रिपोर्ट: शिव कुमार
सरकारी परिवहन व्यवस्था पर एक बार फिर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। पंजाब रोडवेज और पी.आर.टी.सी. (पंजाब रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन) के ठेका कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर रविवार रात 12 बजे से तीन दिवसीय हड़ताल शुरू कर दी है। इस हड़ताल के कारण 3, 4 और 5 अगस्त तक सरकारी बस सेवाएं व्यापक रूप से प्रभावित रहने की संभावना है। कर्मचारी संगठनों ने साफ कर दिया है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
हड़ताल का सीधा असर रोजाना सरकारी बसों से सफर करने वाले हजारों यात्रियों पर पड़ेगा। कई मार्गों पर बसों का संचालन पूरी तरह ठप रहने की आशंका जताई जा रही है, जिससे लोगों को निजी परिवहन का सहारा लेना पड़ सकता है।
लंबित मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई का ऐलान
पबनस/पी.आर.टी.सी. ठेका कर्मचारी यूनियन के प्रदेश महासचिव शमशेर सिंह ढिल्लों ने कहा कि कर्मचारियों की वर्षों पुरानी मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सोमवार को सरकार और विभागीय अधिकारियों के साथ प्रस्तावित बैठक में यूनियन अपने सभी लंबित मुद्दों को मजबूती से रखेगी।
उन्होंने कहा कि यदि बैठक में कर्मचारियों की समस्याओं का संतोषजनक समाधान नहीं निकला तो यूनियन आंदोलन को और व्यापक रूप देगी। कर्मचारियों का कहना है कि अब केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा, बल्कि ठोस निर्णय की आवश्यकता है।
तीन दिन तक बस सेवाओं पर रहेगा बड़ा असर
हड़ताल के चलते 3, 4 और 5 अगस्त को सरकारी बसों के संचालन पर व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है। विभाग ने स्थायी कर्मचारियों के माध्यम से कुछ बसें चलाने की तैयारी की है, लेकिन कर्मचारियों का कहना है कि अधिकांश डिपो में नियमित कर्मचारियों की संख्या बेहद कम है।
ऐसी स्थिति में पूरे प्रदेश में सीमित संख्या में ही बसें सड़क पर उतर पाएंगी। यूनियन नेताओं का दावा है कि यदि केवल नियमित कर्मचारियों के भरोसे संचालन किया गया तो पूरे पंजाब में करीब 100 बसों का संचालन भी मुश्किल होगा।
यात्रियों को उठानी पड़ सकती है भारी परेशानी
सरकारी बसों के सीमित संचालन का सबसे अधिक असर आम यात्रियों पर दिखाई देगा। रोजाना नौकरी, व्यापार, शिक्षा और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए सरकारी परिवहन पर निर्भर रहने वाले लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
हड़ताल शुरू होने के बाद ही कई स्थानों से बाहर जाने वाली बस सेवाएं प्रभावित हुईं, जिससे अनेक यात्रियों को बिना यात्रा किए वापस लौटना पड़ा। यदि हड़ताल जारी रहती है तो अगले तीन दिनों तक परिवहन व्यवस्था पर इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।
बस अड्डों और डिपो में होंगे विरोध प्रदर्शन
यूनियन नेताओं ने बताया कि हड़ताल के दौरान विभिन्न बस अड्डों और डिपो पर धरना-प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। कर्मचारी सरकार के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराएंगे और अपनी मांगों को लेकर जनसमर्थन जुटाने का प्रयास करेंगे।
यूनियन का कहना है कि कर्मचारियों के हितों की लगातार अनदेखी की जा रही है, जिसके कारण आंदोलन का रास्ता अपनाना उनकी मजबूरी बन गया है।
यात्रियों को उठानी पड़ रही भारी परेशानी
