‘श्रीकृष्ण थे 5 वक्त के नमाजी…’ मौलाना जरजिश के विवादित दावे पर भड़के संत, लखनऊ में FIR दर्ज
झारखंड के एक धार्मिक जलसे का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल, हिंदू संगठनों ने जताई कड़ी आपत्ति; पुलिस ने शुरू की तकनीकी जांच
रिपोर्ट: ठाकुर के.के. सिंह
मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद से जुड़े कानूनी विवाद के बीच एक और नया विवाद सामने आया है। उत्तर प्रदेश के इटावा निवासी मौलाना जरजिश अंसारी के कथित विवादित बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला तूल पकड़ गया है। वीडियो में मौलाना भगवान श्रीकृष्ण के संबंध में ऐसे दावे करते दिखाई दे रहे हैं, जिन्हें लेकर संत समाज और विभिन्न हिंदू संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है। मामले में लखनऊ में एफआईआर दर्ज कर ली गई है, जबकि पुलिस वायरल वीडियो की सत्यता और उससे जुड़े अन्य पहलुओं की जांच में जुट गई है।
झारखंड के धार्मिक जलसे से जुड़ा बताया जा रहा है वीडियो
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वायरल वीडियो झारखंड में 23 जून को आयोजित एक धार्मिक जलसे का बताया जा रहा है। वीडियो में मौलाना जरजिश अंसारी मंच से संबोधन देते हुए श्रीमद्भगवद्गीता का उल्लेख करते हैं। आरोप है कि उन्होंने गीता के एक श्लोक की ऐसी व्याख्या की, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण को मुस्लिम बताते हुए यह दावा किया कि वे धरती पर इस्लाम का प्रचार करने आए थे और नियमित रूप से पांचों वक्त की नमाज अदा करते थे।
वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद तेजी से वायरल हो गया और देखते ही देखते इस पर तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया।
संत समाज और हिंदू संगठनों में नाराजगी
वायरल वीडियो के बाद ब्रज क्षेत्र के संतों और कई हिंदू संगठनों ने बयान को करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था पर चोट बताया है। उनका कहना है कि किसी भी धर्म के आराध्य और पूजनीय व्यक्तित्व के बारे में इस प्रकार के बयान सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकते हैं।
धार्मिक संगठनों ने प्रशासन से मामले में सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है और कहा है कि धार्मिक भावनाओं को भड़काने वाले बयानों पर कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि पक्षकार ने उठाए सवाल
श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले के पक्षकार महेंद्र प्रताप सिंह ने मौलाना के बयान की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण सनातन धर्म के आराध्य हैं और उनका उल्लेख हजारों वर्षों से भारतीय धार्मिक परंपरा का हिस्सा रहा है। उन्होंने कहा कि इस्लाम का इतिहास लगभग 1400 वर्ष पुराना माना जाता है, जबकि भगवान श्रीकृष्ण का उल्लेख भारतीय परंपराओं में उससे कहीं अधिक प्राचीन है। ऐसे में इस प्रकार के दावे ऐतिहासिक और धार्मिक मान्यताओं से मेल नहीं खाते।
उन्होंने कहा कि यदि किसी ने जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को आहत करने का प्रयास किया है तो उसके खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई होनी चाहिए।
श्रीकृष्ण जन्म संघर्ष न्यास ने भी जताया विरोध
श्रीकृष्ण जन्म संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी ने भी बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की टिप्पणियां केवल विवाद खड़ा करने और सुर्खियां बटोरने का प्रयास प्रतीत होती हैं। उन्होंने प्रशासन से मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।
साध्वी इंदुलेखा और अनमोल दास जी महाराज सहित कई संतों और धार्मिक नेताओं ने भी इस बयान की निंदा करते हुए कहा कि किसी भी धर्म के पूजनीय व्यक्तित्व के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी स्वीकार नहीं की जा सकती।
राजनीतिक प्रतिक्रिया भी आई सामने
मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। भाजपा नेता मनीष शुक्ला ने बयान को सामाजिक सौहार्द के लिए गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े विषयों पर इस तरह की विवादित टिप्पणियां समाज में तनाव पैदा कर सकती हैं। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की।
लखनऊ में दर्ज हुई एफआईआर
वायरल वीडियो के आधार पर लखनऊ में मौलाना जरजिश अंसारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, वीडियो के तकनीकी साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि वीडियो मूल स्वरूप में है या उसमें किसी प्रकार का संपादन अथवा छेड़छाड़ की गई है।
पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस ने लोगों से की संयम बरतने की अपील
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर किसी भी अपुष्ट या भड़काऊ सामग्री को साझा करने से बचें। पुलिस ने कहा है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
विवादित वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी तीखी बहस छिड़ गई है। बड़ी संख्या में लोग बयान की आलोचना कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग जांच पूरी होने तक संयम बरतने की अपील कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि धर्म और आस्था जैसे संवेदनशील विषयों पर सार्वजनिक मंचों से दिए जाने वाले वक्तव्यों में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए ताकि समाज में अनावश्यक तनाव की स्थिति पैदा न हो।
मौलाना जरजिश अंसारी के कथित विवादित बयान को लेकर अब मामला कानूनी प्रक्रिया में पहुंच चुका है। लखनऊ पुलिस एफआईआर दर्ज कर वायरल वीडियो की तकनीकी जांच कर रही है। जांच के निष्कर्ष आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी। वहीं संत समाज, हिंदू संगठनों और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं के चलते यह मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।








