चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है। अगस्त माह में जारी होने वाले बिजली बिल में उपभोक्ताओं को एक बार फिर राहत मिलने जा रही है। बिजली खरीद लागत में कमी आने का लाभ सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत अगस्त के बिजली बिल में 2.92 प्रतिशत की कमी की जाएगी। इस फैसले से प्रदेश के लगभग 3.73 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं को सामूहिक रूप से करीब ₹221.14 करोड़ की राहत मिलने का अनुमान है।
यह लगातार दूसरा महीना है जब बिजली उपभोक्ताओं को बिल में राहत का लाभ मिलेगा। इससे पहले जुलाई माह में भी बिजली बिल में कमी की गई थी। लगातार मिल रही इस राहत से घरेलू, व्यावसायिक और अन्य श्रेणी के लाखों उपभोक्ताओं को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।
लगातार दूसरे महीने मिलेगी बिजली बिल में राहत
उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं को पहले अतिरिक्त ईंधन अधिभार का भार उठाना पड़ा था, लेकिन अब स्थिति बदलती दिखाई दे रही है। जून माह में उपभोक्ताओं से अतिरिक्त ईंधन अधिभार के रूप में अधिक राशि ली गई थी। इसके बाद जुलाई में बिलों में 4.43 प्रतिशत की राहत दी गई और अब अगस्त माह के लिए 2.92 प्रतिशत की अतिरिक्त राहत का निर्णय लिया गया है।
लगातार दूसरे महीने बिजली बिल में कटौती से उपभोक्ताओं को यह भरोसा मिला है कि बिजली खरीद लागत में कमी आने पर उसका लाभ सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा सकता है। इससे आम परिवारों के मासिक खर्च पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
ईंधन एवं बिजली खरीद लागत समायोजन का मिलेगा लाभ
बिजली बिल में यह राहत ईंधन एवं बिजली खरीद लागत समायोजन (एफपीपीसीए) के तहत दी जा रही है। इस व्यवस्था के अंतर्गत बिजली उत्पादन और खरीद पर आने वाली वास्तविक लागत का आकलन किया जाता है। यदि निर्धारित अनुमानित लागत की तुलना में वास्तविक खर्च कम रहता है तो उसका लाभ बिजली उपभोक्ताओं को बिल में कटौती के रूप में दिया जाता है।
मई माह के आंकड़ों में बिजली खरीद लागत अपेक्षा से कम रहने के कारण ईंधन अधिभार में कमी आई है। इसी का सीधा लाभ अगस्त के बिजली बिलों में दिखाई देगा।
नियामक आयोग की सख्ती के बाद बदली व्यवस्था
कुछ समय पहले उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) ने पुराने भुगतानों को भी ईंधन अधिभार की गणना में शामिल करते हुए जून और जुलाई के बिजली बिलों में अतिरिक्त राशि वसूलने का निर्णय लिया था। इस प्रस्ताव को लेकर उपभोक्ताओं के बीच चिंता बढ़ गई थी।
मामला उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के संज्ञान में पहुंचने पर आयोग ने स्पष्ट रुख अपनाया। आयोग ने कहा कि ईंधन एवं बिजली खरीद लागत समायोजन की गणना केवल वास्तविक बिजली खरीद लागत और ट्रांसमिशन शुल्क के आधार पर ही की जा सकती है। पुराने भुगतानों अथवा अन्य मदों को इसमें शामिल करना नियमों के अनुरूप नहीं माना जाएगा।
आयोग की इस स्पष्ट व्यवस्था के बाद गणना प्रक्रिया में बदलाव किया गया, जिसका परिणाम यह हुआ कि जुलाई में भी उपभोक्ताओं को राहत मिली और अब अगस्त में भी बिजली बिल कम आएगा।
बिजली खरीद लागत घटने से मिला सीधा फायदा
टैरिफ आदेश के अनुसार मई माह के लिए बिजली खरीद की अनुमानित लागत ₹4.94 प्रति यूनिट निर्धारित की गई थी। जबकि वास्तविक बिजली खरीद लागत ₹4.73 प्रति यूनिट रही। अनुमानित और वास्तविक लागत के बीच आए इस अंतर का लाभ उपभोक्ताओं को देने का निर्णय लिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिजली खरीद लागत में कमी आने पर यदि उसी अनुपात में राहत उपभोक्ताओं तक पहुंचती रहे तो बिजली बिलों की पारदर्शिता और विश्वसनीयता दोनों मजबूत होंगी।
करोड़ों उपभोक्ताओं को मिलेगा आर्थिक लाभ
प्रदेश में लगभग 3.73 करोड़ बिजली उपभोक्ता हैं। अगस्त माह में बिलों में की जाने वाली 2.92 प्रतिशत की कमी से कुल मिलाकर ₹221.14 करोड़ की राहत मिलने का अनुमान है। घरेलू उपभोक्ताओं के अलावा छोटे व्यापारियों, दुकानदारों तथा अन्य श्रेणी के उपभोक्ताओं को भी इसका लाभ मिलेगा।
बढ़ती महंगाई के बीच बिजली बिल में मिलने वाली यह राहत आम लोगों के मासिक बजट को कुछ हद तक संतुलित करने में मददगार साबित हो सकती है।
पारदर्शी व्यवस्था पर रहेगी निगरानी
विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने कहा कि परिषद भविष्य में भी एफपीपीसीए की पूरी प्रक्रिया पर लगातार नजर रखेगी। उनका कहना है कि बिजली खरीद लागत में यदि कमी आती है तो उसका पूरा और समयबद्ध लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे और किसी भी प्रकार की अतिरिक्त या अनुचित वसूली की संभावना न रहे, इसके लिए परिषद लगातार अपनी भूमिका निभाती रहेगी।
उपभोक्ताओं के लिए राहत का सकारात्मक संकेत
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि बिजली खरीद लागत में पारदर्शिता और नियामक आयोग की सक्रिय निगरानी का लाभ सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचना एक सकारात्मक संकेत है। यदि भविष्य में भी बिजली खरीद लागत नियंत्रित रहती है तो आने वाले महीनों में भी उपभोक्ताओं को राहत मिलने की संभावना बनी रह सकती है।
फिलहाल अगस्त माह के बिजली बिल में मिलने वाली 2.92 प्रतिशत की कटौती प्रदेश के करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर मानी जा रही है। इससे यह भी स्पष्ट हुआ है कि नियामकीय निगरानी और पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से बिजली उपभोक्ताओं के हितों की प्रभावी ढंग से रक्षा की जा सकती है।