हड़ताल का असर सोमवार सुबह से ही साफ दिखाई देने लगा। सरकारी बसों की संख्या बेहद कम होने के कारण विभिन्न रूटों पर यात्रा करने पहुंचे लोगों को बस स्टैंड पर घंटों इंतजार करना पड़ा। सबसे अधिक परेशानी उन यात्रियों को हुई जो रोजाना नौकरी, पढ़ाई, व्यापार और अन्य जरूरी कार्यों के लिए सरकारी बस सेवाओं पर निर्भर रहते हैं।
लुधियाना में सोमवार से पंजाब सड़क परिवहन निगम (पी.आर.टी.सी.) और पंजाब बस सेवा के संविदा कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल शुरू होते ही सरकारी बसों का संचालन प्रभावित हो गया। तीन से पांच अगस्त तक प्रस्तावित इस हड़ताल के पहले दिन ही बस स्टैंड पर यात्रियों की भारी भीड़ देखने को मिली। पर्याप्त सरकारी बसें उपलब्ध न होने के कारण कई यात्रियों की यात्रा प्रभावित हुई और उन्हें लंबे समय तक बसों का इंतजार करना पड़ा।
गर्म मौसम के बीच बस स्टैंड पर खड़े यात्रियों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ा। कई यात्रियों ने समय पर सरकारी बस नहीं मिलने के कारण निजी बसों और अन्य वैकल्पिक साधनों का सहारा लिया, जिससे उनकी यात्रा का खर्च भी बढ़ गया। यदि हड़ताल जारी रहती है तो आने वाले दिनों में परिवहन व्यवस्था पर इसका असर और अधिक गहरा सकता है।
कर्मचारियों को नियमित करने की मांग फिर उठी
ठेका कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में सबसे महत्वपूर्ण मांग उन्हें नियमित (पक्का) किए जाने की है। यूनियन का आरोप है कि लंबे समय से सेवाएं देने के बावजूद ठेका कर्मचारियों को स्थायी नियुक्ति नहीं दी जा रही है।
कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों से विभाग का काम संभालने वाले कर्मचारियों को नौकरी की सुरक्षा और अन्य सुविधाओं से वंचित रखा गया है। उनका मानना है कि सरकार को इस विषय पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए।
आउटसोर्सिंग व्यवस्था पर भी जताई नाराजगी
यूनियन ने आउटसोर्सिंग प्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि ठेकेदारों के माध्यम से सेवाएं लेने के बजाय विभाग सीधे कर्मचारियों को नियुक्त करे।
यूनियन के अनुसार विभाग ठेकेदारों को बड़ी राशि का भुगतान करता है, साथ ही विभिन्न प्रकार के करों का भी अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ता है। यदि कर्मचारियों से सीधे सेवाएं ली जाएं तो विभाग करोड़ों रुपये की बचत कर सकता है और कर्मचारियों को भी बेहतर सुविधाएं मिल सकती हैं।
निजीकरण के खिलाफ भी जताया विरोध
कर्मचारी नेताओं ने किलोमीटर स्कीम के तहत निजी बसों को शामिल किए जाने का भी विरोध किया है। उनका कहना है कि इस व्यवस्था से सरकारी परिवहन प्रणाली कमजोर होगी और निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा।
यूनियन ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक परिवहन सेवाओं का निजीकरण किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा और इस नीति के खिलाफ आंदोलन जारी रहेगा।
बैठक पर टिकी सभी की नजरें
सरकार और यूनियन के बीच होने वाली बैठक को लेकर कर्मचारियों और यात्रियों दोनों की निगाहें टिकी हुई हैं। यदि बैठक में सहमति बन जाती है तो बस सेवाएं जल्द सामान्य हो सकती हैं। वहीं, बातचीत विफल रहने की स्थिति में आंदोलन के और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि यात्रा पर निकलने से पहले संबंधित बस अड्डों से बसों की उपलब्धता की जानकारी अवश्य प्राप्त कर लें, ताकि उन्हें अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

























