सेवा, साधना और शिक्षा की विरासत को नमन, योगीराज बंगाली बाबा की 21वीं पुण्यतिथि पर उमड़ा श्रद्धा-सैलाब
इरफान अली लारी की रिपोर्ट
सलेमपुर। ब्रह्मलीन योगीराज श्री बंगाली बाबा की 21वीं पुण्यतिथि श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक सेवा के संदेश के साथ धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर उनके समाधि स्थल पर श्रद्धालुओं, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और क्षेत्रीय नागरिकों ने पहुंचकर पुष्प अर्पित किए और योगीराज के आध्यात्मिक एवं सामाजिक योगदान को स्मरण किया। पुण्यतिथि समारोह के दौरान आयोजित श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि बंगाली बाबा का जीवन सादगी, उच्च विचार, धर्मनिष्ठा और जरूरतमंदों की सेवा के लिए समर्पित रहा।
समारोह में दिनभर श्रद्धालुओं का आवागमन बना रहा। समाधि स्थल पर विधि-विधान से श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद आयोजित सभा में वक्ताओं ने योगीराज श्री बंगाली बाबा के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने जिस दौर में क्षेत्र को धार्मिक और शैक्षणिक जागरूकता की आवश्यकता थी, उस समय समाज के बीच रहकर लोगों को सही दिशा देने का कार्य किया। उनके प्रयासों से धार्मिक चेतना के साथ शिक्षा और सामाजिक सरोकारों को भी मजबूती मिली।
सादगी और उच्च विचारों का रहा पूरा जीवन
श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि योगीराज श्री बंगाली बाबा का जीवन अत्यंत सादा रहा, लेकिन उनके विचार व्यापक और ऊंचे थे। उन्होंने व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं से दूर रहकर अपना जीवन समाज के लिए समर्पित किया। धर्म के प्रति उनकी आस्था केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं थी, बल्कि उन्होंने इसे मानव सेवा से जोड़कर देखा।
वक्ताओं के अनुसार, बाबा ने गरीबों, असहायों और दीन-दुखियों की सेवा को अपने जीवन का महत्वपूर्ण उद्देश्य बनाया। उनका मानना था कि समाज में वास्तविक परिवर्तन तभी संभव है, जब जरूरतमंद व्यक्ति तक सहायता और शिक्षा पहुंचे। यही कारण है कि आज भी क्षेत्र के लोग उन्हें केवल धार्मिक व्यक्तित्व के रूप में नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाले प्रेरणास्रोत के रूप में याद करते हैं।
पिछड़े क्षेत्र में शिक्षा और धर्म की जगाई अलख
सभा में वक्ताओं ने योगीराज बंगाली बाबा के शैक्षणिक और धार्मिक प्रयासों को विशेष रूप से याद किया। उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र में कभी शिक्षा के पर्याप्त साधन और जागरूकता का अभाव था, वहां बाबा ने लोगों को शिक्षा के महत्व से परिचित कराने के साथ धर्म और संस्कारों की ओर भी प्रेरित किया।
वक्ताओं ने कहा कि बाबा के कार्यों का मूल्यांकन केवल उनके जीवनकाल तक सीमित करके नहीं किया जा सकता। उनके द्वारा छोड़ी गई सामाजिक और आध्यात्मिक विरासत आज भी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने जिन मूल्यों को अपने आचरण में उतारा, उनमें सादगी, सेवा, करुणा, अनुशासन और समाज के कमजोर वर्ग के प्रति संवेदनशीलता प्रमुख थी।
सभा में यह भी कहा गया कि योगीराज के व्यक्तित्व और कृतित्व पर जितना भी प्रकाश डाला जाए, वह कम होगा। उनके जीवन की सार्थकता इस बात में दिखाई देती है कि उनके जाने के वर्षों बाद भी बड़ी संख्या में लोग उनकी पुण्यतिथि पर एकत्र होकर उन्हें श्रद्धापूर्वक याद करते हैं।
समाज को सही दिशा देने वाले महामानव थे बंगाली बाबा
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने योगीराज श्री बंगाली बाबा को महामानव बताते हुए कहा कि उन्होंने अपना जीवन समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की चिंता में लगाया। उनके लिए धर्म का अर्थ मानवता और सेवा से जुड़ा हुआ था।
