हर घर जल का सपना टूटा, बूंद-बूंद पानी को तरस रही जनता

भरतपुर और डीग में जल संकट के दौरान पानी के टैंकर से पानी भरते लोग और रिपोर्टर हिमांशु मोदी की तस्वीर के साथ फीचर इमेज

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हिमांशु मोदी की रिपोर्ट

राजस्थान के भरतपुर और डीग जिलों में पेयजल संकट अब गंभीर जनसमस्या का रूप ले चुका है। सरकारों के बदलने, नई योजनाओं के ऐलान और करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद आज भी इन दोनों जिलों के शहरी और ग्रामीण इलाकों में नियमित जलापूर्ति लोगों के लिए सपना बनी हुई है। ‘हर घर नल, हर घर जल’ जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के बड़े-बड़े दावे जमीनी स्तर पर पूरी तरह बिखरे नजर आ रहे हैं। हालात इतने खराब हैं कि लोग इस भीषण गर्मी में बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं।

शहर से गांव तक पानी के लिए त्राहिमाम

भरतपुर शहर के विजय नगर, बरसो का नगला, कामां क्षेत्र और डीग जिले के कई गांवों में जल संकट लगातार गहराता जा रहा है। कई मोहल्लों में दिनों तक नलों में पानी नहीं आता, जबकि कुछ क्षेत्रों में बेहद कम दबाव से जलापूर्ति की जाती है। ग्रामीण इलाकों की स्थिति और अधिक चिंताजनक बनी हुई है, जहां लोग कई किलोमीटर दूर से पानी लाने को मजबूर हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले दो से तीन दशकों में सरकारें तो बदलीं, लेकिन पानी की व्यवस्था नहीं बदली। हर चुनाव में जल संकट दूर करने के वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही सारी योजनाएं कागजों में सिमट कर रह जाती हैं।

जल जीवन मिशन के दावों पर उठे सवाल

केंद्र और राज्य सरकार द्वारा जल जीवन मिशन के तहत हर घर तक पानी पहुंचाने का दावा किया गया था। इसके लिए करोड़ों रुपये भी खर्च किए गए, लेकिन भरतपुर और डीग की वास्तविक तस्वीर इन दावों की पोल खोल रही है। कई इलाकों में पाइपलाइन तो बिछा दी गई, लेकिन उनमें आज तक नियमित पानी नहीं पहुंचा। कहीं मोटरें खराब पड़ी हैं तो कहीं पाइपलाइनें क्षतिग्रस्त हैं।

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लोगों का आरोप है कि योजनाओं के संचालन और निगरानी में भारी लापरवाही बरती गई। स्थानीय स्तर पर तैनात कर्मचारियों की उदासीनता और अधिकारियों की कमजोर मॉनिटरिंग के कारण जल योजनाएं सफल नहीं हो पा रही हैं।

महिलाओं और बच्चों पर सबसे ज्यादा असर

पानी की समस्या का सबसे अधिक असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा है। सुबह से लेकर देर शाम तक महिलाएं पानी भरने की जद्दोजहद में लगी रहती हैं। निजी टैंकरों के पीछे भागना अब उनकी मजबूरी बन चुका है। कई परिवारों में बच्चों की पढ़ाई तक प्रभावित हो रही है क्योंकि घर के सदस्य पानी जुटाने में ही पूरा दिन निकाल देते हैं।

बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए यह संकट और अधिक गंभीर हो गया है। गर्मी के इस मौसम में पानी की कमी लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर डाल रही है। लोगों का कहना है कि पीने के पानी जैसी मूलभूत जरूरत के लिए उन्हें रोज संघर्ष करना पड़ रहा है।

निजी टैंकरों के भरोसे चल रही जिंदगी

सरकारी जलापूर्ति व्यवस्था फेल होने के बाद अब बड़ी संख्या में लोग निजी टैंकरों पर निर्भर हो चुके हैं। कई इलाकों में टैंकर माफिया सक्रिय हैं और मनमाने दामों पर पानी बेचा जा रहा है। गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए पानी खरीदना अतिरिक्त आर्थिक बोझ बनता जा रहा है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पानी हर व्यक्ति का बुनियादी अधिकार है, लेकिन यहां लोगों को अपने ही अधिकार के लिए पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। कई परिवार ऐसे भी हैं जो महंगे टैंकर खरीदने में सक्षम नहीं हैं और उन्हें गंदे या असुरक्षित जल स्रोतों का सहारा लेना पड़ रहा है।

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भ्रष्टाचार और लापरवाही ने बिगाड़ी व्यवस्था

क्षेत्र के लोगों ने जल योजनाओं में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि योजनाओं के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन धरातल पर उसका लाभ जनता तक नहीं पहुंचा। कई स्थानों पर अधूरे कार्य वर्षों से पड़े हैं, जबकि जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजी कार्रवाई में व्यस्त दिखाई देते हैं।

लोगों का मानना है कि जब तक सरकार जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय नहीं करेगी, तब तक जल संकट का समाधान संभव नहीं है। केवल घोषणाएं और विज्ञापन जनता की प्यास नहीं बुझा सकते।

शिकायतों के बावजूद नहीं हो रही कार्रवाई

स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन और जलदाय विभाग के अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। विभागीय अधिकारी हर बार जल्द समाधान का आश्वासन देकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं।

जनता का आरोप है कि प्रशासन की उदासीनता के कारण हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। लोगों में अब गुस्सा खुलकर सामने आने लगा है। कई क्षेत्रों में नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो वे उग्र आंदोलन और चक्का जाम करने को मजबूर होंगे।

भीषण गर्मी ने बढ़ाई मुश्किलें

राजस्थान में लगातार बढ़ते तापमान ने जल संकट को और भयावह बना दिया है। 45 डिग्री से ऊपर पहुंचते तापमान के बीच पानी की कमी लोगों की जिंदगी पर सीधा असर डाल रही है। डॉक्टर लगातार अधिक पानी पीने की सलाह दे रहे हैं, लेकिन जिन घरों में पीने तक का पानी उपलब्ध नहीं है, वहां हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं।

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विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते जल प्रबंधन और वितरण व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में यह संकट और गंभीर हो सकता है।

जनता पूछ रही— आखिर कब मिलेगा पानी?

भरतपुर और डीग की जनता अब सरकार और प्रशासन से एक ही सवाल पूछ रही है कि आखिर उन्हें नियमित जलापूर्ति कब मिलेगी? वर्षों से अधूरी योजनाओं, भ्रष्टाचार और लापरवाही के कारण लोगों का भरोसा टूटता जा रहा है।

जनता का कहना है कि अब केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर काम दिखना चाहिए। भीषण गर्मी में बूंद-बूंद पानी के लिए जूझ रहे लोग चाहते हैं कि सरकार और प्रशासन उनकी समस्या को गंभीरता से समझे और जल्द स्थायी समाधान सुनिश्चित करे।

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Author: यायावर

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