बैग से निकले 10 कारतूस और फर्जी ID…” प्रेमी से मिलने जेल पहुंची किशोरी, गेट पर ही गई पकड़ी

गोण्डा मंडल कारागार में किशोरी के बैग की तलाशी लेते पुलिसकर्मी, 10 कारतूस और कथित फर्जी ID बरामद

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चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट

गोण्डा। उत्तर प्रदेश के गोण्डा जिले से मंडल कारागार की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक किशोरी जेल में निरुद्ध अपने प्रेमी से मुलाकात करने पहुंची थी, लेकिन मंडल कारागार के मुख्य गेट पर हुई तलाशी के दौरान उसके बैग से 10 कारतूस और एक कथित फर्जी आधार कार्ड बरामद हो गया। बैग से कारतूस निकलते ही जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। किशोरी से पूछताछ के बाद उसे नगर कोतवाली पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया।

मामला सामने आने के बाद पुलिस ने बरामद कारतूस, कथित फर्जी पहचान पत्र और उनके स्रोत की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती पूछताछ में सामने आए एक बयान ने मामले को और पेचीदा बना दिया है। जेल में निरुद्ध युवक के पिता ने पुलिस को बताया है कि बरामद कारतूस उनके लाइसेंसी रिवॉल्वर के हैं और उनकी बेटी उन्हें चोरी करके ले गई थी। अब पुलिस इस दावे की भी पड़ताल कर रही है।

प्रेमी से मिलने मंडल कारागार पहुंची थी किशोरी

जानकारी के मुताबिक, छेदीपुरवा निवासी हर्षु कश्यप एक किशोरी से जुड़े मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत मंडलीय कारागार में निरुद्ध है। शुक्रवार को किशोरी उससे मुलाकात करने के लिए जेल पहुंची थी। जेल में बंदी से मिलने के लिए पहुंचने वाले प्रत्येक व्यक्ति को सुरक्षा जांच की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।

किशोरी भी मंडल कारागार के मुख्य प्रवेश द्वार पर पहुंची, जहां सुरक्षा कर्मियों ने उसके साथ मौजूद बैग की तलाशी शुरू की। इसी दौरान बैग के भीतर कारतूस मिलने से सुरक्षा कर्मी भी सकते में आ गए। तलाशी को तत्काल गंभीरता से लेते हुए बैग से बरामद सामग्री को कब्जे में लिया गया और इसकी सूचना जेल अधिकारियों को दी गई।

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बैग खुलते ही सामने आया चौंकाने वाला सामान

मुख्य गेट पर तलाशी के दौरान किशोरी के बैग से 10 कारतूस बरामद किए गए। इसके अलावा उसके पास से एक ऐसा आधार कार्ड भी मिला, जिसे प्रारंभिक जांच में फर्जी बताया गया है।

एक ओर जहां जेल में कारतूस लेकर पहुंचना सुरक्षा की दृष्टि से बेहद गंभीर मामला माना गया, वहीं कथित फर्जी आधार कार्ड मिलने से जांच का दायरा और बढ़ गया। जेल प्रशासन ने किशोरी से बरामद सामान के बारे में पूछताछ की और पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी।

जेल प्रशासन की ओर से बताया गया कि घटना की गंभीरता को देखते हुए किशोरी को नगर कोतवाली पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया, ताकि बरामद कारतूस और पहचान पत्र के संबंध में विस्तृत जांच की जा सके।

जेल अधीक्षक ने की पूछताछ

मामले की जानकारी मिलते ही जेल अधीक्षक मृत्युंजय पांडे ने किशोरी से पूछताछ की। अधिकारियों ने यह जानने का प्रयास किया कि कारतूस उसके बैग में कैसे पहुंचे और वह उन्हें लेकर जेल में बंद युवक से मिलने क्यों पहुंची थी।

पूछताछ के बाद मामले को पुलिस के हवाले कर दिया गया। अब पुलिस किशोरी के बयान के साथ-साथ अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ कर रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बरामद कारतूस कहां से आए और कथित फर्जी आधार कार्ड किस उद्देश्य से तैयार अथवा इस्तेमाल किया गया।

