“इनके पैसे वापस करो, वरना तुम्हें सस्पेंड कर दूंगा”: रिश्वत के आरोप पर डीआईजी का सख्त रुख
जनसुनवाई में पीड़ित की शिकायत और व्हाट्सएप चैट देखने के बाद डीआईजी अशोक कुमार शुक्ला ने तरबगंज थाने के एसएचओ को लगाई फटकार, कथित रिश्वत की रकम वापस कराने और मामले की निष्पक्ष जांच के दिए निर्देश
चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट
गोंडा। पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर एक बार फिर गंभीर मामला सामने आया है। जनसुनवाई के दौरान एक पीड़ित ने तरबगंज थाने में तैनात एक उपनिरीक्षक पर चार्जशीट लगाने के नाम पर 30 हजार रुपये लेने का आरोप लगाया। शिकायतकर्ता का कहना है कि रकम लेने के बावजूद विवेचना में चार्जशीट दाखिल नहीं की गई, बल्कि मामले में अंतिम रिपोर्ट (फाइनल रिपोर्ट) न्यायालय भेज दी गई। शिकायत सुनते ही देवीपाटन रेंज के डीआईजी अशोक कुमार शुक्ला ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित थाना प्रभारी को फोन पर जमकर फटकार लगाई और कथित रूप से ली गई रकम तत्काल वापस कराने के निर्देश दिए।
मामले का वीडियो सामने आने के बाद यह प्रकरण चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में डीआईजी भ्रष्टाचार के आरोपों पर नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों को कड़ी चेतावनी देते दिखाई दे रहे हैं।
जनसुनवाई में पहुंचा पीड़ित, सुनाई पूरी आपबीती
जानकारी के अनुसार, तरबगंज थाना क्षेत्र के मन्नीपुरवा गांव निवासी किंग उपाध्याय 9 जुलाई को अपनी शिकायत लेकर डीआईजी कार्यालय पहुंचे थे। उस समय डीआईजी अशोक कुमार शुक्ला आम लोगों की समस्याएं सुन रहे थे। इसी दौरान किंग उपाध्याय ने आरोप लगाया कि तरबगंज थाने में तैनात उपनिरीक्षक ओम प्रकाश यादव ने उनके मुकदमे में चार्जशीट लगाने के नाम पर 30 हजार रुपये लिए थे।
पीड़ित का कहना था कि रकम लेने के बाद भी पुलिस ने चार्जशीट दाखिल नहीं की और इसके बजाय मामले में अंतिम रिपोर्ट लगा दी, जिससे उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद टूट गई।
व्हाट्सएप चैट भी दिखाई
शिकायतकर्ता ने डीआईजी को बताया कि वह पिछले एक महीने से संबंधित दरोगा से अपनी रकम वापस मांग रहे हैं। उन्होंने कई बार फोन किया और व्हाट्सएप पर संदेश भी भेजे, लेकिन न तो कॉल का जवाब मिला और न ही किसी संदेश का उत्तर दिया गया।
अपनी शिकायत के समर्थन में किंग उपाध्याय ने व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट भी डीआईजी को दिखाए। कथित संदेशों में उन्होंने लिखा था कि चार्जशीट लगाने के नाम पर 30 हजार रुपये लिए गए थे, जबकि न्यायालय में अंतिम रिपोर्ट भेज दी गई। साथ ही उन्होंने रुपये वापस करने की मांग भी की थी।
सबूत देखते ही डीआईजी ने दिखाई सख्ती
पीड़ित द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज और चैट देखने के बाद डीआईजी अशोक कुमार शुक्ला ने तत्काल तरबगंज थाने के प्रभारी निरीक्षक श्रीधर पाठक को फोन लगाया। उन्होंने थाना प्रभारी से कहा कि यदि थाने में इस प्रकार की शिकायतें सामने आ रही हैं तो यह बेहद गंभीर विषय है।
डीआईजी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि थाना प्रभारी की जिम्मेदारी है कि थाने में भ्रष्टाचार जैसी गतिविधियां न होने पाएं। उन्होंने निर्देश दिया कि यदि कथित रूप से 30 हजार रुपये लिए गए हैं तो उन्हें तत्काल शिकायतकर्ता को वापस कराया जाए। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
मुकदमे की मेरिट की जांच के निर्देश
डीआईजी ने थाना प्रभारी को यह भी निर्देश दिया कि संबंधित मुकदमे की विवेचना का निष्पक्ष परीक्षण किया जाए। यदि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर चार्जशीट बनती है तो नियमानुसार चार्जशीट न्यायालय में प्रस्तुत की जाए। वहीं यदि किसी अधिकारी द्वारा अनुचित लाभ लेकर कार्रवाई प्रभावित करने का प्रयास किया गया है तो उसके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
भ्रष्टाचार पर जताई नाराजगी
जनसुनवाई के दौरान डीआईजी ने कहा कि भ्रष्टाचार जैसी घटनाएं पूरे पुलिस विभाग की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं। उन्होंने कहा कि यदि पुलिसकर्मी अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन नहीं करेंगे तो जनता का भरोसा कमजोर होगा।
उन्होंने थाना प्रभारी को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि थाने में भ्रष्टाचार पर नियंत्रण नहीं रखा गया तो इसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी और आवश्यक होने पर निलंबन जैसी कार्रवाई भी की जाएगी।
जनवरी के मुकदमे से जुड़ा है विवाद
पीड़ित किंग उपाध्याय के अनुसार यह पूरा मामला 23 जनवरी को दर्ज कराए गए एक मारपीट और वाहन क्षति के मुकदमे से जुड़ा है। उनका आरोप है कि गांव के एक व्यक्ति ने उनकी कार में तोड़फोड़ की और उनके साथ मारपीट भी की थी। घटना के बाद उन्होंने थाना तरबगंज में मुकदमा दर्ज कराया।
उनका कहना है कि विवेचना के दौरान चार्जशीट दाखिल कराने के लिए उनसे 30 हजार रुपये मांगे गए। फरवरी में उन्होंने यह रकम दे दी, लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी चार्जशीट दाखिल नहीं हुई और अंततः मामले में अंतिम रिपोर्ट लगा दी गई।
शिकायत के बाद भी नहीं मिली रकम
पीड़ित का दावा है कि डीआईजी से शिकायत करने के बाद भी अब तक उन्हें उनके 30 हजार रुपये वापस नहीं मिले हैं। उनका कहना है कि वह निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की उम्मीद लगाए हुए हैं।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी सच्चाई
यह मामला पुलिस विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बन गया है। फिलहाल शिकायतकर्ता ने गंभीर आरोप लगाए हैं, जिन पर डीआईजी ने तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि विभागीय जांच के बाद ही हो सकेगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई संभव है, जबकि आरोप असत्य पाए जाने पर भी विभाग आधिकारिक रूप से स्थिति स्पष्ट करेगा।
फिलहाल इस मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग यह देखने का इंतजार कर रहे हैं कि जांच पूरी होने के बाद पुलिस विभाग इस पूरे प्रकरण में क्या कार्रवाई करता है।








