देवरिया

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की पहल, अधिवक्ताओं को महिला सुरक्षा एवं पुनर्वास व्यवस्था से कराया गया परिचित

नव नियुक्त अधिवक्ताओं ने वन स्टॉप सेंटर का किया निरीक्षण, महिलाओं को मिलने वाली सहायता सेवाओं की ली विस्तृत जानकारी

इरफान अली लारी की रिपोर्ट

देवरिया। महिलाओं और बालिकाओं को संकट की परिस्थितियों में त्वरित सहायता, सुरक्षा, कानूनी परामर्श तथा पुनर्वास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित वन स्टॉप सेंटर की कार्यप्रणाली को समझने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से एक विशेष निरीक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। गुरुवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (प्रथम) के नेतृत्व में नव नियुक्त अधिवक्ताओं के एक दल ने वन स्टॉप सेंटर का भ्रमण कर वहां उपलब्ध सुविधाओं, सेवाओं और व्यवस्थाओं का विस्तृत अवलोकन किया।

इस निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य नव नियुक्त अधिवक्ताओं को महिला संरक्षण और सहायता से जुड़े सरकारी तंत्र की वास्तविक कार्यप्रणाली से अवगत कराना था, ताकि वे भविष्य में पीड़ित महिलाओं और बालिकाओं को प्रभावी कानूनी सहायता उपलब्ध कराने में अपनी भूमिका को और बेहतर ढंग से निभा सकें।

महिलाओं के लिए सुरक्षा और सहायता का महत्वपूर्ण केंद्र है वन स्टॉप सेंटर

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने अधिवक्ताओं को बताया कि वन स्टॉप सेंटर महिलाओं और बालिकाओं के लिए एक ऐसा एकीकृत सहायता केंद्र है, जहां उन्हें विभिन्न प्रकार की सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाती हैं। घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, लैंगिक हिंसा, शारीरिक शोषण, मानसिक प्रताड़ना या किसी अन्य प्रकार की संकटपूर्ण स्थिति से गुजर रही महिलाओं को यहां तत्काल सहायता प्रदान की जाती है।

वन स्टॉप सेंटर का उद्देश्य केवल तत्काल राहत देना ही नहीं, बल्कि पीड़ित महिलाओं को मानसिक रूप से सशक्त बनाना और उन्हें सम्मानजनक जीवन की ओर वापस लौटने में सहयोग प्रदान करना भी है। यही कारण है कि यहां कानूनी सहायता, मनोवैज्ञानिक परामर्श, चिकित्सा सहयोग, अस्थायी आश्रय और पुनर्वास संबंधी सेवाएं एक साथ उपलब्ध कराई जाती हैं।

मनोवैज्ञानिक परामर्श के माध्यम से बढ़ाया जाता है आत्मविश्वास

निरीक्षण के दौरान वन स्टॉप सेंटर की मनोवैज्ञानिक परामर्शदाता मीनू जायसवाल ने अधिवक्ताओं को केंद्र में संचालित काउंसलिंग सेवाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कई महिलाएं मानसिक तनाव, पारिवारिक विवाद, घरेलू हिंसा और सामाजिक दबाव जैसी परिस्थितियों से गुजरती हैं। ऐसे मामलों में केवल कानूनी सहायता पर्याप्त नहीं होती, बल्कि मानसिक और भावनात्मक सहयोग भी आवश्यक होता है। उन्होंने बताया कि केंद्र में आने वाली महिलाओं और बालिकाओं की नियमित काउंसलिंग की जाती है, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़े और वे जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए मानसिक रूप से तैयार हो सकें। इसके अलावा परिवारों के बीच संवाद स्थापित कर टूटते रिश्तों को जोड़ने का भी प्रयास किया जाता है।

मीनू जायसवाल ने कहा कि कई मामलों में परामर्श और संवाद के माध्यम से पारिवारिक विवादों का समाधान संभव हो जाता है, जिससे महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिल पाता है।

शिक्षा और रोजगार से जोड़ने की भी होती है पहल

वन स्टॉप सेंटर केवल संकटग्रस्त महिलाओं को तत्काल सहायता देने तक सीमित नहीं है। केंद्र का प्रयास यह भी रहता है कि पीड़ित महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जाए। निरीक्षण के दौरान अधिवक्ताओं को बताया गया कि कई महिलाओं को शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार से जोड़ने के लिए विभिन्न सरकारी योजनाओं और संस्थानों से समन्वय स्थापित किया जाता है।

