चित्रकूट

सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय में अव्यवस्थाओं का आरोप, वाहन स्वामी परेशान

दलालों की सक्रियता पर उठे सवाल, कई महीनों से नियमित अधिकारी की तैनाती नहीं, सीमित व्यवस्था में संचालित हो रहा कार्यालय

संजय सिंह राणा की रिपोर्ट

चित्रकूट. जनपद के सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय वाहन स्वामियों और परिवहन से जुड़े लोगों का आरोप है कि लंबे समय से कार्यालय में नियमित सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी की नियुक्ति नहीं होने के कारण व्यवस्थाएं पूरी तरह प्रभावित हो गई हैं। इसका सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है, जिन्हें अपने जरूरी कार्यों के लिए बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

वाहन स्वामियों का कहना है कि कार्यालय में स्पष्ट प्रशासनिक नेतृत्व के अभाव का लाभ कुछ बाहरी तत्व और कथित दलाल उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि कार्यालय परिसर में दलालों की सक्रियता लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे पारदर्शी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

आरआई के भरोसे चल रही व्यवस्था, सप्ताह में सीमित दिनों की मौजूदगी का आरोप

जानकारी के अनुसार, नियमित एआरटीओ की नियुक्ति न होने के कारण कार्यालय का संचालन परिवहन विभाग के आरआई (रीजनल इंस्पेक्टर) के माध्यम से किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का दावा है कि आरआई सप्ताह में केवल कुछ निर्धारित दिनों पर ही कार्यालय पहुंचते हैं, जिसके कारण कई प्रशासनिक और तकनीकी कार्य समय पर पूरे नहीं हो पाते।

इस स्थिति से वाहन पंजीकरण, परमिट, फिटनेस, नामांतरण, एनओसी और अन्य आवश्यक सेवाओं से जुड़े कार्य प्रभावित हो रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि अधिकारी की अनुपस्थिति में लंबित फाइलों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

दलालों की सक्रियता बढ़ने का आरोप, कार्यालय परिसर में खुलेआम लेनदेन की चर्चा

वाहन स्वामियों और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि कार्यालय में कुछ कथित दलाल सक्रिय रूप से लोगों से संपर्क कर विभिन्न कार्य कराने का दावा करते हैं। आरोप यह भी है कि ये लोग कार्यालय आने वाले नागरिकों को सीधे अपने माध्यम से कार्य कराने के लिए प्रेरित करते हैं और इसके बदले अतिरिक्त धनराशि की मांग की जाती है।

कुछ लोगों का यह भी कहना है कि कार्यालय परिसर में मोबाइल फोन से दस्तावेजों और वाहनों की फोटो लेकर प्रक्रिया पूरी करने तथा बाद में लेनदेन करने जैसी गतिविधियां भी देखने को मिल रही हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार सामने आ रही शिकायतों ने व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

दो दिनों तक खड़े रहे वाहन, नहीं हो सके आवश्यक कार्य

बताया जा रहा है कि पिछले दो दिनों के दौरान कई वाहन विभिन्न प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाओं के लिए कार्यालय परिसर में खड़े रहे, लेकिन संबंधित कार्य पूरे नहीं हो सके। इससे वाहन मालिकों को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा।

व्यापारिक वाहनों से जुड़े संचालकों का कहना है कि समय पर फिटनेस या अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी न होने से उनके व्यवसाय पर भी असर पड़ रहा है। उनका कहना है कि यदि कार्यालय में नियमित अधिकारी उपलब्ध रहें तो अधिकांश समस्याओं का समाधान समय पर हो सकता है।

कंप्यूटर शाखा के आसपास भी दलालों की मौजूदगी पर सवाल

स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि कार्यालय की कंप्यूटर शाखा के आसपास भी दलालों की सक्रियता लगातार बनी रहती है। उनका कहना है कि कई बार आम नागरिकों से पहले दलाल संबंधित कर्मचारियों तक पहुंच जाते हैं, जिससे पारदर्शिता प्रभावित होती दिखाई देती है।

लोगों का कहना है कि यदि कार्यालय परिसर में अनधिकृत व्यक्तियों की आवाजाही पर प्रभावी नियंत्रण रखा जाए और केवल संबंधित आवेदकों को ही प्रवेश मिले तो ऐसी शिकायतों में काफी कमी आ सकती है।

वाहन स्वामियों ने की नियमित अधिकारी की तैनाती और सख्त कार्रवाई की मांग

वाहन स्वामियों और परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों ने मांग की है कि लंबे समय से रिक्त पड़े सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी के पद पर शीघ्र नियमित अधिकारी की नियुक्ति की जाए। उनका कहना है कि अधिकारी की नियमित उपस्थिति से कार्यालय की कार्यप्रणाली में सुधार होगा और लोगों को समय पर सेवाएं मिल सकेंगी।

इसके साथ ही उन्होंने कार्यालय परिसर में कथित दलालों की गतिविधियों पर रोक लगाने, सीसीटीवी निगरानी को प्रभावी बनाने तथा शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग की है।

प्रशासनिक जांच की उठी मांग

लगातार सामने आ रही शिकायतों के बीच अब यह मांग भी तेज हो गई है कि जिला प्रशासन और परिवहन विभाग पूरे मामले का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराएं। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

स्थानीय नागरिकों का मानना है कि सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। ऐसे में यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो दोषियों पर कठोर कार्रवाई होना आवश्यक है, ताकि आम लोगों का सरकारी व्यवस्था पर विश्वास बना रहे।

अब सबकी निगाहें प्रशासन पर

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जिला प्रशासन और परिवहन विभाग इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए पूरे मामले की जांच कर आवश्यक कदम उठाएंगे, या फिर कार्यालय में कथित दलालों की सक्रियता और अव्यवस्थाओं को लेकर उठ रहे सवाल इसी तरह बने रहेंगे। वाहन स्वामी अब प्रशासन से त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की उम्मीद लगाए हुए हैं।

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