राहत देने के साथ किसको क्यों फटकार लगाई सीएम योगी ने?

चित्रकूट बाढ़ पीड़ितों को राहत देते सीएम योगी आदित्यनाथ और रिपोर्टर संजय सिंह राणा की तस्वीर

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संजय सिंह राणा की रिपोर्ट

चित्रकूट। बाढ़ की विभीषिका झेल रहे चित्रकूट के लोगों को राहत देने पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को एक तरफ प्रभावित परिवारों को हरसंभव मदद का भरोसा दिया, तो दूसरी तरफ मंच पर व्यवस्था को लेकर नेताओं को सख्त संदेश भी दिया। राहत चेक और सामग्री वितरण के दौरान कुछ नेता मुख्यमंत्री के साथ तस्वीर खिंचवाने की होड़ में आगे बढ़ने लगे। इससे मुख्यमंत्री नाराज हो गए। उन्होंने हाथ के इशारे से नेताओं को पीछे हटने के लिए कहा, ताकि बाढ़ पीड़ितों को राहत लेने में किसी तरह की परेशानी न हो।

मुख्यमंत्री का यह रुख उस समय सामने आया, जब वह आपदा से प्रभावित परिवारों के बीच राहत पहुंचाने के साथ उनकी समस्याएं भी सुन रहे थे। उन्होंने साफ किया कि ऐसे समय में प्राथमिकता बाढ़ पीड़ित और जरूरतमंद लोग हैं, न कि मंच पर फोटो खिंचवाना।

बाढ़ पीड़ितों को मुख्यमंत्री ने दिया भरोसा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि चित्रकूट के लोगों को आपदा की इस घड़ी में अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। सरकार प्रभावित परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है और नुकसान के अनुरूप सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

उन्होंने विशेष रूप से उन परिवारों के लिए बड़ी घोषणा की, जिनके मकान बाढ़ में पूरी तरह बह गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे पात्र परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना या मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान उपलब्ध कराया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि जिन जरूरतमंद परिवारों के पास आवास बनाने के लिए जमीन नहीं है, उन्हें आवासीय पट्टा देने की कार्रवाई की जाएगी। सरकार का उद्देश्य बाढ़ के बाद केवल तत्काल राहत देना नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों को दोबारा बसाना भी है।

हवाई सर्वे के बाद रैन बसेरों में पहुंचे CM योगी

चित्रकूट पहुंचने से पहले मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वे किया। उन्होंने मंदाकिनी नदी के बढ़े जलस्तर और बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का जायजा लिया।

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इसके बाद मुख्यमंत्री रैन बसेरों और राहत शिविरों में पहुंचे, जहां बाढ़ प्रभावित परिवारों ने शरण ले रखी है। उन्होंने पीड़ितों से सीधे बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी भी ली।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। जरूरतमंद परिवारों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करने को भी कहा गया।

800 परिवारों को बांटी गई 50 किलो की राहत किट

मुख्यमंत्री ने बाढ़ से प्रभावित करीब 800 परिवारों को 50-50 किलो की राहत किट वितरित की। इन किटों में रोजमर्रा की जरूरत की खाद्य सामग्री और उपयोगी सामान शामिल था।

राहत किट में दाल, चावल, आटा, आलू, बाल्टी और छाता दिया गया। मुख्यमंत्री ने खुद प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचकर राहत सामग्री वितरित की और लोगों का हाल जाना।

इस दौरान बच्चों से भी मुख्यमंत्री ने बातचीत की। उन्होंने बच्चों को चॉकलेट दी और उनके साथ आत्मीयता से बात की। इससे राहत शिविर में मौजूद लोगों के बीच मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर अलग माहौल दिखाई दिया।

मंच पर फोटो खिंचवाने की होड़ से नाराज हुए मुख्यमंत्री

राहत सामग्री और सहायता वितरण के दौरान मंच पर मौजूद कुछ नेता मुख्यमंत्री के साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए आगे आने लगे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्थिति को देखा और नेताओं को पीछे हटने का संकेत किया।

मुख्यमंत्री का इशारा साफ था कि राहत लेने आए लोगों को आगे आने में किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने नेताओं को पीछे हटाकर प्रभावित परिवारों के लिए रास्ता बनाने को कहा।

मुख्यमंत्री का यह संदेश भी स्पष्ट था कि आपदा की स्थिति में वीआईपी संस्कृति या फोटो खिंचवाने से अधिक महत्वपूर्ण पीड़ितों तक राहत पहुंचाना है।

