रिपोर्ट: टिक्कू आपचे
मुंबई। हिंदी सिनेमा की उन अभिनेत्रियों में मंदाकिनी का नाम आज भी खास तौर पर लिया जाता है, जिनकी पहली ही फिल्म ने उन्हें रातों-रात पहचान दिला दी थी। वर्ष 1985 में राज कपूर के निर्देशन में आई ‘राम तेरी गंगा मैली’ ने मंदाकिनी को घर-घर पहुंचा दिया। फिल्म में उनके अभिनय के साथ-साथ झरने के नीचे फिल्माया गया दृश्य भी लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहा। लेकिन जिस तेजी से मंदाकिनी का सितारा चमका, उसी तरह उनके करियर के आगे विवादों की एक ऐसी परछाई भी आई, जिसने उनके फिल्मी सफर को गहरा झटका दिया।
इस विवाद का केंद्र बनी थी मंदाकिनी की एक तस्वीर, जिसमें वह अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के साथ नजर आई थीं। तस्वीर सामने आने के बाद उनके और दाऊद के बीच रिश्ते को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। वर्षों तक इस तस्वीर को लेकर अलग-अलग दावे और अटकलें सामने आती रहीं। अब मंदाकिनी ने एक बार फिर इस पुराने प्रकरण पर खुलकर बात की है और बताया है कि वह तस्वीर आखिर किन परिस्थितियों में खिंची थी।
दुबई में शो के बाद क्रिकेट मैच देखने पहुंची थीं मंदाकिनी
मंदाकिनी ने हालिया एएनआई बातचीत में बताया कि वह दुबई एक स्टेज शो के सिलसिले में गई थीं। शो पूरा होने के बाद वह क्रिकेट मैच देखने के लिए स्टेडियम पहुंचीं। वहां कई दूसरे लोग और सेलिब्रिटीज भी मौजूद थे। इसी दौरान दाऊद इब्राहिम के साथ उनकी तस्वीर खिंच गई।
मंदाकिनी के मुताबिक, उस समय उन्हें बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि कुछ सेकंड की वह तस्वीर आगे चलकर उनके लिए इतनी बड़ी परेशानी का कारण बन जाएगी। उनका कहना है कि एक कलाकार के रूप में उन्हें रोजाना बहुत से लोगों से मिलना पड़ता है और हर व्यक्ति की पृष्ठभूमि जानना या यह तय करना संभव नहीं होता कि किसके साथ तस्वीर खिंचवानी है और किससे दूरी बनानी है।
उन्होंने इस बात से साफ इनकार किया कि वह दाऊद के किसी विशेष निमंत्रण पर वहां गई थीं। उनका कहना है कि वह वहां अपने पेशेवर कार्यक्रम के लिए पहुंची थीं और बाद में मैच देखने गईं।
‘मुझे नहीं पता था कि इसका क्या अंजाम होगा’
मंदाकिनी ने पुराने घटनाक्रम को याद करते हुए कहा कि एक कलाकार के लिए लोगों से मिलना-जुलना उसके काम का हिस्सा है। उनके अनुसार उस समय स्टेडियम में बहुत सारे लोग मौजूद थे और उनके लिए यह अंदाजा लगाना संभव नहीं था कि किसी व्यक्ति के साथ ली गई तस्वीर बाद में किस तरह की खबरों का आधार बन सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि लोग क्या लिखेंगे या क्या कहेंगे, इस पर किसी कलाकार का नियंत्रण नहीं होता। तस्वीर सामने आने के बाद उसके साथ कई तरह की कहानियां जोड़ी गईं और यही चीज बाद में उनके लिए मुश्किल बनती चली गई।
मंदाकिनी की बात का मूल दर्द यही है कि जिस घटना को उन्होंने एक सामान्य सामाजिक मुलाकात के रूप में देखा था, उसे बाद में उनके फिल्मी करियर से जोड़कर देखा जाने लगा। उन्होंने कहा कि उन्हें उस समय यह अंदाजा तक नहीं था कि उस एक तस्वीर के इतने दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।
