मौसम

जब चले भूलोट पुरवाई, तब जानो बरखा ऋतु आई ; कहाँ अटका मानसून? पूर्वांचल की दहलीज तक पहुँचकर भी नहीं दे रहा दस्तक

चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट

वाराणसी। उत्तर प्रदेश के सीमांत क्षेत्र में लोग पिछले कई दिनों से दावेदारों की बेसहारा से प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन दक्षिण-पश्चिम अब भी प्रदेश की सीमा पर स्थिरता की स्थिति दिखाई दे रही है। बिहार की ओर से भारी और बाहुबली बलिया की सीमा तक पहुंच बनी हुई है, जबकि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के रास्ते में आगे बढ़ती हुई सक्रिय सक्रियता सोनभद्र जिले के आसपास भी दर्ज की जा रही है। इसके बाकी हिस्सों में से अधिकांश सजावटी में बारिश का इंतजार अभी भी खत्म नहीं हुआ है।

आपदा के आगमन में हो रही देरी के कारण क्षेत्र में भीषण गर्मी, गर्मी और लू का प्रकोप लगातार बना हुआ है। मौसम विशेषज्ञ का मानना ​​है कि विकास के लिए आवश्यक परिस्थितियां अब तेजी से बन रही हैं और जून के अंतिम सप्ताह में पूर्वी उत्तर प्रदेश को राहत मिलने की उम्मीद है।

मसाले में गर्मी का ख़तरा, बारिश का इंतज़ार

जून का अंतिम सप्ताह शुरू हो चुका है, लेकिन टोकियो के कई अनूठे सीज़न में अभी भी टैपिश भरी हुई है। दिन के समय तेज धूप और गर्म हवाओं से लोगों की परेशानी बढ़ रही है। न्यूनतम सामान्य से ऊपर बना हुआ है और किसानों के कारण लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस बार दावेदारों की संभावनाएं अधिक लंबी हो गई हैं। सामान्य किसानो के लिए योजना की तैयारी के लिए आकाशवाणी की ओर टकटकी की व्यवस्था की गई है। वर्षा ऋतु की अनुपस्थिति में खेती-किसानी से प्रभावित हो रहे हैं और कैमरून के कलाकारों का कार्यक्रम भी पीछे खिसक रहा है।

बलिया और सोनभद्र के आसपास के धार्मिक अनुष्ठान

मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार बिहार के सासाराम क्षेत्र को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की सीमा के करीब पहुंचाया गया है। दूसरी ओर दक्षिण दिशा से बढ़ती हुई विचारधारा का प्रभाव मध्य प्रदेश के सिंगरौली क्षेत्र तक पहुंच गया है, जो सोनभद्र जिले के निकट स्थित है।

इन दोनों विचारधाराओं में से अधिकांश विचारधाराओं में अभी तक व्यापक वर्षा नहीं हो पाई है। विशेषज्ञ का मानना ​​है कि अगले कुछ दिनों में पानी की धाराएं और मजबूत हो जाएंगी, जिसके बाद पूर्वी प्रदेश में बारिश का सिलसिला उत्तर प्रदेश में शुरू हो सकता है।

पुरानी कहावत फिर हो रही सच साबित

ग्रामीण इलाकों में मौसम को लेकर एक पुरानी कहावत है- “जब चले भूलोट पुरवाई, तब जानो बरखा मौसम आई।” मौसम के कथन का अर्थ है कि वर्तमान परिस्थितियाँ इसी कहावत को सही साबित करती दिख रही हैं। पूर्वी वाद्ययंत्रों की सक्रियता बढ़ रही है और पर्यावरण में आस्था का स्तर भी धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है।

विज्ञानियों के ये संकेत इस ओर इशारा करते हैं कि बात की प्रगति जल्द ही तेज हो सकती है और लंबे इंतजार के बाद बारिश की शुरुआत हो सकती है।

पूर्वी उत्तर प्रदेश में लू का असर जारी है

पूर्व उत्तर प्रदेश में उष्ण लहर वेव लू का प्रभाव लगातार बना हुआ है। प्रदेश के कई जिले भीषण गर्मी की चपेट में हैं। मौसम विभाग के अनुसार बांदा में एक बार फिर देश के सबसे गर्म शहर शामिल हो रहे हैं।

इसके अलावा वास्तुशिल्प, असमतल, वाराणसी, मिर्ज़ापुर, सुल्तानपुर, आश्रम खेडडी और किले सहित कई आक्षेपों में लू जैसी परिस्थितियाँ दर्ज की गई हैं। दिन के समय तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है।

विशेषज्ञ का कहना है कि बहस के आगमन में देरी और स्थानीय स्तर पर अत्यधिक गर्मी के कारण तापमान में लगातार वृद्धि का आकलन किया जा रहा है। यही कारण है कि जून के आखिरी दिनों में भी लोगों को गर्मी जैसी गर्मी का एहसास हो रहा है।

27 जून तक राहत की संभावना कम

मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार 27 जून तक पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ मानक में लू की स्थिति बनी रह सकती है। इस दौरान तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। हालाँकि इसके बाद सीज़न में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

सीज़न का अनुमान है कि 28 जून से प्रदेश में वर्षा की नई दुकानें शुरू हो सकती हैं। यदि ऐसा होता है तो दक्षिण-पश्चिमी जिले को उत्तर प्रदेश के अंदर तेजी से आगे बढ़ने में मदद मिलती है और जगह-जगह के अलग-अलग हिस्सों में व्यापक वर्षा दर्ज की जाती है।

किसानों की प्रबल चिंता, प्रभावशाली पर प्रभावशाली

डिबेट में सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ रहा है। खेती के मौसम की फ़सलें, खेत की खेती, समय पर बारिश पर प्रतिबंध है। कई किसान अपने खेत की तैयारी कर चुके हैं, लेकिन खेती नहीं होने के कारण खेती शुरू नहीं हो पा रही है।

कृषि विशेषज्ञ का कहना है कि अगर अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश हुई तो खेती पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। हालाँकि उत्पादन और कृषि कार्यों में अधिक वृद्धि में देरी हो सकती है।

मौसम विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे मौसम संबंधी अपडेट पर लगातार नजर रखें और कृषि विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

डिजाईन से वास्तविक गर्मी से राहत

विशेषज्ञ का मानना ​​है कि आपदा के सक्रिय होने से प्रदेश के तापमान में गिरावट आएगी। बारिश से न केवल लोगों को गर्मी और गरीबों को राहत मिलेगी, बल्कि किसानों, किसानों और कृषि क्षेत्रों को भी फायदा होगा।

अब मौसम विभाग के लोगों के सहयोगियों पर टिकी हैं। यदि अनुमान सही साबित होता है तो जून के अंतिम दिनों और जुलाई की शुरुआत में पूरे क्षेत्र में लंबे समय तक इंतजार को सक्रिय किया जा सकता है।

उम्मीदों पर रुका रुका

नागालैण्ड के आकाश में पुरावशेषों की लहरें और वातावरण में प्लास्टिक की आबादी के करीब होने के संकेत दे रही है। बलिया और सोनभद्र की सीमा तक पहुंच के लिए वैधानिक दूकान इस बात का संकेत है कि अब इंतजार मत कीजिए।

हालाँकि अभी भी स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है, लेकिन मौसम विभाग और विशेषज्ञ के विश्लेषण से यह उम्मीद जगी है कि आने वाले कुछ दिनों में झुलसी हुई कोना वाली गर्मी से राहत सुविधा और आपूर्ति पूरे क्षेत्र में सक्रिय किसानों, आम नागरिकों और प्रकृति को नई ऊर्जा प्रदान करेगी।

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