लखनऊ में सड़क हादसे के बाद कार्रवाई पर उठे सवाल, घायल बच्ची के परिवार ने पुलिस पर लापरवाही का लगाया आरोप

रिपोर्टर कमलेश कुमार चौधरी की तस्वीर के साथ लखनऊ थाना बिजनौर का दृश्य, चंद्रवल गांव में 11 वर्षीय बच्चे के दुर्घटना में पैर टूटने की खबर को दर्शाती फीचर इमेज।

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लखनऊ के बिजनौर थाना क्षेत्र में हुए सड़क हादसे ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम चन्द्रावल भदरसा में दो मोटरसाइकिलों की टक्कर में 11 वर्षीय बच्ची एंजल गंभीर रूप से घायल हो गई, जबकि उसके माता-पिता भी चोटिल हुए। पीड़ित परिवार का आरोप है कि शिकायत देने के बावजूद पुलिस ने अब तक मुकदमा दर्ज नहीं किया और न ही आरोपी वाहन चालक के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की। घटना के बाद क्षेत्र में कानून-व्यवस्था, सड़क सुरक्षा और पीड़ितों को न्याय दिलाने की व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है। यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही और ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता पर भी महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है।

रिपोर्ट: कमलेश कुमार चौधरी

लखनऊ राजधानी लखनऊ के बिजनौर थाना क्षेत्र में हुए एक सड़क हादसे के बाद पुलिस की कार्यशैली को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम चन्द्रावल भदरसा में दो मोटरसाइकिलों की आमने-सामने हुई जोरदार टक्कर में एक 11 वर्षीय बच्ची का पैर टूट गया, जबकि उसके माता-पिता और छोटी बहन भी घायल हो गए। पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना के कई दिन बाद भी पुलिस ने न तो मुकदमा दर्ज किया और न ही कथित आरोपी वाहन चालक के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई की।

तेज रफ्तार बाइक की टक्कर से हुआ हादसा

जानकारी के अनुसार, 6 जून 2026 को ग्राम चन्द्रावल भदरसा के पास एक तेज रफ्तार मोटरसाइकिल ने दूसरी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। दुर्घटना के समय अनिल कुमार रावत अपनी पत्नी, 11 वर्षीय बेटी एंजल और दो वर्षीय छोटी बेटी के साथ मोटरसाइकिल से जा रहे थे। अचानक हुई टक्कर के कारण पूरा परिवार सड़क पर गिर गया और सभी को चोटें आईं।

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प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर इतनी तेज थी कि परिवार के सदस्य कई फीट दूर जाकर गिरे। आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल सहायता पहुंचाई और घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की।

अस्पतालों के चक्कर लगाने को मजबूर हुआ परिवार

हादसे के बाद घायल परिवार को इलाज के लिए सबसे पहले सरोजिनी नगर स्थित अस्पताल ले जाया गया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने बेहतर चिकित्सा सुविधा की आवश्यकता बताते हुए उन्हें लोकबंधु अस्पताल रेफर कर दिया।

लोकबंधु अस्पताल में चिकित्सकीय जांच के दौरान पता चला कि 11 वर्षीय एंजल के पैर की हड्डी टूट गई है। डॉक्टरों ने उसका प्लास्टर किया और लंबे समय तक आराम की सलाह दी। वहीं अनिल कुमार रावत को अंदरूनी चोटें आईं, जबकि उनकी पत्नी के हाथ और शरीर के अन्य हिस्सों में चोट के निशान पाए गए।

परिवार का कहना है कि अब तक इलाज और दवाइयों पर लगभग 10 से 12 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं। आगे भी बच्ची के उपचार और देखभाल में अतिरिक्त खर्च होने की संभावना है।

पुलिस को दी गई शिकायत, लेकिन कार्रवाई नहीं होने का आरोप

पीड़ित अनिल कुमार रावत का कहना है कि उन्होंने घटना वाले दिन ही संबंधित पुलिस चौकी में लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में दुर्घटना के लिए जिम्मेदार बताए गए मोटरसाइकिल चालक और वाहन संख्या का भी उल्लेख किया गया था।

परिवार का आरोप है कि शिकायत दिए जाने के बावजूद कई दिन बीत जाने पर भी न तो मुकदमा दर्ज किया गया और न ही संबंधित वाहन को जब्त करने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया गया। इससे पीड़ित परिवार में निराशा और आक्रोश का माहौल है।

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समझौते का दबाव बनाने का आरोप

घायल परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि उन्हें कानूनी कार्रवाई के बजाय समझौता करने के लिए दबाव का सामना करना पड़ रहा है। परिवार के अनुसार, उनसे मामूली धनराशि लेकर मामले को समाप्त करने की बात कही जा रही है, जबकि दुर्घटना में बच्ची गंभीर रूप से घायल हुई है और उपचार का खर्च लगातार बढ़ रहा है।

हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन परिवार का कहना है कि उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद लगातार कम होती जा रही है।

मीडिया के हस्तक्षेप के बाद भी नहीं बनी बात

पीड़ित परिवार के अनुसार, 8 जून को कुछ मीडिया प्रतिनिधियों ने संबंधित पुलिस चौकी पहुंचकर मामले की जानकारी ली थी। उस दौरान पुलिस अधिकारियों ने उचित कार्रवाई और मुकदमा दर्ज करने का आश्वासन दिया था।

परिजनों का कहना है कि आश्वासन मिलने के बाद भी जमीनी स्तर पर कोई विशेष प्रगति नहीं हुई। इससे परिवार को यह महसूस हो रहा है कि उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।

ग्रामीणों में भी बढ़ रही नाराजगी

इस मामले के बाद क्षेत्र के कई ग्रामीणों ने भी पुलिस व्यवस्था को लेकर नाराजगी व्यक्त की है। ग्रामीणों का कहना है कि दुर्घटना जैसे मामलों में त्वरित कार्रवाई होना आवश्यक है ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके और दोषियों के खिलाफ उचित कानूनी कदम उठाए जा सकें।

कुछ स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रभावशाली और रसूखदार लोगों को सामान्य नागरिकों की तुलना में अधिक महत्व दिया जाता है। हालांकि इन आरोपों पर पुलिस प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

घायल परिवार और स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी वाहन चालक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुई बच्ची और उसके परिवार को न्याय मिलना चाहिए।

साथ ही यह भी मांग की जा रही है कि यदि शिकायत दर्ज करने और कार्रवाई करने में किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो उसकी भी जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आवश्यक कदम उठाए जाएं।

सड़क सुरक्षा और जवाबदेही का बड़ा सवाल

यह घटना केवल एक सड़क दुर्घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सड़क सुरक्षा, पुलिस जवाबदेही और पीड़ितों को समय पर न्याय मिलने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को भी सामने लाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क हादसों के मामलों में त्वरित एफआईआर, निष्पक्ष जांच और पीड़ित परिवार को कानूनी सहायता उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है।

फिलहाल घायल बच्ची का उपचार जारी है और परिवार प्रशासन से न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में क्या कदम उठाता है और पीड़ित परिवार को कब तक राहत मिल पाती है।

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Author: यायावर

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