18 अक्टूबर 2026 12:59 पूर्वाह्न

संसद में गूंजी खादी, कारीगरों और बुनकरों की आवाज, सलेमपुर सांसद रमाशंकर राजभर ने उठाए कई अहम मुद्दे

रिपोर्टर इरफान अली लारी के साथ तैयार फीचर इमेज, जिसमें सलेमपुर सांसद रमाशंकर राजभर, संसद, खादी ग्रामोद्योग, कारीगर और बुनकरों से जुड़ा सांकेतिक दृश्य दर्शाया गया है।

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इरफान अली लारी की रिपोर्ट

देवरिया। सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के सांसद रमाशंकर राजभर ने संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में नियम 377 के अंतर्गत खादी ग्रामोद्योग संस्थाओं, कातिनों, बुनकरों तथा ग्रामीण कुटीर उद्योग से जुड़े लाखों लोगों की गंभीर समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि खादी क्षेत्र की लंबे समय से लंबित समस्याओं के समाधान के लिए तत्काल प्रभावी नीति बनाई जाए, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले और रोजगार के नए अवसर सृजित हो सकें।

सांसद ने कहा कि खादी केवल वस्त्र उत्पादन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह देश की आत्मनिर्भरता, स्वदेशी भावना और ग्रामीण विकास का मजबूत आधार है। आज भी देश के लाखों परिवार अपनी आजीविका के लिए खादी ग्रामोद्योग और हथकरघा गतिविधियों पर निर्भर हैं। ऐसे में इस क्षेत्र की उपेक्षा ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।

भुगतान में देरी और कच्चे माल की कमी बनी बड़ी चुनौती

लोकसभा में अपनी बात रखते हुए सांसद रमाशंकर राजभर ने कहा कि खादी ग्रामोद्योग आयोग की विभिन्न योजनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन का महत्वपूर्ण माध्यम हैं, लेकिन वर्तमान समय में अनेक संस्थाएं आर्थिक संकट का सामना कर रही हैं। उन्होंने विशेष रूप से एमएमडीए (मार्केट डेवलपमेंट एंड डेवलपमेंट असिस्टेंस) भुगतान में हो रही देरी का मुद्दा उठाया और कहा कि समय पर भुगतान न मिलने से संस्थाओं की वित्तीय स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि कच्चे माल की नियमित उपलब्धता न होने के कारण उत्पादन प्रभावित हो रहा है। कई संस्थाओं को कार्यशील पूंजी के लिए ऊंची ब्याज दरों पर ऋण लेना पड़ता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और अधिक कमजोर हो जाती है।

कारीगरों और बुनकरों को नहीं मिल रहा सम्मानजनक पारिश्रमिक

सांसद ने सदन में कहा कि खादी क्षेत्र से जुड़े कातिनों, बुनकरों और अन्य श्रमिकों को उनके श्रम के अनुरूप उचित मजदूरी नहीं मिल रही है। कम पारिश्रमिक के कारण युवा पीढ़ी इस क्षेत्र से दूर होती जा रही है, जिससे पारंपरिक कौशल और ग्रामीण रोजगार दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

उन्होंने मांग की कि खादी और ग्रामोद्योग से जुड़े सभी श्रमिकों को सम्मानजनक मानदेय उपलब्ध कराया जाए, ताकि उनका जीवन स्तर बेहतर हो सके और वे पूरे उत्साह के साथ इस क्षेत्र में कार्य कर सकें।

सरकारी संस्थानों में बढ़े खादी उत्पादों का उपयोग

रमाशंकर राजभर ने सरकार से आग्रह किया कि खादी उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए सरकारी एवं अर्द्धसरकारी विभागों में खादी के उपयोग को अधिक से अधिक प्रोत्साहित किया जाए। यदि सरकारी खरीद में खादी उत्पादों को प्राथमिकता मिलेगी तो इससे उत्पादन बढ़ेगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और ग्रामीण उद्योगों को नई ऊर्जा प्राप्त होगी।

उन्होंने कहा कि “वोकल फॉर लोकल” और “आत्मनिर्भर भारत” जैसे अभियानों को वास्तविक सफलता तभी मिलेगी, जब खादी और कुटीर उद्योगों को व्यवहारिक स्तर पर मजबूत किया जाएगा।

सामाजिक सुरक्षा और प्रतिनिधित्व की भी उठाई मांग

सांसद ने खादी संस्थाओं के कर्मचारियों, कार्यकर्ताओं, कातिनों और बुनकरों के लिए सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि इन लोगों को पेंशन, बीमा, स्वास्थ्य सुविधाएं तथा अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ प्रभावी ढंग से मिलना चाहिए।

इसके साथ ही उन्होंने निर्णय लेने की प्रक्रिया में खादी संस्थाओं और उनसे जुड़े प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करने की भी आवश्यकता बताई। उनका कहना था कि जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले लोगों की भागीदारी से नीतियां अधिक प्रभावी और व्यवहारिक बन सकेंगी।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय से किया ठोस कदम उठाने का आग्रह

लोकसभा में अपने वक्तव्य के दौरान सांसद ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय से आग्रह किया कि खादी ग्रामोद्योग संस्थाओं की समस्याओं के समाधान के लिए शीघ्र व्यापक नीति तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि भुगतान व्यवस्था को पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए, कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, कार्यशील पूंजी पर ब्याज का बोझ कम किया जाए तथा मजदूरी में उचित वृद्धि की जाए।

उनका मानना है कि यदि इन मुद्दों पर गंभीरता से काम किया गया तो खादी क्षेत्र को नई मजबूती मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी तेजी से बढ़ेंगे।

जनहित से जुड़े मुद्दे संसद में उठाने का सिलसिला रहेगा जारी

सांसद मीडिया प्रभारी मंजूर आलम ने बताया कि सलेमपुर सांसद रमाशंकर राजभर संसद के वर्तमान सत्र में लगातार जनहित और क्षेत्रीय विकास से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहे हैं। उनका प्रयास है कि संसद के माध्यम से आम जनता, किसानों, मजदूरों, कारीगरों, बुनकरों तथा ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को सरकार के सामने प्रभावी ढंग से रखा जाए, ताकि उनके समाधान की दिशा में ठोस पहल हो सके।

उन्होंने विश्वास जताया कि संसद में उठाए जा रहे इन मुद्दों से खादी ग्रामोद्योग क्षेत्र की समस्याओं के समाधान की दिशा में सकारात्मक पहल होगी और इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

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