सावन में शवत्व से शिवत्व की ओर बढ़ने का संदेश, भऊआपार में सफल रहा निशुल्क योग शिविर

गोरखपुर के भऊआपार स्थित प्राचीन शिव मंदिर परिसर में आयोजित निशुल्क योग शिविर में योग साधना करते साधक और श्रद्धालु, साथ में रिपोर्टर इरफान अली लारी की तस्वीर

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इरफान अली लारी की रिपोर्ट

गोरखपुर।  सावन मास की आध्यात्मिक ऊर्जा और भगवान शिव की भक्ति से सराबोर वातावरण के बीच गोरखपुर के भऊआपार स्थित प्राचीन शिव मंदिर परिसर में एक दिवसीय निशुल्क योग शिविर का आयोजन किया गया। ओम फिटनेस योग संस्थान के तत्वावधान में आयोजित इस विशेष योग शिविर में बड़ी संख्या में साधकों और श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में योगाभ्यास, ध्यान-साधना और भगवान शिव के पूजन-अर्चन के माध्यम से लोगों को स्वस्थ शरीर, शांत मन और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया गया।

सावन के पवित्र महीने में आयोजित इस योग शिविर का उद्देश्य केवल लोगों को योगाभ्यास से जोड़ना नहीं था, बल्कि उन्हें शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक शांति, आत्मचेतना और आध्यात्मिक अनुशासन की ओर प्रेरित करना भी रहा। शिव मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं और साधकों की मौजूदगी से वातावरण भक्तिमय और ऊर्जावान बना रहा।

योगाचार्य धर्मेंद्र प्रजापति ने दिया शवत्व से शिवत्व की ओर बढ़ने का संदेश

शिविर का मार्गदर्शन कर रहे योगाचार्य धर्मेंद्र प्रजापति, जिन्हें साधक ‘योगी धर्मेश्वर’ के नाम से जानते हैं, ने सावन के आध्यात्मिक महत्व को योग और ध्यान से जोड़ते हुए कहा कि यह समय मनुष्य को अपने भीतर सकारात्मक परिवर्तन लाने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने कहा कि “सावन में शवत्व से शिवत्व की ओर बढ़ें।” उनके अनुसार शवत्व का आशय जड़ता, निष्क्रियता और नकारात्मकता से है, जबकि शिवत्व जागरूकता, सकारात्मकता, आत्मचेतना और संतुलित जीवन का प्रतीक है। योग, ध्यान और आयुर्वेद को जीवन का हिस्सा बनाकर व्यक्ति अपने भीतर छिपी सकारात्मक ऊर्जा को जागृत कर सकता है।

योगी धर्मेश्वर ने साधकों को समझाया कि योग को केवल शारीरिक व्यायाम समझना उसकी व्यापकता को सीमित करना है। योग शरीर को स्वस्थ रखने के साथ-साथ मन को स्थिर करने, विचारों को सकारात्मक बनाने और व्यक्ति को आत्मअनुशासन की ओर ले जाने वाली जीवन पद्धति है। नियमित योगाभ्यास से व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में संतुलन स्थापित कर सकता है।

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आधुनिक चुनौतियों के बीच योग और ध्यान की बढ़ी उपयोगिता

योगाचार्य धर्मेंद्र प्रजापति ने कहा कि वर्तमान समय में पूरी दुनिया विभिन्न प्रकार की चुनौतियों से गुजर रही है। बदलती जीवनशैली, मानसिक दबाव, भागदौड़ और अनियमित दिनचर्या के कारण लोगों के जीवन में तनाव और असंतुलन बढ़ रहा है। ऐसे दौर में योग और ध्यान की उपयोगिता और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

उन्होंने कहा कि नियमित योग साधना व्यक्ति को अपने शरीर और मन के प्रति जागरूक बनाती है। ध्यान मन को एकाग्र करने में सहायता करता है, जबकि अनुशासित जीवनशैली व्यक्ति के भीतर सकारात्मक सोच विकसित कर सकती है। इसलिए योग को किसी विशेष वर्ग या आयु तक सीमित रखने के बजाय इसे जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता है।

उन्होंने साधकों से आह्वान किया कि वे स्वयं योग करें और अपने आसपास के लोगों को भी योग एवं स्वस्थ जीवनशैली के लिए प्रेरित करें। उनके अनुसार स्वस्थ समाज का निर्माण स्वस्थ और जागरूक व्यक्तियों से ही संभव है।

15 से 25 किलोमीटर दूर से भी पहुंचे साधक

इस निशुल्क योग शिविर में 50 से अधिक प्रतिभागियों ने अपनी सक्रिय सहभागिता दर्ज कराई। शिविर की विशेष बात यह रही कि कई साधक ब्रह्ममुहूर्त में अपने घरों से निकलकर लगभग 15 से 25 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए भऊआपार स्थित शिव मंदिर परिसर पहुंचे।