महिलाओं को स्वरोजगार, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और रोजगारोन्मुखी गतिविधियों की जानकारी देकर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का प्रयास किया जाता है। अधिकारियों का मानना है कि आर्थिक आत्मनिर्भरता महिलाओं को भविष्य में होने वाले शोषण और उत्पीड़न से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं अनेक सुविधाएं

वन स्टॉप सेंटर की प्रबंधक नीतू भारती ने निरीक्षण के दौरान केंद्र में उपलब्ध सुविधाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केंद्र में आने वाली पीड़ित महिलाओं को निःशुल्क कानूनी सहायता, चिकित्सीय सहायता, मनोवैज्ञानिक परामर्श, अस्थायी आवास और सुरक्षा संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

उन्होंने बताया कि किसी भी महिला या बालिका को संकट की स्थिति में सहायता की आवश्यकता होने पर वन स्टॉप सेंटर तत्काल सहयोग प्रदान करता है। आवश्यकता पड़ने पर पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित कर पीड़िता को समुचित सहायता उपलब्ध कराई जाती है। नीतू भारती ने यह भी बताया कि केंद्र का उद्देश्य पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने के साथ-साथ उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपने जीवन को नई दिशा दे सकें।

अधिवक्ताओं ने समझी सहायता प्रदान करने की प्रक्रिया

निरीक्षण कार्यक्रम के दौरान नव नियुक्त अधिवक्ताओं को यह भी बताया गया कि किसी पीड़ित महिला के केंद्र तक पहुंचने से लेकर उसे सहायता उपलब्ध कराने तक की पूरी प्रक्रिया किस प्रकार संचालित की जाती है। अधिवक्ताओं ने विभिन्न मामलों में अपनाई जाने वाली कार्यप्रणाली, दस्तावेजी प्रक्रिया तथा कानूनी सहयोग की व्यवस्था को विस्तार से समझा।

इस दौरान अधिवक्ताओं ने केंद्र के विभिन्न कक्षों का निरीक्षण किया और वहां उपलब्ध संसाधनों एवं सुविधाओं का अवलोकन किया। उन्होंने यह जानने में विशेष रुचि दिखाई कि पीड़ित महिलाओं को कानूनी अधिकारों के प्रति किस प्रकार जागरूक किया जाता है और न्यायिक प्रक्रिया में उनकी सहायता कैसे की जाती है।

महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि वन स्टॉप सेंटर जैसी संस्थाएं महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे केंद्र न केवल पीड़ित महिलाओं को तत्काल राहत प्रदान करते हैं, बल्कि उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से पुनर्स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा नव नियुक्त अधिवक्ताओं को इस प्रकार के संस्थानों की कार्यप्रणाली से परिचित कराना एक सकारात्मक पहल मानी जा रही है। इससे अधिवक्ताओं को महिला अधिकारों, कानूनी सहायता तंत्र और पुनर्वास व्यवस्था की बेहतर समझ विकसित होगी, जिसका लाभ भविष्य में जरूरतमंद महिलाओं को भी मिलेगा।

संवेदनशील न्याय व्यवस्था की ओर बढ़ता कदम

वन स्टॉप सेंटर के इस निरीक्षण कार्यक्रम ने यह स्पष्ट किया कि न्याय व्यवस्था केवल अदालतों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के कमजोर और पीड़ित वर्गों तक सहायता पहुंचाने के लिए विभिन्न संस्थाएं मिलकर कार्य कर रही हैं। नव नियुक्त अधिवक्ताओं के लिए यह अनुभव न केवल व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करने वाला रहा, बल्कि उन्हें सामाजिक न्याय और महिला सशक्तिकरण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का भी एहसास कराया।

महिला सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए संचालित ऐसी व्यवस्थाएं समाज में विश्वास और सुरक्षा की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और वन स्टॉप सेंटर की यह संयुक्त पहल इसी दिशा में एक सराहनीय प्रयास के रूप में देखी जा रही है।

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