‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत लगाए गए फलदार, छायादार और पुष्पीय पौधे

भाटपार रानी स्थित मदन मोहन मालवीय पीजी कॉलेज में विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत वृक्षारोपण करते छात्र-छात्राएं, प्राध्यापक और रिपोर्टर इरफान अली लारी।

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इरफान अली लारी की रिपोर्ट

देवरिया जनपद के भाटपार रानी स्थित मदन मोहन मालवीय पीजी कॉलेज में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। महाविद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में प्राध्यापकों, कर्मचारियों, राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के स्वयंसेवकों तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।

महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर (डॉ.) सतीश चंद्र गौड़ के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं था, बल्कि युवा पीढ़ी को पर्यावरणीय चुनौतियों के प्रति जागरूक करते हुए उन्हें प्रकृति संरक्षण के लिए प्रेरित करना भी था। कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय परिसर में आम, अमरूद, आंवला, नीम और सागौन जैसे फलदार एवं छायादार पौधों के साथ-साथ चमेली और गुलदाउदी जैसे पुष्पीय पौधों का भी रोपण किया गया।

पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की आवश्यकता

वृक्षारोपण कार्यक्रम के उपरांत महाविद्यालय सभागार में “विश्व पर्यावरण दिवस एवं एक पेड़ मां के नाम” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता प्राचार्य प्रो. (डॉ.) सतीश चंद्र गौड़ ने की, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रोफेसर सुधीर शुक्ला और डॉ. अजय कुमार सिंह उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत छात्र-छात्राओं द्वारा पर्यावरण प्रदूषण और उसके दुष्प्रभावों पर अपने विचार प्रस्तुत करने से हुई। छात्रों ने बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, प्लास्टिक कचरे और वन विनाश जैसी समस्याओं पर चिंता व्यक्त करते हुए पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

पर्यावरण प्रदूषण मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा: प्राचार्य

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए प्राचार्य प्रो. (डॉ.) सतीश चंद्र गौड़ ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण प्रदूषण मानव जीवन के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन चुका है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते समाज ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति गंभीरता नहीं दिखाई, तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य संकट में पड़ सकता है।

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उन्होंने कहा कि वायु, जल और भूमि प्रदूषण का प्रभाव मानव जीवन पर प्रत्यक्ष रूप से दिखाई दे रहा है। बढ़ता तापमान, अनियमित वर्षा, प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती घटनाएं और जैव विविधता का ह्रास इसके स्पष्ट उदाहरण हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे पर्यावरण संरक्षण को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी मानते हुए सक्रिय भूमिका निभाएं और अधिक से अधिक पौधे लगाकर उनकी देखभाल भी करें।

प्लास्टिक मुक्त समाज की दिशा में युवाओं को आगे आने का आह्वान

विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर सुधीर शुक्ला ने अपने संबोधन में पर्यावरण प्रदूषण के प्रमुख कारणों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक का अनियंत्रित उपयोग पर्यावरण के लिए सबसे बड़ी समस्याओं में से एक बन चुका है। प्लास्टिक न केवल भूमि की उर्वरता को प्रभावित करता है, बल्कि जल स्रोतों और जीव-जंतुओं के लिए भी गंभीर खतरा उत्पन्न करता है।

उन्होंने युवाओं को सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रयोग बंद करने और समाज में इसके प्रति जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जब तक जनभागीदारी नहीं बढ़ेगी, तब तक पर्यावरण संरक्षण के प्रयास पूर्ण रूप से सफल नहीं हो सकते। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्तर पर पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली अपनानी होगी।

विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन जरूरी

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि डॉ. अजय कुमार सिंह ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली और बढ़ती सुविधाओं की दौड़ में मानव प्रकृति को लगातार नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर यदि पर्यावरण को क्षति पहुंचाई जाती है, तो वह वास्तविक विकास नहीं बल्कि नकारात्मक विकास है।

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उन्होंने कहा कि सकारात्मक विकास वही है जिसमें प्रकृति और मानव जीवन दोनों का संतुलन बना रहे। यदि पर्यावरण सुरक्षित रहेगा तो ही समाज का समग्र विकास संभव होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे पर्यावरण संरक्षण को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं और प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनें।

‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का गहरा संदेश

कार्यक्रम का संचालन कर रहे डॉ. रणजीत सिंह ने “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस अभियान के पीछे केवल पौधारोपण का उद्देश्य नहीं है, बल्कि यह भावनात्मक और सामाजिक चेतना का भी संदेश देता है।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मां हमारे जीवन और अस्तित्व का आधार होती है, उसी प्रकार वृक्ष पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व का आधार हैं। वृक्ष हमें शुद्ध वायु, छाया, फल, औषधियां और प्राकृतिक संतुलन प्रदान करते हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी मां के सम्मान और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के रूप में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए। उन्होंने उपस्थित छात्रों से “वृक्ष लगाओ, जीवन बचाओ” का संदेश समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने का आह्वान किया।

विद्यार्थियों और कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई। वृक्षारोपण अभियान को सफल बनाने में कार्यालय अधीक्षक प्रवीण शाही, पूर्व कार्यालय अधीक्षक शिव प्रसाद बाबू, सत्येंद्र, भगवान, दीपक, प्रियांशु, साहिल, पवन सहित अनेक लोगों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।

महाविद्यालय प्रशासन ने वृक्षारोपण के बाद पौधों की नियमित देखभाल और संरक्षण का भी संकल्प लिया, ताकि लगाए गए पौधे भविष्य में बड़े वृक्ष बनकर पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य को सार्थक कर सकें।

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पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक जिम्मेदारी जरूरी

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी का सशक्त संदेश देने वाला अभियान साबित हुआ। महाविद्यालय परिसर में लगाए गए पौधे आने वाले समय में हरित वातावरण के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रत्येक व्यक्ति प्रतिवर्ष एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल का संकल्प ले, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़े बदलाव संभव हैं। मदन मोहन मालवीय पीजी कॉलेज का यह प्रयास समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन सकता है और युवाओं को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी का एहसास करा सकता है।

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Author: यायावर

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