दूर-दराज से पहुंचे साधकों के उत्साह ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया। साधकों ने गुरुजी के मार्गदर्शन में योग की विभिन्न क्रियाओं और अभ्यासों में सहभागिता की। इसके बाद ध्यान-साधना के माध्यम से मन को एकाग्र करने का प्रयास किया गया।

सुबह के शांत वातावरण, प्राचीन शिव मंदिर की आध्यात्मिक पृष्ठभूमि और योग साधना के सामूहिक वातावरण ने शिविर को विशेष स्वरूप प्रदान किया। प्रतिभागियों ने योगाभ्यास के दौरान अनुशासन और एकाग्रता के साथ विभिन्न अभ्यास किए तथा योग को अपनी दिनचर्या का नियमित हिस्सा बनाने की इच्छा व्यक्त की।

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योग के बाद शिव आराधना ने बढ़ाया आध्यात्मिक उत्साह

योग और ध्यान सत्र के बाद श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जाप किया और विधिवत पूजन-अर्चन कर ईश्वर की कृपा की कामना की। सावन मास में शिव आराधना और योग साधना के इस समन्वय ने कार्यक्रम को आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बना दिया।

साधकों ने भगवान शिव से सभी के स्वास्थ्य, सुख, शांति और कल्याण की मंगलकामना की। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने महसूस किया कि योग और आध्यात्मिक साधना का संयोजन व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

कार्यक्रम में यह संदेश भी दिया गया कि धार्मिक आस्था और स्वस्थ जीवनशैली को सकारात्मक रूप से जोड़ा जा सकता है। योग के माध्यम से शरीर और मन को अनुशासित करते हुए आध्यात्मिक चेतना की ओर बढ़ना व्यक्ति के जीवन में व्यापक परिवर्तन ला सकता है।

नियमित योग को जीवन का हिस्सा बनाने का लिया संकल्प

शिविर में शामिल साधकों ने केवल एक दिन योग करने तक सीमित न रहने का संकल्प लिया। प्रतिभागियों ने कहा कि वे नियमित रूप से योग और ध्यान का अभ्यास करेंगे तथा अपने परिवार के सदस्यों और समाज के अन्य लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करेंगे।

साधकों का मानना रहा कि यदि योग को नियमित दिनचर्या में शामिल किया जाए तो व्यक्ति अपनी जीवनशैली को अधिक अनुशासित और सकारात्मक बना सकता है। शिविर के दौरान स्वास्थ्य, योग, ध्यान और सकारात्मक सोच को लेकर लोगों में विशेष उत्साह दिखाई दिया।

आयोजकों की ओर से भी लोगों को प्रेरित किया गया कि वे योग को किसी विशेष अवसर तक सीमित न रखें। योग का वास्तविक लाभ तभी प्राप्त किया जा सकता है, जब इसे नियमित अभ्यास और संतुलित जीवनशैली के रूप में अपनाया जाए।

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बड़ी संख्या में साधक और श्रद्धालु रहे मौजूद

एक दिवसीय योग शिविर में मुकेश साहनी, डॉ. रामाज्ञा सिंह, संतोष श्रीवास्तव, संजय गौड़, रंजन गौड़, शीला पाल, संगीता, प्रतिमा, माधुरी, संतलाल, प्रीति, रेखा, सुभावती और बीनू सहित बड़ी संख्या में साधक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान सभी प्रतिभागियों ने उत्साह के साथ योगाभ्यास और ध्यान-साधना में हिस्सा लिया। आयोजन स्थल पर श्रद्धालुओं की मौजूदगी और सामूहिक शिव आराधना से भक्तिमय वातावरण बना रहा।

शिव पूजन और मंगलकामना के साथ हुआ समापन

कार्यक्रम के अंत में भगवान शिव का पूजन-अर्चन और सामूहिक जाप किया गया। इसके बाद सभी साधकों ने समाज में स्वास्थ्य, शांति, सद्भाव और सकारात्मकता के प्रसार की मंगलकामना की। निशुल्क योग शिविर का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि योग को व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ परिवार और समाज के स्वास्थ्य का आधार बनाने का प्रयास किया जाएगा।

भऊआपार के प्राचीन शिव मंदिर परिसर में आयोजित यह सावन विशेष योग शिविर श्रद्धा, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक चेतना के समन्वय का उदाहरण बना। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि व्यक्ति को अनुशासन, आत्मचेतना और सकारात्मक विचारों से जोड़ने वाली व्यापक जीवन पद्धति भी है।

सावन जैसे पवित्र अवसर पर आयोजित इस पहल के माध्यम से ओम फिटनेस योग संस्थान ने लोगों को नियमित योग, ध्यान और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया। वहीं, शिव मंदिर परिसर में साधकों की सामूहिक सहभागिता ने आयोजन को यादगार बना दिया। प्रतिभागियों के उत्साह से स्पष्ट हुआ कि आज के समय में लोग शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतुलन की आवश्यकता को भी गंभीरता से महसूस कर रहे हैं।

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Author: यायावर

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