संजय सिंह राणा की रिपोर्ट
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज होती जा रही है। इसी बीच आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद चंद्रशेखर आजाद ने पार्टी की चुनावी रणनीति को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ेगी। पार्टी किसी दूसरे दल के सहारे चुनाव मैदान में उतरने के बजाय संगठन को मजबूत करते हुए प्रदेश की प्रत्येक विधानसभा सीट पर अपनी राजनीतिक ताकत आजमाने की तैयारी कर रही है।
चंद्रशेखर आजाद ने लखनऊ में अपने संबोधन के दौरान कहा कि प्रदेश में आज भी बड़ी संख्या में लोगों को बेहतर शिक्षा, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं और पर्याप्त रोजगार के अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। उनका कहना है कि जनता के सामने मौजूद समस्याओं और अन्याय के मुद्दों को लेकर आजाद समाज पार्टी लगातार लोगों को जागरूक कर रही है। पार्टी का लक्ष्य प्रदेश में राजनीतिक बदलाव के लिए जनता को लामबंद करना है।
403 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी
आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने साफ कर दिया कि विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी किसी गठबंधन के भरोसे नहीं रहेगी। पार्टी उत्तर प्रदेश की सभी 403 सीटों पर प्रत्याशी उतारने की तैयारी करेगी। उनके इस ऐलान को प्रदेश की चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि पार्टी जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने और लोगों के बीच पहुंच बढ़ाने में जुटी है। उनका कहना है कि प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़े सवालों को लगातार उठाया जाना जरूरी है। इसके साथ ही सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों के अधिकारों को भी राजनीतिक एजेंडे के केंद्र में रखा जाएगा।
उन्होंने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से लोगों के बीच जाकर मौजूदा समस्याओं को समझने और उन्हें राजनीतिक मुद्दों से जोड़ने का आह्वान किया। आजाद के मुताबिक, जनता को यह तय करना होगा कि वह मौजूदा व्यवस्था को जारी रखना चाहती है या बदलाव के लिए नई राजनीतिक ताकत को अवसर देना चाहती है।
दलित, पिछड़ा और मुस्लिम समाज को बताया ‘असली गठबंधन’
संभावित चुनावी गठबंधन को लेकर पूछे गए सवाल पर चंद्रशेखर आजाद ने सामाजिक समीकरणों की अपनी परिभाषा सामने रखी। उन्होंने कहा कि दलित, पिछड़े और मुस्लिम समाज का मजबूत एकजुट होना ही वास्तविक गठबंधन है।
आजाद ने अपने बयान में पिछले विधानसभा चुनावों का राजनीतिक संदर्भ भी सामने रखा। उनका कहना था कि वर्ष 2017 में भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आई और उसके बाद से वह बहुमत के साथ सरकार में बनी हुई है। उनके अनुसार, विपक्षी दल 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा को सत्ता से बाहर करने में सफल नहीं रहे।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि केवल चुनावी दलों के बीच समझौते से सत्ता परिवर्तन संभव नहीं है। इसके लिए सामाजिक स्तर पर व्यापक एकजुटता और मजबूत जनाधार जरूरी है। इसी आधार पर आजाद समाज पार्टी दलित, पिछड़े और मुस्लिम समाज के बीच राजनीतिक एकता को महत्वपूर्ण मान रही है।
महिला आरक्षण में दलित-ओबीसी महिलाओं के प्रतिनिधित्व की मांग
महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर भी चंद्रशेखर आजाद ने पार्टी का रुख स्पष्ट किया। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के महिला आरक्षण कानून और परिसीमन से जुड़े बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक वर्ष 2023 में ही संसद से पारित होकर कानून का रूप ले चुका है।
आजाद ने कहा कि उनकी पार्टी ने महिला आरक्षण का विरोध नहीं किया था, बल्कि इसमें दलित, पिछड़े, मुस्लिम और आदिवासी समुदायों की महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व देने के लिए संशोधन की मांग की थी। उनका तर्क है कि यदि महिला आरक्षण व्यवस्था लागू होती है तो समाज के विभिन्न वंचित वर्गों की महिलाओं की भागीदारी भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
