरायन नदी के बढ़ते जलस्तर ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि नदी किनारे बसे क्षेत्रों में पहले से तैयार आपदा प्रबंधन व्यवस्था कितनी जरूरी है। करीब 200 घरों के प्रभावित होने के बाद अब स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन की राहत, जल निकासी और सुरक्षा व्यवस्था पर टिकी है।

























