कपड़े के शोरूम में भीषण आग, चार घंटे की मशक्कत के बाद पाया गया काबू; 80 लाख तक के नुकसान की आशंका
जोगियापुर स्थित प्रेम गाढ़ा भंडार में मची अफरा-तफरी, दो किलोमीटर दूर तक दिखा धुएं का गुबार
राम कीर्ति यादव की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के जंगलों में शनिवार की शाम एक वृद्धाश्रम ने आदिवासियों और स्थानीय लोगों को संकट में डाल दिया। नगर सागर क्षेत्र के जोगियापुर में स्थित प्रसिद्ध कपड़ा दुकान “प्रेम भंडार भंडार” में भीषण आग लग गई। इतना विकराल कि उसका काला धुआं करीब दो किलोमीटर दूर दिखाई दे रहा था। घटना की सूचना ही पूरे इलाके में रिमोट-साख्ता का मोरचा बन गई।
आग के सिद्धांत का समान रूप से अनुमान लगाया जा सकता है कि उस अंश के लिए फायर ब्रिगेड के पांच हिस्सों को मैक पर उतारा गया और फायर ब्रिगेड को चार घंटे से अधिक समय तक लगातार संकटग्रस्त स्थिति में रखा गया। राहत की बात यह हो रही है कि इस हादसे में कोई जनहानी तो नहीं हुई, लेकिन लाखों रुपये का सामान जलकर राख हो गया।
टॉप फ्लोर के ज्वालामुखी से शुरू हुआ आग की लपटें
जानकारी के अनुसार, प्रेम सुपरमार्केट भंडार के ऊपरी हिस्से में फ्लैट का बड़ा आर्किटेक्चर बनाया गया था, जबकि सुपरमार्केट शोरूम का संचालन हुआ था। शनिवार शाम करीब छह बजे एक स्टाफ कुछ सामान लेने के लिए ऊपर गया तो उसने धूम्रपान किया और आग की लपटें देखीं। उन्होंने तुरंत नीचे मौजूद अन्य कर्मचारियों को सूचित किया।
उस समय शोरूम में करीब दस कर्मचारी काम कर रहे थे। आग की खबर मिलते ही सभी कर्मचारियों को तुरंत बाहर निकल कर पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचित किया गया। करीब आधे मिनट के भीतर फायर की पहली गाड़ी मशीन पर पहुंच गई, लेकिन आग तेजी से फैल गई थी। स्थिति की पसंद को देखते हुए अतिरिक्त मित्र को भी बुलाया गया।
कर्मचारियों ने खुद से की कोशिश की
शोरूम में काम करने वाले कर्मचारी आशीष गुप्ता ने बताया कि सभी कर्मचारी नीचे के फ्लोर पर काम कर रहे थे, इसलिए किसी को भी शुरुआत में आग लगने की जानकारी नहीं हो पाई। जैसे ही आग का पता चला, सभी लोग बाहर निकल आए और अपने स्तर पर आग लगाने का प्रयास शुरू कर दिया।
कर्मचारियों ने पानी की मोटर चलाने की कोशिश की, लेकिन बिजली आपूर्ति बंद हो जाने के कारण सबमर्सिबल पंप नहीं चल पाया। इसके बाद कर्मचारियों ने बाल्टियों से जल संस्थान आग लगने की कोशिश की, लेकिन तब तक आग काफी हद तक विफल हो गई थी। अंततः फायर ब्रिगेड की टीम ने आग पर नियंत्रण पाने के बाद कड़ी मेहनत की।
70 से 80 लाख रुपये का नुकसान
शुरुआती अनुमान के मुताबिक इस शोरूम में करीब 70 से 80 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। आग की वजह से बड़ी मात्रा में कपड़े, फर्नीचर, सामान, रसोई, प्लास्टिक की दुकानें और अन्य सामान जलकर नष्ट हो गए।
शोरूम के मालिक राघवेंद्र राठौड़ ने बताया कि बिजली के पोल से आने वाले तार में स्पार्किंग हुई, जिससे आग लग गई। उन्होंने कहा कि आग को हरसंभव पर रोक लगाने की कोशिश की गई थी, लेकिन देखते ही देखते। पूरे ओलंपिक को अपनी चपेट में ले लिया।
उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं। उन्होंने भगवान का कौशल अदा करते हुए कहा कि जान बच गई, यही सबसे बड़ी बात है।
दुकान पर सुपरमार्केट और दुकान
घटना की जानकारी जिला प्रशासन से भी प्राप्त की जा सकती है। नामांकित सैमुअल पाल एन और पुलिस कप्तान कुँवर अनुपम सिंह मॉरिस ने देश और राहत एवं बचाव कार्य का निर्देशन किया।
स्था. ने बताया कि भवन में अलग-अलग दिशाओं में अलग-अलग प्रकार का सामान रखा जाता था। ग्राउंड फ्लोर पर घरेलू उपयोग की भूमि, पहली मंज़िल पर शोरूम और दूसरी मंज़िल पर ज्वालामुखी था, जहां बड़ी मात्रा में ज्वलनशील सामग्री रखी गई थी। यही वजह रही कि आग तेजी से फैलती चली गई और लंबे समय तक धड़कती रही।
अग्निशामक यंत्र मौजूद थे, लेकिन उपयोग का समय नहीं मिल पाया
कंपनी के अधिकारियों के अनुसार शोरूम में अग्निशामक यंत्र उपलब्ध थे, लेकिन अचानक मची ज्वालामुखी-प्रदर्शन और अशांति के कारण उनका सही समय पर उपयोग नहीं किया जा सका। यदि प्रारंभिक चरण में इन उपकरणों का उपयोग होता तो लगभग नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता था।
जांच के लिए सार्जेंट हुई दो मूर्ति समिति
यूनिवर्सल सैमुअल पाल एन ने घटना की जांच के लिए दो रूढ़िवादी समिति का गठन किया है। इस समिति में अपर नॉमिनल (विट्टा एवं राजस्व) परमानंद झा और सउदर विशेषज्ञ योगिता सिंह शामिल हैं। समिति को अगले दिन शाम तक अपनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिये गये हैं।
प्रशासन ने अब यह खुलासा किया है कि आग असल में शॉर्ट सर्किट के कारण लगी है या इसके पीछे कोई और कारण भी है। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि भवन में अग्नि सुरक्षा के मानकों का पूरी तरह से पालन किया गया था या नहीं।
बड़ा हादसा, लेकिन कई सवाल इस अग्निकांड को छोड़ गए
जंगल का यह अग्निकांड एक बार फिर अवैध और व्यावसायिक व्यवसाय में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाया गया है। यदि घटना के समय कर्मचारी ऊपर मौजूद होते हैं या आग के नीचे के हिस्सों तक पहुंच जाते हैं, तो यह स्थिति कहीं अधिक वैज्ञानिक रूप में ले जा सकती थी।
आग्नेयास्त्र पर परमाणु हमला हुआ, लेकिन लाखों रुपये का नुकसान हुआ और सुरक्षा व्यवस्था पर अगले कुछ दिनों में चर्चा का विषय बना रहा।
मेटा डिस माउंटेन: मुगलों के जोगियापुर स्थित प्रेम रसोईघर में भीषण आग लगने से 70-80 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। चार घंटे की संकट के बाद फायर ब्रिगेड ने आग पर भौतिकवादी पाया, जांच समिति समिति।









