धन और इलाज का लालच देकर धर्मांतरण कराने वाले अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश, तमिलनाडु के पास्टर दंपति समेत 7 गिरफ्तार
लखनऊ: अवैध धर्मांतरण के आरोप में सात लोगों की गिरफ्तारी
सर्वेश यादव की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश में अवैध धर्मांतरण के मामलों के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच राजधानी लखनऊ से एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया है। मोहनलालगंज थाना क्षेत्र में पुलिस ने ऐसे कथित अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा करने का दावा किया है, जो ग्रामीणों को विभिन्न प्रकार के लालच और प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करता था। इस मामले में तमिलनाडु के एक पास्टर दंपति सहित कुल सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किए गए आरोपियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है। मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हुई है।
शिकायत के आधार पर शुरू हुई पुलिस कार्रवाई
इस पूरे मामले की शुरुआत मोहनलालगंज क्षेत्र के भरसवा गांव निवासी अमित कुमार द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से हुई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि गांव में कुछ लोग लगातार ग्रामीणों को चर्च आने के लिए प्रेरित कर रहे थे और उन पर ईसाई धर्म स्वीकार करने का दबाव बनाया जा रहा था।
शिकायत में जिन लोगों के नाम शामिल किए गए, उनमें चंद्रभान, उसकी पत्नी आरती, सीमा, डेनियल, उसकी पत्नी सुबला, अजय रावत और उसकी पत्नी शीला शामिल हैं। शिकायतकर्ता का आरोप था कि ये सभी मिलकर गांव के लोगों को विभिन्न प्रकार के प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन के लिए तैयार करने का प्रयास कर रहे थे।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में मिले तथ्यों के आधार पर पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
संतान, इलाज और आर्थिक सहायता का दिया जाता था प्रलोभन
पुलिस के अनुसार जांच के दौरान यह बात सामने आई कि आरोपी ग्रामीणों को संतान प्राप्ति, गंभीर बीमारियों के उपचार, आर्थिक सहायता और अन्य सामाजिक जरूरतों में मदद का भरोसा देकर अपने प्रभाव में लेने की कोशिश करते थे।
आरोप है कि आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों को विशेष रूप से निशाना बनाया जाता था। उन्हें यह विश्वास दिलाया जाता था कि धर्म परिवर्तन करने के बाद उनकी समस्याओं का समाधान हो जाएगा। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि जो लोग इन बातों का विरोध करते थे, उन्हें धमकियां देने का भी प्रयास किया जाता था।
हालांकि इन सभी आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और आगे की जांच के बाद ही हो सकेगी।
रात के समय गांवों में पहुंचता था कथित नेटवर्क
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी अक्सर रात के समय चारपहिया वाहन से गांवों में पहुंचते थे। वहां लोगों से संपर्क स्थापित कर उन्हें आर्थिक सहयोग, इलाज में मदद और शादी-विवाह जैसे अवसरों पर सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया जाता था।
पुलिस का मानना है कि इस तरीके से ग्रामीणों का विश्वास जीतकर उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जाता था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि यह नेटवर्क किन-किन जिलों तक सक्रिय था और कितने लोगों तक इसकी पहुंच बनी हुई थी।
मुख्य आरोपी ने पूछताछ में किए कई दावे
पुलिस के मुताबिक पूछताछ के दौरान मुख्य आरोपी डेनियल ने कई महत्वपूर्ण दावे किए हैं। उसका कहना है कि उसका मूल नाम बाला सुब्रह्मण्यम है और विवाह के बाद उसने ईसाई धर्म स्वीकार कर अपना नाम डेनियल रख लिया।
पुलिस के अनुसार आरोपी ने पूछताछ में यह भी दावा किया कि वर्ष 1998 में वह तमिलनाडु के FGPC चर्च के निर्देश पर लखनऊ आया था। उसने यह भी कहा कि उसे वाराणसी सर्किल का पास्टर नियुक्त किया गया था।
पूछताछ में आरोपी ने कथित रूप से यह भी दावा किया कि उसे अधिक से अधिक लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करने का लक्ष्य दिया जाता था और इस कार्य के बदले आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जाती थी। पुलिस इन दावों की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है और अभी तक इनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
बैंक खातों और फंडिंग की होगी गहन जांच
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से धर्मांतरण से संबंधित साहित्य, कई बुकलेट, बैंक स्टेटमेंट तथा अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं। इसके अलावा एक बोलेरो वाहन भी जब्त किया गया है, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर गांवों में आने-जाने के लिए किया जाता था।
अब जांच एजेंसियां बैंक खातों के लेन-देन, धन के स्रोत और संभावित फंडिंग नेटवर्क की विस्तृत जांच कर रही हैं। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपियों के खातों में धन कहां से आता था और उसका उपयोग किन गतिविधियों में किया जाता था।
अंतरराज्यीय कनेक्शन की भी हो रही जांच
मामले में तमिलनाडु से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियां इस पूरे प्रकरण के अंतरराज्यीय पहलुओं पर भी विशेष ध्यान दे रही हैं। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या यह केवल लखनऊ तक सीमित मामला है या फिर इसके तार अन्य राज्यों से भी जुड़े हुए हैं।
इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग अभी सक्रिय हैं या नहीं तथा क्या किसी अन्य जिले में भी इसी तरह की गतिविधियां संचालित की जा रही थीं।
पुलिस जुटा रही है पूरे नेटवर्क की जानकारी
मोहनलालगंज पुलिस अब इस मामले में तकनीकी और वित्तीय दोनों स्तरों पर जांच आगे बढ़ा रही है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक रिकॉर्ड, संपर्क सूत्र और दस्तावेजों का विश्लेषण किया जा रहा है ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
जांच का एक प्रमुख उद्देश्य यह भी है कि अब तक कितने लोगों से संपर्क किया गया, किन क्षेत्रों में गतिविधियां संचालित हुईं और इस कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों की पहचान की जा सके।
जांच जारी, न्यायिक प्रक्रिया पर रहेगी नजर
फिलहाल पुलिस ने सातों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और मामले की विवेचना जारी है। बरामद दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, आरोपियों के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही होगी।










