बारबंकी

“रक्षक ही सवालों के घेरे में क्यों?” ; नाबालिग मामले में पुलिसकर्मी पर गंभीर आरोप, क्या वर्दी की आड़ में हुआ खेल?

नाबालिग के अपहरण और कथित जबरन धर्मांतरण के आरोप में आठ के खिलाफ मुकदमा, तीन हिरासत में

अनुराग गुप्ता की रिपोर्ट

बाराबंकी जिले के फतेहपुर कोतवाली क्षेत्र में एक नाबालिग लड़की के कथित अपहरण, यौन उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन कराने के आरोपों ने पुलिस महकमे में हलचल पैदा कर दी है। मामले में पीड़िता की मां की शिकायत पर पुलिस ने चार नामजद आरोपियों समेत कुल आठ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी गई है और तीन संदिग्ध आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, पीड़िता का बयान दर्ज कराया जा रहा है। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की सत्यता की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

पति की मौत के बाद बेटी के साथ रह रही थी महिला

शिकायतकर्ता महिला के पति की मृत्यु हो चुकी है और वह अपनी नाबालिग बेटी के साथ रहती है। महिला ने पुलिस को दी गई तहरीर में आरोप लगाया है कि वर्ष 2024 में फतेहपुर कोतवाली में तैनात रहे एक कांस्टेबल आसिफ ने उसकी नाबालिग बेटी से संपर्क स्थापित किया था।

महिला के मुताबिक, कांस्टेबल पर उसकी बेटी के साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न का प्रयास करने का आरोप है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि बाद में आरोपी ने कथित तौर पर फोन के माध्यम से लड़की पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालना शुरू किया।

पुलिस के अनुसार, शिकायत में आर्थिक रूप से कमजोर स्थिति का लाभ उठाने और रुपये का लालच देकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करने के भी आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन सभी आरोपों की पुलिस द्वारा जांच की जा रही है और फिलहाल इन्हें शिकायत में लगाए गए आरोपों के रूप में ही देखा जा रहा है।

सऊदी अरब में रहने वाले व्यक्ति से संपर्क कराने का आरोप

पीड़िता की मां ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि कांस्टेबल आसिफ ने कथित तौर पर फतेहपुर कोतवाली क्षेत्र के बसारा गांव निवासी जावेद से उसकी बेटी की बात कराई थी। शिकायत के मुताबिक उस समय जावेद सऊदी अरब में रह रहा था।

बताया गया है कि जावेद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के माध्यम से नाबालिग से संपर्क स्थापित किया। आरोप है कि बातचीत के दौरान उस पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाया गया। शिकायतकर्ता के अनुसार, लड़की ने कथित तौर पर इसका विरोध किया, लेकिन इसके बावजूद उस पर दबाव बनाए जाने का सिलसिला जारी रहा।

पुलिस अब इस पूरे संपर्क क्रम की जांच कर रही है। इसमें मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट, कॉल डिटेल और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच में यदि डिजिटल माध्यम से लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है तो पुलिस उसके आधार पर भी आगे की कार्रवाई कर सकती है।

दो जनवरी को लड़की को साथ ले जाने का आरोप

शिकायत के अनुसार, जावेद सऊदी अरब से वापस आने के बाद दो जनवरी 2026 को कथित तौर पर नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। पीड़िता की मां ने इस दौरान उसके साथ कथित यौन उत्पीड़न किए जाने का भी आरोप लगाया है।

मामले की संवेदनशीलता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि शिकायत में पीड़िता की उम्र नाबालिग बताई गई है। ऐसे मामलों में पुलिस के लिए पीड़िता की सुरक्षा, बयान और मेडिकल तथा अन्य साक्ष्यों का संरक्षण महत्वपूर्ण होता है। पुलिस का कहना है कि पीड़िता का बयान दर्ज कराया जा रहा है और जांच के दौरान सामने आने वाले प्रत्येक तथ्य की पड़ताल की जाएगी।

मजार पर ले जाकर निकाह कराने का आरोप

शिकायत में एक अन्य गंभीर आरोप यह लगाया गया है कि कुछ दिन पहले जावेद अपने बहनोई रेहान और हमजा के साथ कथित तौर पर लड़की को मसौली बाजार स्थित एक मजार पर ले गया।

