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सुरक्षित विद्यालय, सशक्त भविष्य : 1.40 लाख स्कूलों के सुरक्षा ऑडिट की तैयारी तेज

बस्ती में तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण में फील्ड ऑडिटर और डिजास्टर एक्सपर्ट्स को दी गई तकनीकी ट्रेनिंग, स्कूलों में जोखिमों की पहचान से लेकर मोबाइल एप पर रिपोर्टिंग तक सिखाई गई प्रक्रिया

सर्वेश द्विवेदी की रिपोर्ट

बस्ती। उत्तर प्रदेश में सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों को अधिक सुरक्षित, जोखिममुक्त और आपदा के समय बेहतर ढंग से प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाने की दिशा में एक बड़े अभियान की शुरुआत हो गई है। प्रदेश के लगभग 1.40 लाख सरकारी एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों का School Safety & Risk Assessment किया जाना है। इसी व्यापक योजना को धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए बस्ती में फील्ड ऑडिटर और डिजास्टर एक्सपर्ट्स का तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया।

यह प्रशिक्षण School Safety and Risk Assessment Project के तहत आयोजित किया गया, जिसमें चयनित संस्था Bennett, Coleman & Co. Ltd. की ओर से विशेषज्ञों को विद्यालय सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल विद्यालय भवन की स्थिति का निरीक्षण करना नहीं, बल्कि स्कूल परिसर में मौजूद संभावित जोखिमों की पहचान, सुरक्षा व्यवस्था का मूल्यांकन, आपदा की स्थिति में तैयारियों की समीक्षा और आवश्यक सुधारों को वैज्ञानिक तरीके से दर्ज करना है।

1.40 लाख विद्यालयों का होगा सुरक्षा एवं जोखिम आकलन

उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में लाखों विद्यार्थी प्रतिदिन विद्यालयों में शिक्षा ग्रहण करते हैं। ऐसे में विद्यालयों की संरचनात्मक और गैर-संरचनात्मक सुरक्षा के साथ-साथ अग्नि सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, निकासी व्यवस्था तथा अन्य संभावित जोखिमों का नियमित आकलन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के लगभग 1.40 लाख सरकारी एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों का School Safety & Risk Assessment कराया जाएगा। इस प्रक्रिया के माध्यम से विद्यालयों में मौजूद संभावित खतरों को चिन्हित करने, सुरक्षा संबंधी कमियों को सामने लाने और सुधार के लिए आवश्यक कदम तय करने में मदद मिलेगी।

परियोजना का व्यापक उद्देश्य विद्यालयों को केवल शिक्षण संस्थान के रूप में नहीं, बल्कि विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए सुरक्षित एवं आपदा-प्रतिरोधी परिसर के रूप में विकसित करना है।

22 से 24 जुलाई तक चला फील्ड ऑडिटर का प्रशिक्षण

बस्ती स्थित प्रशिक्षण केंद्र में 22 जुलाई से 24 जुलाई तक तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें गोरखपुर, देवरिया, संत कबीर नगर सहित कुल 11 जनपदों से आए फील्ड ऑडिटर और डिजास्टर एक्सपर्ट्स ने भाग लिया।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को विद्यालय सुरक्षा ऑडिट की पूरी कार्यप्रणाली से परिचित कराया गया। उन्हें बताया गया कि फील्ड में विद्यालय का निरीक्षण करते समय किन-किन बिंदुओं को प्राथमिकता दी जानी है और किस तरह प्राप्त सूचनाओं को निर्धारित मानकों के अनुरूप दर्ज किया जाना है।

प्रशिक्षण में नॉन-स्ट्रक्चरल सेफ्टी असेसमेंट, संभावित आपदा जोखिमों की पहचान, विद्यालय सुरक्षा चेकलिस्ट के अनुसार निरीक्षण, साक्ष्य एकत्र करने तथा रिपोर्टिंग की प्रक्रिया पर विशेष जोर दिया गया।

मोबाइल एप से होगी ऑडिट प्रक्रिया की निगरानी

इस पूरी परियोजना में तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। फील्ड ऑडिट के दौरान प्राप्त जानकारियों को मोबाइल एप के माध्यम से दर्ज किया जाएगा। प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को एप आधारित डेटा संग्रहण और रिपोर्टिंग की प्रक्रिया का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया।

विद्यालय निरीक्षण के दौरान जरूरी साक्ष्यों को मोबाइल एप के माध्यम से अपलोड करने, निर्धारित प्रारूप में जानकारी दर्ज करने और ऑडिट रिपोर्ट तैयार करने के तरीके भी समझाए गए।

इस व्यवस्था से विद्यालय सुरक्षा ऑडिट के दौरान जुटाई गई सूचनाओं को व्यवस्थित तरीके से संकलित करने में मदद मिलेगी। साथ ही रिपोर्टिंग प्रक्रिया में एकरूपता और पारदर्शिता बनाए रखने में भी तकनीकी माध्यम उपयोगी साबित हो सकता है।

Fire Safety Expert और Civil Engineer को भी मिलेगा प्रशिक्षण

फील्ड ऑडिटर और डिजास्टर एक्सपर्ट्स के प्रशिक्षण के बाद परियोजना के अगले चरण में अन्य विशेषज्ञों को भी प्रशिक्षित किया जाएगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 25 से 27 जुलाई तक Fire Safety Expert के लिए तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा।

इसके बाद 28 से 30 जुलाई तक Civil Engineer के लिए तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम होगा। इस तरह विद्यालय सुरक्षा आकलन के लिए अलग-अलग विशेषज्ञताओं से जुड़े प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार किए जाएंगे।