खतरनाक स्तर तक पहुंचा था मंदाकिनी का जलस्तर

चित्रकूट में 29 अगस्त को मंदाकिनी नदी में आई बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी। नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण कई इलाकों में पानी भर गया। कई मकानों की पहली मंजिल तक पानी पहुंच गया था।

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बाढ़ के कारण करीब 100 कच्चे मकान पूरी तरह जमींदोज हो गए, जबकि लगभग 500 मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा। इस आपदा से चित्रकूट के 36 गांवों की करीब 14 हजार आबादी प्रभावित हुई।

मंदाकिनी नदी का जलस्तर करीब 23 साल के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था। पानी का बहाव इतना तेज था कि कई सड़कें और संपर्क मार्ग भी क्षतिग्रस्त हो गए।

रामघाट-हनुमान धारा पुल का बड़ा हिस्सा बहा

बाढ़ का असर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा से जुड़े इलाकों में भी पड़ा। रामघाट से हनुमान धारा को जोड़ने वाले करीब 300 मीटर लंबे पुल का बड़ा हिस्सा मंदाकिनी के तेज बहाव की चपेट में आकर बह गया।

इसके अलावा कई स्थानों पर सड़कें क्षतिग्रस्त हुईं। बाढ़ के पानी ने धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व से जुड़े स्थलों को भी नुकसान पहुंचाया। तुलसीदास की प्रतिमा के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी भी सामने आई।

बाढ़ के बाद अब प्रशासन के सामने क्षतिग्रस्त पुल, सड़कों और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं को दोबारा दुरुस्त करने की चुनौती है।

‘कामतानाथ के आशीर्वाद से नहीं गई किसी की जान’

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इस बार मंदाकिनी का जलस्तर बेहद खतरनाक स्तर तक पहुंच गया था। उन्होंने बाढ़ की भयावहता का जिक्र करते हुए कहा कि पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश में नदी पर बना पुल भी बाढ़ के तेज बहाव में बह गया।

इसके बावजूद चित्रकूट में किसी की जान नहीं गई। मुख्यमंत्री ने इसे कामतानाथ का आशीर्वाद बताया। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन ने समय रहते राहत एवं बचाव कार्य शुरू किए, जिससे लोगों को सुरक्षित निकालने और प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने में मदद मिली।

2017 से पहले के मुकाबले राहत व्यवस्था बेहतर होने का दावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा में किसी भी प्रभावित व्यक्ति को सहायता से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले बाढ़ प्रभावित लोगों को अपेक्षाकृत कम राहत मिलती थी, जबकि अब सरकार ने आपदा के दौरान राहत व्यवस्था का विस्तार किया है।

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उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल तत्काल खाद्यान्न या आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना नहीं है। बाढ़ में जिन लोगों के घर उजड़ गए हैं, उनके लिए पुनर्वास और दोबारा बसाने की व्यवस्था भी की जाएगी।

हजारों लोगों के सामने अभी भी पुनर्वास की चुनौती

चित्रकूट में बाढ़ का पानी कम होने के बाद भी प्रभावित परिवारों की मुश्किलें खत्म नहीं हुई हैं। जिन लोगों के घर पूरी तरह बह गए या ढह गए हैं, उनके सामने स्थायी आवास की समस्या है। वहीं जिन मकानों को आंशिक नुकसान हुआ है, उन्हें मरम्मत की जरूरत है।

कई परिवारों की घरेलू सामग्री और रोजमर्रा की जरूरत का सामान भी बाढ़ में नष्ट हुआ है। ऐसे में राहत किट तत्काल जरूरत पूरी कर सकती है, लेकिन प्रभावित परिवारों को सामान्य जीवन में लौटने के लिए दीर्घकालिक सहायता की आवश्यकता होगी।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को इसी दिशा में काम करने के निर्देश दिए हैं। आवास, जमीन, राहत राशि और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की मरम्मत अब प्रशासन के सामने प्रमुख चुनौती है।

चित्रकूट बाढ़: राहत के साथ पुनर्वास पर जोर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चित्रकूट दौरे में एक तरफ बाढ़ पीड़ितों को राहत और आवास का भरोसा मिला, तो दूसरी तरफ मंच पर नेताओं को दिया गया उनका संदेश भी चर्चा में रहा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि आपदा के समय सरकारी तंत्र और जनप्रतिनिधियों की पहली जिम्मेदारी पीड़ितों तक सहायता पहुंचाना है।

मंदाकिनी की इस बाढ़ ने चित्रकूट के 36 गांवों में हजारों लोगों को प्रभावित किया है। अब सरकार और प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती राहत वितरण के बाद प्रभावित परिवारों का सुरक्षित और स्थायी पुनर्वास सुनिश्चित करना है।

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Author: यायावर

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