विवाद ने फिल्मी करियर को पहुंचाया बड़ा नुकसान
मंदाकिनी के अनुसार तस्वीर से पैदा हुई चर्चा का असर उनके काम पर पड़ा। मीडिया में लगातार चल रही अटकलों और अफवाहों ने उनके करियर को नुकसान पहुंचाया। वह कहती हैं कि उन्होंने अलग-अलग जगहों पर इन चर्चाओं का खंडन किया, लेकिन तब तक तस्वीर से जुड़ी धारणा काफी मजबूत हो चुकी थी।
अभिनेत्री ने यह भी स्वीकार किया कि बाद में उन्हें समझ आया कि सार्वजनिक जीवन में ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए एक मजबूत टीम की जरूरत होती है। उनके मुताबिक उस समय उनके पास ऐसी पीआर या मैनेजमेंट टीम नहीं थी, जो विवाद के बीच सही तरीके से उनका पक्ष सामने रख सके।
उन्होंने माना कि विवाद ने उनके करियर को काफी नुकसान पहुंचाया। इसी संदर्भ में उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने उस समय अफवाहों का खंडन किया था और उनका पक्ष प्रकाशित भी हुआ था।
‘राम तेरी गंगा मैली’ ने बना दिया था स्टार
मंदाकिनी का फिल्मी सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा। मेरठ में पली-बढ़ी मंदाकिनी को फिल्मों की दुनिया में आने का अवसर तब मिला, जब उनकी तस्वीरें फिल्मकार राज कपूर तक पहुंचीं। इसके बाद उन्हें 1985 की फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ में गंगा की भूमिका मिली।
यह राज कपूर की अंतिम निर्देशित फिल्म थी और रिलीज के बाद मंदाकिनी की पहचान तेजी से बढ़ी। फिल्म में राजीव कपूर उनके साथ मुख्य भूमिका में थे। फिल्म की कहानी, संगीत और मंदाकिनी की स्क्रीन मौजूदगी ने उन्हें उस दौर की चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल कर दिया। हालिया बातचीत में भी मंदाकिनी ने फिल्म और राज कपूर के साथ काम करने के अनुभवों को याद किया है।
फिल्म के कुछ दृश्यों को लेकर उस समय भी काफी बहस हुई थी। वर्षों बाद मंदाकिनी ने उन दृश्यों के बारे में अपनी बात रखते हुए कहा कि उन्हें उस समय उनमें वह अश्लीलता महसूस नहीं हुई थी, जिस नजर से बाद में उन्हें देखा गया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि फिल्म में चर्चित स्तनपान वाला दृश्य वास्तव में तकनीकी तरीके से इस तरह फिल्माया गया था कि वह वैसा दिखाई दे।
मिथुन, गोविंदा और कई बड़े सितारों के साथ किया काम
‘राम तेरी गंगा मैली’ की सफलता के बाद मंदाकिनी के सामने फिल्मों की कमी नहीं रही। उन्होंने हिंदी सिनेमा की कई चर्चित फिल्मों में काम किया और अपने दौर के लोकप्रिय अभिनेताओं के साथ स्क्रीन साझा की।
उनके फिल्मी सफर में ‘जीवा’, ‘डांस डांस’, ‘प्यार करके देखो’, ‘कमांडो’, ‘जीते हैं शान से’ और ‘कहां है कानून’ जैसी फिल्मों का उल्लेख मिलता है। उन्होंने मिथुन चक्रवर्ती, गोविंदा, अनिल कपूर और दूसरे प्रमुख कलाकारों के साथ भी काम किया। उपलब्ध फिल्मी रिकॉर्ड के अनुसार 1996 में आई ‘जोरदार’ उनकी आखिरी फिल्मों में रही, जिसके बाद उन्होंने अभिनय से दूरी बना ली।
