शिक्षा और जनहित के मुद्दों पर एकजुट हुए सामाजिक कार्यकर्ता, एक दिवसीय भूख हड़ताल में उठीं कई प्रमुख मांगें
सोनम वांगचुक के समर्थन में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षा व्यवस्था, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक अधिकारों पर हुई चर्चा, बड़ी संख्या में ग्रामीणों और महिलाओं ने भी दर्ज कराई उपस्थिति
रिपोर्ट: संजय सिंह राणा
शिक्षा, पर्यावरण और जनहित से जुड़े विषयों को लेकर बुधवार को सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज बुलंद की। टीम समाज निर्माण एवं आमजनमानस के तत्वावधान में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सरैया के निकट कर्वी–मानिकपुर मार्ग पर एक दिवसीय भूख हड़ताल आयोजित की गई। इस आयोजन में विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, ग्रामीणों, महिलाओं और युवाओं ने भाग लेकर शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम का आयोजन सामाजिक कार्यकर्ता एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अभियानों के लिए चर्चित सोनम वांगचुक के समर्थन में किया गया। आयोजकों ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है तथा इसी भावना के साथ यह कार्यक्रम आयोजित किया गया।
लोकतांत्रिक तरीके से रखी गईं जनहित की बातें
भूख हड़ताल के दौरान वक्ताओं ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक समाज की मजबूती इस बात पर निर्भर करती है कि नागरिक अपनी बात बिना किसी भय के रख सकें। उन्होंने शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, युवाओं के भविष्य और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा की।
वक्ताओं का कहना था कि देश के विकास का आधार गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था है। यदि शिक्षा प्रणाली में विश्वास कमजोर होता है तो उसका सीधा प्रभाव लाखों विद्यार्थियों और उनके भविष्य पर पड़ता है। इसलिए शिक्षा व्यवस्था को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए जाने की आवश्यकता है।
शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठीं प्रमुख मांगें
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित करने पर जोर देते हुए कहा कि परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण आवश्यक है।
भूख हड़ताल के दौरान प्रतिभागियों ने नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को वापस लेने तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी रखी।
प्रतिभागियों का कहना था कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार और संबंधित संस्थाओं की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उनका मानना था कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने से विद्यार्थियों का भरोसा मजबूत होगा और प्रतिभा के आधार पर चयन सुनिश्चित किया जा सकेगा।
युवाओं के भविष्य पर जताई चिंता
वक्ताओं ने कहा कि देश का युवा वर्ग राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति है। यदि युवाओं को निष्पक्ष अवसर नहीं मिलते या प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगते हैं तो इससे व्यापक स्तर पर निराशा का वातावरण बन सकता है।
उन्होंने कहा कि सरकार और संबंधित एजेंसियों को ऐसी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए जिससे प्रतियोगी परीक्षाएं पूरी पारदर्शिता और सुरक्षा के साथ संपन्न हों। साथ ही परीक्षा प्रणाली में आधुनिक तकनीक और कड़े निगरानी तंत्र का उपयोग बढ़ाने पर भी बल दिया गया।
पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सरोकारों पर भी हुई चर्चा
कार्यक्रम में केवल शिक्षा संबंधी विषय ही नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व पर भी विचार व्यक्त किए गए। वक्ताओं ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटना और स्थानीय स्तर पर पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि समाज और सरकार दोनों की साझा जिम्मेदारी है कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखा जाए। इसी उद्देश्य से समाज में जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत बताई गई।
शांतिपूर्ण आंदोलन को बताया लोकतंत्र की ताकत
भूख हड़ताल में शामिल वक्ताओं ने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण और अहिंसक तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार देता है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनहित के मुद्दों को शांतिपूर्ण माध्यम से उठाना लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक है।
उन्होंने युवाओं, छात्रों और आम नागरिकों से अपील की कि वे शिक्षा, पर्यावरण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों के प्रति जागरूक रहें तथा संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप समाज में सकारात्मक भूमिका निभाएं।
ग्रामीणों और महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी
कार्यक्रम में स्थानीय ग्रामीणों और महिलाओं की भी उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली। बड़ी संख्या में लोग आयोजन स्थल पर पहुंचे और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
आयोजकों का कहना था कि जनसरोकारों से जुड़े विषय केवल किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक से जुड़े हुए हैं। इसलिए समाज के विभिन्न वर्गों की सहभागिता लोकतांत्रिक जागरूकता का सकारात्मक संकेत है।
इन लोगों की रही प्रमुख उपस्थिति
कार्यक्रम में लवकुश कुमार भारती, एडवोकेट निर्मला भारती (पूर्व जिला पंचायत सदस्य एवं पूर्व विधानसभा प्रत्याशी, कर्वी सदर), पुष्पेंद्र कुमार भारती (पिंटू भैया), नंदलाल सिंह आजाद, दिनेश प्रकाशचंद वर्मा, मानवेंद्र वर्मा, प्रकाश नारायण, धर्मेंद्र भास्कर, दिनेश सनेही, संजय गौतम तथा राहुल अंबेडकर सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
इसके अलावा बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं और अन्य नागरिक भी कार्यक्रम में शामिल हुए तथा शिक्षा, पारदर्शिता और जनहित से जुड़े मुद्दों पर अपनी एकजुटता व्यक्त की।
लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण का दिया संदेश
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने कहा कि समाज में जागरूक नागरिकों की सक्रिय भागीदारी लोकतंत्र को मजबूत बनाती है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, युवाओं के हितों की रक्षा, पर्यावरण संरक्षण तथा जनहित के मुद्दों पर संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता दोहराई।
आयोजन शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ, जहां प्रतिभागियों ने संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए समाज के विभिन्न वर्गों से जनहित के प्रश्नों पर जागरूक और सक्रिय रहने का आह्वान किया।