पीड़िता की मां के आरोप के मुताबिक, वहां एक मौलाना की मौजूदगी में सात-आठ अन्य लोग भी मौजूद थे। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इसी दौरान नाबालिग लड़की का कथित तौर पर जबरन जावेद के साथ निकाह करा दिया गया।

पुलिस इस दावे की भी जांच कर रही है कि मजार पर वास्तव में क्या हुआ, वहां कौन-कौन लोग मौजूद थे और निकाह की प्रक्रिया किस परिस्थिति में कराई गई। जांच एजेंसियां संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ कर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही हैं।

चार नामजद समेत आठ लोगों पर प्राथमिकी

फतेहपुर थाना प्रभारी अमित प्रताप सिंह के मुताबिक, लड़की की मां की तहरीर के आधार पर चार नामजद और आठ अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले में तीन आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

थाना प्रभारी ने कहा कि मामले की विवेचना जारी है। पुलिस शिकायत में लगाए गए प्रत्येक आरोप की सत्यता की पुष्टि करने के बाद ही आगे की कार्रवाई करेगी। इसका मतलब है कि प्राथमिकी में दर्ज आरोपों को अभी अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में उपलब्ध साक्ष्यों, पीड़िता के बयान और अन्य संबंधित तथ्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जाएगी। आरोपियों से पूछताछ के अलावा पुलिस उन परिस्थितियों की भी पड़ताल कर रही है जिनमें नाबालिग लड़की कथित तौर पर आरोपियों के संपर्क में आई।

पुलिस की जांच में सामने आएगा पूरा घटनाक्रम

अपर पुलिस अधीक्षक विकास चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है और पीड़िता का बयान दर्ज कराया जा रहा है।

पुलिस जांच का केंद्र अब घटनाक्रम की पूरी कड़ी को स्पष्ट करना है—नाबालिग से कथित रूप से संपर्क कैसे स्थापित हुआ, उसके बाद किन लोगों से बातचीत हुई, लड़की को कथित तौर पर अपने साथ कैसे ले जाया गया और मजार पर कथित निकाह किन परिस्थितियों में कराया गया।

इसके साथ ही पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि शिकायत में नामजद और अज्ञात बताए गए लोगों की भूमिका क्या रही। यदि जांच में किसी व्यक्ति की संलिप्तता के पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।

नाबालिग से जुड़े मामलों में साक्ष्य की अहम भूमिका

कानूनी दृष्टि से नाबालिग से जुड़े मामलों में पीड़िता की उम्र, उसके बयान, मेडिकल साक्ष्य, डिजिटल संवाद और घटनास्थल से संबंधित प्रमाण महत्वपूर्ण हो सकते हैं। ऐसे मामलों में पुलिस के सामने एक ओर आरोपों की निष्पक्ष जांच की जिम्मेदारी होती है तो दूसरी ओर नाबालिग की पहचान और गरिमा की रक्षा करना भी जरूरी होता है।

इस मामले में भी पुलिस द्वारा पीड़िता के बयान को जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। साथ ही सोशल मीडिया संपर्क और फोन पर हुई बातचीत से संबंधित तथ्यों की भी पड़ताल किए जाने की बात सामने आई है।

आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद

फतेहपुर कोतवाली क्षेत्र का यह मामला कई गंभीर आरोपों से जुड़ा है। इसमें नाबालिग को कथित तौर पर बहला-फुसलाकर ले जाने, यौन उत्पीड़न, धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने और कथित रूप से जबरन निकाह कराने जैसे आरोप शामिल हैं।

हालांकि पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, इसलिए इस स्तर पर किसी भी आरोपी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। पुलिस अधिकारियों ने भी कहा है कि आरोपों की सत्यता की पुष्टि जांच के बाद ही की जाएगी।

फिलहाल तीन संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है और पीड़िता का बयान दर्ज कराया जा रहा है। पुलिस की जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में से किन-किन की पुष्टि साक्ष्यों के आधार पर होती है और मामले में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की वास्तविक भूमिका क्या रही।

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