बंदी के पिता ने बताया- लाइसेंसी रिवॉल्वर के हैं कारतूस

जांच के दौरान पुलिस को दिए बयान में जेल में निरुद्ध हर्षु कश्यप के पिता ने एक महत्वपूर्ण दावा किया। उन्होंने बताया कि किशोरी के बैग से बरामद कारतूस उनके लाइसेंसी रिवॉल्वर के हैं। उनका कहना है कि उनकी बेटी ने इन कारतूसों को चोरी कर लिया था।

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पुलिस अब इस बयान की सत्यता की जांच कर रही है। जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि संबंधित लाइसेंसी रिवॉल्वर किसके नाम पर है और उससे संबंधित कारतूसों का रिकॉर्ड क्या है। साथ ही बरामद कारतूस वास्तव में उसी लाइसेंसी हथियार के हैं या नहीं, इसकी भी पुष्टि की जाएगी।

यदि पुलिस की जांच में यह दावा सही पाया जाता है, तो यह सवाल भी महत्वपूर्ण होगा कि लाइसेंसी हथियार के कारतूस सुरक्षित स्थान से बाहर कैसे निकले और किशोरी के बैग तक कैसे पहुंचे।

फर्जी ID ने बढ़ाई पुलिस की चिंता

कारतूस के साथ कथित फर्जी आधार कार्ड की बरामदगी ने मामले को और गंभीर बना दिया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद आधार कार्ड किस नाम और पहचान से संबंधित है और उसे किस उद्देश्य से तैयार किया गया था।

जांच में यह भी देखा जाएगा कि क्या इस कथित फर्जी पहचान पत्र का इस्तेमाल जेल में मुलाकात की प्रक्रिया के दौरान किया जाना था या इसके पीछे कोई दूसरा उद्देश्य था। फिलहाल पुलिस इस संबंध में किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है और दस्तावेज की वास्तविकता की जांच की जा रही है।

गेट पर ही पकड़ी गई संदिग्ध सामग्री

इस घटना में मंडल कारागार की सुरक्षा जांच की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। किशोरी के बैग की तलाशी मुख्य गेट पर ही ली गई और वहीं से कारतूस बरामद हो गए। इससे जेल परिसर के भीतर किसी संभावित सुरक्षा जोखिम को समय रहते रोक लिया गया।

हालांकि, इस घटना ने यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि आखिर एक किशोरी इतनी संवेदनशील जगह पर 10 कारतूस और कथित फर्जी पहचान पत्र लेकर क्यों पहुंची थी। पुलिस जांच में इस सवाल का जवाब तलाशना अहम माना जा रहा है।

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युवक पहले से पॉक्सो एक्ट में निरुद्ध

मामले का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जिस युवक से मिलने के लिए किशोरी जेल पहुंची थी, वह स्वयं एक किशोरी से जुड़े मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत मंडलीय कारागार में निरुद्ध है।

इसी वजह से पुलिस पूरे घटनाक्रम को अलग-अलग पहलुओं से देख रही है। किशोरी और बंदी के बीच संबंध, जेल में मुलाकात का उद्देश्य, कारतूसों का स्रोत और कथित फर्जी आधार कार्ड की भूमिका—इन सभी बिंदुओं को जांच में शामिल किया जा रहा है।

कारतूसों के स्रोत से लेकर फर्जी ID तक जांच

पुलिस अब बरामद 10 कारतूसों को जांच के दायरे में लेकर उनके स्रोत का पता लगाने का प्रयास कर रही है। इसके साथ ही लाइसेंसी रिवॉल्वर से जुड़े दस्तावेजों और बंदी के पिता के बयान का भी सत्यापन किया जाएगा।

कथित फर्जी आधार कार्ड को लेकर भी पुलिस यह पता लगाएगी कि वह असली है या नकली और यदि नकली है तो उसे किसने तैयार किया। इसके पीछे किसी व्यक्ति या अन्य योजना की भूमिका है या नहीं, यह भी जांच के बाद स्पष्ट होगा।

फिलहाल किशोरी को नगर कोतवाली पुलिस के सुपुर्द किया जा चुका है और पूरे प्रकरण की जांच जारी है। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किशोरी के बैग में कारतूस और कथित फर्जी ID किस उद्देश्य से थी और इस मामले में आगे किन लोगों की भूमिका सामने आती है |

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Author: यायावर

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