प्रशिक्षण पूरा होने के बाद Field Auditor/Disaster Expert, Fire Safety Expert और Civil Engineer की संयुक्त विशेषज्ञ टीमें विद्यालयों में जाकर सुरक्षा एवं जोखिम आकलन का कार्य करेंगी।

केवल भवन नहीं, पूरे स्कूल परिसर की सुरक्षा पर नजर

विद्यालय सुरक्षा ऑडिट का दायरा केवल भवन की बाहरी या आंतरिक स्थिति तक सीमित नहीं रहेगा। इसका उद्देश्य विद्यालय परिसर में मौजूद विभिन्न प्रकार के संभावित जोखिमों को समग्र रूप से समझना है।

ऑडिट के दौरान विद्यालय सुरक्षा चेकलिस्ट के अनुरूप जरूरी बिंदुओं का परीक्षण किया जाएगा। इसमें गैर-संरचनात्मक सुरक्षा से जुड़े पहलुओं के साथ आपदा की स्थिति में विद्यालय की तैयारियों, संभावित जोखिमों की पहचान और उपलब्ध सुरक्षा व्यवस्थाओं का मूल्यांकन महत्वपूर्ण होगा।

इस प्रकार तैयार होने वाली रिपोर्ट विद्यालय स्तर पर मौजूद सुरक्षा संबंधी कमियों को चिन्हित करने और भविष्य में आवश्यक सुधार की दिशा तय करने में उपयोगी हो सकती है।

विशेषज्ञों ने गुणवत्ता और मानकों के पालन पर दिया जोर

प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रोजेक्ट मैनेजर एवं सब्जेक्ट मैटर एक्सपर्ट सौरभ सिंह, जोनल प्रोजेक्ट मैनेजर शिवम शुक्ला, केंद्र प्रबंधक पंकज मिश्रा तथा जिला परियोजना प्रबंधक अविनाश कुमार द्विवेदी उपस्थित रहे।

विशेषज्ञों और परियोजना से जुड़े अधिकारियों ने प्रशिक्षणार्थियों को विद्यालय सुरक्षा ऑडिट के उद्देश्यों और निर्धारित कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने ऑडिट के दौरान गुणवत्ता मानकों का पालन करने तथा प्रत्येक निरीक्षण को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पूरा करने पर जोर दिया।

प्रतिभागियों को मोबाइल एप आधारित ऑडिट प्रक्रिया के विभिन्न चरणों की जानकारी देने के साथ यह भी समझाया गया कि फील्ड में जुटाए गए आंकड़ों और साक्ष्यों की गुणवत्ता किसी भी सुरक्षा आकलन की विश्वसनीयता के लिए महत्वपूर्ण है।

अधिकारियों ने प्रतिभागियों से कहा कि प्रशिक्षण के दौरान हासिल तकनीकी ज्ञान को फील्ड में लागू करते समय निर्धारित मानकों का पूरी तरह पालन किया जाए। विद्यालयों का निरीक्षण निष्पक्ष, व्यवस्थित और गुणवत्तापूर्ण तरीके से किया जाए, ताकि तैयार होने वाली रिपोर्ट वास्तविक स्थिति को प्रभावी ढंग से सामने रख सके।

सुरक्षित स्कूलों के लिए अहम साबित हो सकता है अभियान

विद्यालयों में दुर्घटनाओं और आपदाओं से जुड़े जोखिमों को पूरी तरह समाप्त करना संभव भले न हो, लेकिन समय रहते जोखिमों की पहचान और तैयारी के माध्यम से उनके प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसी दृष्टि से प्रदेश के लगभग 1.40 लाख विद्यालयों का सुरक्षा एवं जोखिम आकलन व्यापक महत्व रखता है।

इस परियोजना के जरिए विद्यालयों में संभावित जोखिमों की पहचान के साथ सुरक्षा मानकों को मजबूत करने और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को बेहतर बनाने की दिशा में ठोस जानकारी जुटाई जा सकेगी।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विद्यालय सुरक्षा का सीधा संबंध विद्यार्थियों की सुरक्षा से है। सुरक्षित भवन, व्यवस्थित परिसर, बेहतर आपदा तैयारी और जोखिमों की समय रहते पहचान विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित शिक्षण वातावरण तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

लाखों विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़ा है अभियान

उत्तर प्रदेश में इतने बड़े पैमाने पर विद्यालय सुरक्षा और जोखिम आकलन की प्रक्रिया को केवल प्रशासनिक कवायद के तौर पर नहीं देखा जा सकता। इसका सीधा संबंध प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों, शिक्षकों और विद्यालयों से जुड़े कर्मचारियों की सुरक्षा से है।

यदि ऑडिट के दौरान सामने आने वाली कमियों पर समयबद्ध तरीके से सुधारात्मक कार्रवाई की जाती है, तो यह अभियान विद्यालयों को अधिक सुरक्षित और आपदा-सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

बस्ती में शुरू हुआ प्रशिक्षण इसी बड़े अभियान की प्रारंभिक कड़ी है। अलग-अलग विशेषज्ञों को प्रशिक्षित करने के बाद जब संयुक्त टीमें विद्यालयों में पहुंचेंगी, तब सुरक्षा आकलन की प्रक्रिया को व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा।

कुल मिलाकर, School Safety & Risk Assessment Project उत्तर प्रदेश के विद्यालयों में सुरक्षा संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। यदि ऑडिट से प्राप्त निष्कर्षों को गंभीरता से लेकर आवश्यक सुधार लागू किए जाते हैं, तो इसका सबसे बड़ा लाभ विद्यार्थियों को मिलेगा और विद्यालयों में सुरक्षित, संरक्षित तथा आपदा-सक्षम शिक्षण वातावरण विकसित करने की दिशा में ठोस प्रगति संभव होगी।

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