देवरिया

अवैध खनन पर देवरिया प्रशासन का बड़ा एक्शन, फर्म पर पांच लाख का जुर्माना

बिना अनुमति मिट्टी खनन का मामला पकड़ा गया, दो जेसीबी मशीनें भी सीज

इरफान अली लारी की रिपोर्ट

देवरिया में अवैध खनन के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक निजी फर्म पर पांच लाख रुपये का आर्थिक दंड लगाया है। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी के निर्देश पर खनन विभाग ने विशेष जांच अभियान चलाया, जिसमें बिना अनुमति मिट्टी खनन किए जाने की पुष्टि हुई। मामले को गंभीर मानते हुए प्रशासन ने संबंधित फर्म की अनुज्ञा निरस्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

जनपद में अवैध खनन को लेकर लंबे समय से शिकायतें सामने आ रही थीं। ग्रामीण क्षेत्रों में मिट्टी और बालू के अवैध दोहन के कारण जहां पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हो रहा था, वहीं राजस्व को भी भारी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही थी। शिकायतों के बढ़ते दायरे को देखते हुए जिलाधिकारी ने खनन विभाग को सख्त जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

जिलाधिकारी के निर्देश पर चला विशेष जांच अभियान

जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी के निर्देश के बाद खनन निरीक्षक जितेंद्र कुमार शर्मा के नेतृत्व में विभिन्न क्षेत्रों में विशेष जांच अभियान चलाया गया। इस दौरान कई स्थानों पर खनन गतिविधियों का निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने दस्तावेजों की जांच के साथ-साथ मौके पर मशीनों और परिवहन व्यवस्था का भी परीक्षण किया।

जांच के दौरान यह सामने आया कि देवरिया बाईपास प्राइवेट लिमिटेड नामक फर्म द्वारा बिना वैध अनुमति के मिट्टी खनन कराया जा रहा था। प्रारंभिक जांच में मिले साक्ष्यों के आधार पर विभाग ने फर्म को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। हालांकि निर्धारित समयावधि में फर्म की ओर से कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण या वैध अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए गए।

इसके बाद खनन विभाग ने पूरी जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी। रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने संबंधित फर्म पर पांच लाख रुपये का आर्थिक दंड लगाया। साथ ही फर्म की अनुज्ञा निरस्त करने की कार्रवाई भी प्रस्तावित कर दी गई है।

अवैध खनन के खिलाफ प्रशासन का सख्त संदेश

प्रशासन की इस कार्रवाई को अवैध खनन माफियाओं के खिलाफ बड़ा संदेश माना जा रहा है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जनपद में किसी भी स्थिति में अवैध खनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नियमित निगरानी रखी जाए और संदिग्ध स्थलों पर लगातार अभियान चलाया जाए।

जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि अवैध खनन न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि पर्यावरण और स्थानीय भू-संतुलन के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करता है। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति या संस्था नियमों का उल्लंघन करेगी, उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

बनकटा और खुखुंदू क्षेत्र में पकड़ी गई जेसीबी मशीनें

विशेष अभियान के दौरान प्रशासन ने बनकटा और खुखुंदू थाना क्षेत्रों में भी कार्रवाई की। यहां अवैध खनन में प्रयुक्त एक-एक जेसीबी मशीन को मौके से पकड़ा गया। अधिकारियों ने दोनों मशीनों को संबंधित थानों की सुपुर्दगी में दे दिया है।

खनन विभाग के अनुसार इन मशीनों का उपयोग बिना अनुमति मिट्टी खुदाई और परिवहन के लिए किया जा रहा था। मामले की विस्तृत जांच जारी है और संबंधित संचालकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय कई इलाकों में मशीनों के जरिए बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया जाता है। इससे खेतों, ग्रामीण सड़कों और जल स्रोतों को भी नुकसान पहुंचता है। ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्रवाई का स्वागत करते हुए नियमित निगरानी की मांग की है।

पर्यावरण और राजस्व पर पड़ता है सीधा असर

विशेषज्ञों के अनुसार अवैध खनन का सबसे अधिक प्रभाव पर्यावरण पर पड़ता है। बिना वैज्ञानिक मानकों के मिट्टी या बालू निकासी से भूमि कटान, जल स्तर में गिरावट और कृषि क्षेत्र को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। कई बार अवैध खनन के कारण ग्रामीण इलाकों में सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो जाती हैं।

इसके अलावा सरकार को मिलने वाले राजस्व का भी बड़ा नुकसान होता है। वैध खनन के लिए निर्धारित शुल्क और नियम होते हैं, लेकिन अवैध तरीके से खनन करने वाले लोग इन नियमों को दरकिनार कर सरकारी आय को प्रभावित करते हैं। यही कारण है कि प्रदेश सरकार लगातार अवैध खनन पर अंकुश लगाने के निर्देश दे रही है।

लगातार बढ़ रही हैं शिकायतें

देवरिया समेत पूर्वांचल के कई जिलों में अवैध खनन की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। कई बार स्थानीय लोगों ने प्रशासन को शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की, लेकिन कुछ मामलों में कार्रवाई धीमी होने के आरोप भी लगे।

हालांकि हाल के दिनों में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिले में खनन स्थलों की निगरानी बढ़ाई गई है और राजस्व, पुलिस तथा खनन विभाग की संयुक्त टीमें भी सक्रिय की गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी निगरानी और लगातार छापेमारी के जरिए अवैध खनन नेटवर्क पर अंकुश लगाने की कोशिश की जा रही है।

प्रशासन ने जनता से भी मांगा सहयोग

जिलाधिकारी ने आम जनता से भी सहयोग की अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि किसी क्षेत्र में अवैध खनन की सूचना मिलती है तो लोग तत्काल प्रशासन या पुलिस को जानकारी दें। शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाएगी और सूचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि जनभागीदारी के बिना अवैध खनन जैसी गतिविधियों पर पूरी तरह नियंत्रण संभव नहीं है। प्रशासन की कोशिश है कि जिले में पारदर्शी और नियमसम्मत व्यवस्था लागू की जाए ताकि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित हो सके।

खनन विभाग की आगे भी जारी रहेगी कार्रवाई

खनन विभाग के अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में जिले के अन्य संवेदनशील इलाकों में भी विशेष जांच अभियान चलाया जाएगा। जिन क्षेत्रों में पहले से शिकायतें मिल रही हैं, वहां ड्रोन सर्वे और संयुक्त छापेमारी जैसी रणनीतियों पर भी विचार किया जा रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ केवल जुर्माना ही नहीं, बल्कि लाइसेंस निरस्तीकरण और आपराधिक मुकदमे जैसी कार्रवाई भी की जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिले में किसी भी प्रकार की अवैध खनन गतिविधि संचालित न हो सके।

देवरिया प्रशासन की इस कार्रवाई को जिले में अवैध खनन के खिलाफ अब तक की महत्वपूर्ण कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है। इससे यह संकेत भी मिला है कि प्रशासन अब अवैध कारोबारियों के खिलाफ सख्त और निर्णायक कार्रवाई के मूड में है।

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