जब शोहरत के साथ विवाद भी जुड़ गया
मंदाकिनी के करियर की सबसे बड़ी विडंबना यही रही कि जिस फिल्म ने उन्हें देशभर में पहचान दी, उसके बाद उनका नाम लंबे समय तक उनके अभिनय से ज्यादा विवादों के संदर्भ में भी चर्चा में रहा।
दाऊद इब्राहिम के साथ तस्वीर ने इस चर्चा को और तेज कर दिया। हालांकि मंदाकिनी लगातार इस बात से इनकार करती रही हैं कि तस्वीर उनके बीच किसी निजी रिश्ते का प्रमाण थी। हालिया बातचीत में उन्होंने फिर कहा कि वह एक शो के सिलसिले में वहां गई थीं और मैच के दौरान तस्वीर खिंची थी।
यहां यह फर्क समझना जरूरी है कि किसी सार्वजनिक स्थान पर किसी व्यक्ति के साथ तस्वीर सामने आना और उस व्यक्ति के साथ निजी या आपराधिक संबंध साबित होना दो अलग बातें हैं। मंदाकिनी ने अपने हालिया बयान में इसी संदर्भ में अपनी स्थिति स्पष्ट की है।
वर्षों बाद भी उस तस्वीर का दर्द कायम
मंदाकिनी ने पुराने विवाद पर बात करते हुए जिस बात को सबसे ज्यादा रेखांकित किया, वह उनके करियर पर पड़ा असर है। उनके अनुसार अफवाहों का जवाब देने के बावजूद विवाद खत्म नहीं हुआ और इसका असर उनके काम पर पड़ा।
आज जब वह पीछे मुड़कर अपने फिल्मी सफर को देखती हैं तो ‘राम तेरी गंगा मैली’ की सफलता, लोकप्रियता और उसके बाद आए विवाद—तीनों उनकी कहानी का हिस्सा हैं। उनका कहना है कि उस समय अगर उनके पास पेशेवर टीम होती तो शायद ऐसी परिस्थितियों को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता था।
मंदाकिनी की कहानी सिर्फ एक पुरानी फिल्म अभिनेत्री और एक वायरल तस्वीर की कहानी नहीं है। यह उस दौर के फिल्म उद्योग, मीडिया की ताकत और सार्वजनिक जीवन में किसी एक तस्वीर के प्रभाव को समझने का भी एक उदाहरण है। एक तस्वीर कुछ सेकंड में खिंचती है, लेकिन उससे जुड़ी धारणा कई दशकों तक किसी व्यक्ति के साथ चल सकती है।
आज मंदाकिनी जब उस पुराने अध्याय पर बात करती हैं तो उनके शब्दों में ग्लैमर से ज्यादा एक ऐसे कलाकार का अनुभव दिखाई देता है, जिसने बेहद कम उम्र में शोहरत देखी, फिर विवाद का सामना किया और अंततः फिल्मी दुनिया से दूरी बना ली। उनके बयान का केंद्रीय संदेश यही है कि किसी सार्वजनिक तस्वीर को उसके पूरे संदर्भ से अलग करके देखने पर कहानी का अर्थ बदल सकता है।
‘राम तेरी गंगा मैली’ ने मंदाकिनी को रातों-रात स्टार बनाया था, लेकिन दाऊद इब्राहिम के साथ सामने आई तस्वीर से जुड़ा विवाद उनके करियर की कहानी का ऐसा अध्याय बन गया, जिसे वह आज भी याद करती हैं। वर्षों बाद उनकी सफाई ने उस पुराने घटनाक्रम पर फिर चर्चा जरूर छेड़ दी है, लेकिन तस्वीर के पीछे की परिस्थितियों को लेकर उनका पक्ष अब पहले से कहीं ज्यादा स्पष्ट है।


























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मंदाकिनी ने आध्यात्मिक मार्ग चुना और दलाई लामा की अनुयायी बन गईं। न्होंने तिब्बती योग का भी अभ्यास शुरू किया। बाद में, उनका विवाह पूर्व बौद्ध भिक्षु डॉ. काग्यूर टी. रिनपोचे ठाकुर से हुआ