परिसीमन के सवाल पर उन्होंने इसे संवैधानिक और जटिल विषय बताते हुए कहा कि उचित समय आने पर इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इस बयान के जरिए उन्होंने पार्टी की सामाजिक प्रतिनिधित्व संबंधी प्राथमिकताओं को भी रेखांकित किया।
मंडल आयोग की 38 सिफारिशें लागू करने की मांग
आजाद समाज पार्टी ने सामाजिक न्याय के मुद्दे को आगे बढ़ाने के लिए मंडल जागरूकता आंदोलन भी शुरू किया है। चंद्रशेखर आजाद के अनुसार यह आंदोलन केवल राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पिछड़े और अति पिछड़े वर्गों के बीच अधिकारों एवं सामाजिक न्याय को लेकर जागरूकता पैदा करने का अभियान है।
उन्होंने मंडल आयोग की सिफारिशों का उल्लेख करते हुए कहा कि 7 अगस्त 1990 को तत्कालीन प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह द्वारा घोषित 40 सिफारिशों में से पार्टी के अनुसार केवल दो सिफारिशें लागू हुईं, जबकि 38 सिफारिशें अभी भी लंबित हैं।
आजाद समाज पार्टी का कहना है कि जब तक इन लंबित सिफारिशों को लागू नहीं किया जाता, तब तक पिछड़े और अति पिछड़े समुदायों को सामाजिक सम्मान, गरिमापूर्ण जीवन और समान अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य अधूरा रहेगा।
इसी मांग को लेकर पार्टी की ओर से मंडल जागरूकता आंदोलन के तहत विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन और जनजागरूकता कार्यक्रम किए जा रहे हैं। पार्टी इसे सामाजिक न्याय की लड़ाई से जोड़कर देख रही है।
सामाजिक न्याय और रोजगार को बनाया चुनावी मुद्दा
चंद्रशेखर आजाद के बयानों से यह संकेत मिलता है कि आगामी विधानसभा चुनाव में आजाद समाज पार्टी सामाजिक न्याय, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, प्रतिनिधित्व और पिछड़े वर्गों के अधिकारों को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में है।
पार्टी की रणनीति में मंडल आयोग की लंबित सिफारिशों का मुद्दा भी अहम दिखाई दे रहा है। इसके अलावा दलित, ओबीसी, मुस्लिम और आदिवासी समुदायों की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की मांग को भी पार्टी अपने अभियान का हिस्सा बना रही है।
चंद्रशेखर आजाद का कहना है कि प्रदेश में बदलाव तभी संभव है जब जनता अपने अधिकारों और समस्याओं को लेकर जागरूक हो। यही वजह है कि पार्टी चुनावी तैयारी के साथ-साथ जनजागरूकता अभियान को भी आगे बढ़ा रही है।
यूपी की राजनीति में बढ़ सकती है हलचल
उत्तर प्रदेश देश की सबसे अधिक विधानसभा सीटों वाला राज्य है और यहां 403 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किसी भी राजनीतिक दल के लिए बड़ी संगठनात्मक चुनौती माना जाता है। आजाद समाज पार्टी के सामने अब अपने संगठन का विस्तार करने, मजबूत प्रत्याशियों की तलाश करने और प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में प्रभावी चुनावी नेटवर्क तैयार करने की चुनौती होगी।
हालांकि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने साफ कर दिया है कि वह गठबंधन की राजनीति के बजाय स्वतंत्र रूप से चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। इससे आने वाले समय में प्रदेश का राजनीतिक समीकरण और अधिक दिलचस्प हो सकता है।
लखनऊ में चंद्रशेखर आजाद के इन बयानों ने उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में नई चर्चा को जन्म दिया है। खासतौर पर सभी 403 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा और दलित-पिछड़ा-मुस्लिम सामाजिक गठजोड़ पर जोर को पार्टी की आगामी रणनीति का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
अब देखना यह होगा कि आजाद समाज पार्टी अपने इस स्वतंत्र चुनावी अभियान को किस तरह जमीनी संगठन में बदलती है और विधानसभा चुनाव के दौरान उसका प्रभाव किन क्षेत्रों में दिखाई देता है। फिलहाल चंद्रशेखर आजाद ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में व्यापक राजनीतिक विस्तार की तैयारी कर रही है और सामाजिक न्याय के मुद्दों को लेकर सीधे जनता के बीच जाने का रास्ता चुना है।

























