राजनीति

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले और लखनऊ अग्निकांड पर अखिलेश यादव का सरकार पर हमला, बोले- आस्था के साथ खिलवाड़ महापाप

अयोध्या चढ़ावा चोरी प्रकरण पर उठाए सवाल, सरकार को घेरा

कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले को लेकर प्रदेश सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस घटना को केवल वित्तीय अनियमितता नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए इसे “महापाप” करार दिया।

अखिलेश यादव ने कहा कि अयोध्या का राम मंदिर देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर के सनातन धर्मावलंबियों की आस्था का केंद्र है। यहां देश-विदेश से श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और विश्वास के साथ चढ़ावा अर्पित करते हैं। यदि उस चढ़ावे के प्रबंधन पर सवाल उठते हैं या उसमें किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है, तो यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली घटना है।

उन्होंने कहा कि सदियों पुरानी सनातन परंपरा में मंदिरों में दान और चढ़ावा श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में यदि उस व्यवस्था में पारदर्शिता नहीं रहती या चोरी जैसी घटनाएं सामने आती हैं, तो लोगों का विश्वास कमजोर होता है। इसलिए इस पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए।

“यह विश्वास में सेंध और आस्था के साथ खिलवाड़”

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच के लिए गठित एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) पर भी अखिलेश यादव ने तंज कसा। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि “SIT का मतलब कहीं Share in Theft तो नहीं है?”।

उन्होंने कहा कि यह मामला बेहद संवेदनशील है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। श्रद्धालु अपनी मेहनत की कमाई और आस्था के भाव से मंदिरों में दान देते हैं। ऐसे में यदि उस धन के उपयोग या सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े होते हैं, तो यह लोगों के विश्वास में सेंध लगाने जैसा है।

सपा प्रमुख ने कहा कि धार्मिक आस्था के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जा सकता। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मंदिरों में आने वाले चढ़ावे का पूरा लेखा-जोखा पारदर्शी तरीके से रखा जाए और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर सख्त कार्रवाई की जाए।

यूपी ग्लोबल ग्रोथ डायलॉग और निवेश यात्रा पर भी साधा निशाना

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के यूपी ग्लोबल ग्रोथ डायलॉग 2026 और निवेश आकर्षित करने के लिए बेंगलुरु दौरे को लेकर भी अखिलेश यादव ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में निवेश और रोजगार के दावों की वास्तविकता जनता के सामने है।

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर जमीनों का आवंटन किया जा रहा है और यह स्पष्ट नहीं है कि इनका लाभ किसे मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में निवेश आया होता तो प्रदेश के युवाओं को रोजगार मिलता और बेरोजगारी की समस्या इतनी गंभीर नहीं होती।

सपा प्रमुख ने कटाक्ष करते हुए कहा कि सरकार निवेश लाने के नाम पर यात्राएं कर रही है, जबकि प्रदेश में रोजगार और औद्योगिक विकास के ठोस परिणाम दिखाई नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता अब केवल घोषणाएं नहीं बल्कि जमीन पर विकास देखना चाहती है।

पर्यावरण और रोजगार के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा

अखिलेश यादव ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि विकास के नाम पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जंगलों और हरित क्षेत्रों को समाप्त कर विकास का दावा किया जा रहा है, जबकि संतुलित विकास की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि यदि प्रदेश में वास्तविक निवेश आया होता तो उद्योग स्थापित होते, रोजगार के नए अवसर पैदा होते और युवाओं को बेहतर भविष्य मिलता। लेकिन वर्तमान स्थिति में बेरोजगारी और आर्थिक चुनौतियां बनी हुई हैं।

लखनऊ अग्निकांड पर उठाए गंभीर सवाल

लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में हुए अग्निकांड को लेकर भी अखिलेश यादव ने सरकार और प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि इस दुखद घटना में जिन बच्चों और लोगों की जान गई, उनमें से कई को समय रहते बचाया जा सकता था यदि आवश्यक सुविधाएं और बचाव संसाधन उपलब्ध होते।

उन्होंने कहा कि किसी भी आपदा के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया और पर्याप्त संसाधन सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। यदि प्रशासन पहले से सतर्क रहता और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करता तो इस प्रकार की घटना को रोका जा सकता था।

सपा प्रमुख ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी केवल घटना के बाद बयान देने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पहले से प्रभावी व्यवस्था तैयार करनी चाहिए।

महाकुंभ और लेवाना होटल अग्निकांड का भी किया उल्लेख

अखिलेश यादव ने अपने बयान में पूर्व की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि महाकुंभ के दौरान भी कई बार आग लगने की घटनाएं सामने आई थीं। इसके अलावा लखनऊ के चर्चित लेवाना होटल अग्निकांड का हवाला देते हुए उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि कई मामलों में सरकार ने सख्त कार्रवाई और बुलडोजर चलाने की बात कही, लेकिन हर मामले में समान रूप से कार्रवाई होती दिखाई नहीं दी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को सभी मामलों में एक समान नीति अपनानी चाहिए।

“आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर उठते हैं सवाल”

अखिलेश यादव ने कहा कि यदि प्रशासन के पास आग लगने की स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त उपकरण और संसाधन नहीं हैं तो यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने दावा किया कि कई मामलों में लोगों की मौत आग से ज्यादा धुएं और दम घुटने के कारण होती है।

उन्होंने कहा कि बचाव कार्यों के दौरान यदि दीवारें तोड़ने, लोगों को बाहर निकालने और तत्काल राहत पहुंचाने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध न हों तो नुकसान और बढ़ जाता है। इसलिए सरकार को आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की जरूरत है।

सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग

सपा अध्यक्ष ने कहा कि सरकार को हर बड़ी घटना की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि चाहे मामला अयोध्या में चढ़ावे की कथित चोरी का हो या लखनऊ के अग्निकांड का, दोनों ही मामलों में जनता जवाब चाहती है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी जनता के विश्वास और सुरक्षा की रक्षा करना है। यदि इन दोनों मोर्चों पर सवाल उठते हैं तो सरकार को गंभीरता से आत्ममंथन करना चाहिए।

अखिलेश यादव के इन बयानों के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर राम मंदिर, प्रशासनिक पारदर्शिता, निवेश, रोजगार और आपदा प्रबंधन जैसे मुद्दों पर बहस तेज होने की संभावना है।

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