वक्ताओं ने कहा कि बाबा ने अपने जीवन से जो आदर्श स्थापित किए, वे आज भी प्रासंगिक हैं। वर्तमान समय में जब समाज अनेक तरह की चुनौतियों से गुजर रहा है, तब उनके बताए सेवा, सद्भाव और नैतिकता के मार्ग पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
उन्होंने कहा कि बंगाली बाबा के पदचिह्नों पर चलकर नई पीढ़ी को समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को समझने की प्रेरणा मिल सकती है। उनके जीवन का सबसे बड़ा संदेश यही था कि व्यक्ति की पहचान केवल उसके निजी जीवन से नहीं, बल्कि समाज के लिए किए गए उसके कार्यों से बनती है।
जनप्रतिनिधियों और सामाजिक क्षेत्र के लोगों ने दी श्रद्धांजलि
योगीराज श्री बंगाली बाबा की 21वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े जनप्रतिनिधियों और सामाजिक क्षेत्र के लोगों ने भी सहभागिता की। कार्यक्रम में भाटपार रानी के विधायक सभाकुंवर कुशवाहा, जयंत कुशवाहा गुड्डन, भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह, कांग्रेस नेता पंडित अखिलेश मिश्रा सहित अश्विनी सिंह, अमरेश सिंह बबलू, निर्मला गौतम, हिमांशु मिश्रा, संदीप कुमार, सोनू भारती समेत अनेक लोग मौजूद रहे।
समारोह में उपस्थित लोगों ने समाधि स्थल पर पुष्प अर्पित कर योगीराज को नमन किया। इसके बाद श्रद्धांजलि सभा में उनके सामाजिक, धार्मिक और शैक्षणिक योगदान को याद किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं की भागीदारी रही।
पुण्यतिथि समारोह के बाद हुआ भंडारा
पुण्यतिथि समारोह के दौरान श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का भी आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में क्षेत्रीय लोगों और दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। भंडारे के दौरान आयोजन स्थल पर श्रद्धा और सेवा का वातावरण दिखाई दिया।
आयोजकों और स्थानीय लोगों ने श्रद्धालुओं की सुविधा को लेकर व्यवस्थाएं संभालीं। पूरे कार्यक्रम के दौरान लोगों में योगीराज श्री बंगाली बाबा के प्रति आस्था और सम्मान का भाव दिखाई दिया।
महंत जगन्नाथ महाराज ने जताया आभार
कार्यक्रम के समापन पर मंदिर के पीठाधीश्वर महंत जगन्नाथ महाराज ने समारोह में पहुंचे सभी श्रद्धालुओं, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और क्षेत्रीय नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बाबा की पुण्यतिथि पर बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता उनके प्रति समाज में कायम श्रद्धा और सम्मान को दर्शाती है।
महंत जगन्नाथ महाराज ने बाबा के सेवा और साधना के मार्ग को आगे बढ़ाने का आह्वान करते हुए कहा कि उनके आदर्शों को केवल स्मरण करने के बजाय उन्हें अपने व्यवहार और सामाजिक जीवन में उतारना ही उनके प्रति वास्तविक श्रद्धांजलि होगी।
सुरक्षा व्यवस्था में पुलिस बल रहा तैनात
पुण्यतिथि समारोह और भंडारे में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई। कार्यक्रम स्थल पर कोतवाल विनोद सिंह पुलिस बल के साथ मौजूद रहे। पुलिस टीम ने आयोजन के दौरान व्यवस्था बनाए रखने और श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुचारु रखने में सहयोग किया।
समारोह शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। 21वीं पुण्यतिथि पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने यह स्पष्ट किया कि योगीराज श्री बंगाली बाबा की स्मृतियां आज भी क्षेत्र के लोगों के मन में जीवंत हैं। उनके द्वारा धर्म, शिक्षा, सेवा और समाज के कमजोर वर्गों के लिए किए गए कार्य आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरणा देते रहेंगे।











