गायों को कटने से बचाने के लिए नया डिजिटल अभियान ; शंकराचार्य ने किया ‘गो-LX’ प्लेटफॉर्म का ऐलान
जोगिंदर सिंह उर्फ कालू छारा की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में चल रही गविष्ठी यात्रा के दौरान ज्योतिष्पीठाधीश्वर अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गौरक्षा को लेकर एक बड़ा और चर्चित ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि अब गायों की खरीद-बिक्री के लिए एक विशेष डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया जाएगा, जिसका नाम “गो-LX” रखा जाएगा। यह व्यवस्था ऑनलाइन सामान बेचने वाली वेबसाइटों की तर्ज पर विकसित की जाएगी, लेकिन इसका उद्देश्य पूरी तरह गौसंरक्षण और गौसेवा को समर्पित होगा।
शंकराचार्य ने स्पष्ट कहा कि यदि कोई हिंदू परिवार किसी मजबूरी या आर्थिक कारणों से अपनी गाय रखना नहीं चाहता, तो उसे अब ऐसे लोगों के पास बेचने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, जिनके बारे में संदेह हो कि वे गाय को कटने के लिए ले जा सकते हैं। इसके बजाय वह व्यक्ति “गो-LX” प्लेटफॉर्म पर अपनी गाय की जानकारी साझा करेगा और संस्था उससे संपर्क कर गाय को खरीद लेगी।
यह घोषणा सामने आते ही धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। गौरक्षा से जुड़े संगठनों ने इसे एक नई पहल बताते हुए स्वागत किया है, जबकि सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे पर बहस शुरू हो गई है।
क्या है ‘गो-LX’ प्लेटफॉर्म की पूरी योजना?
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बताया कि “गो-LX” केवल एक वेबसाइट नहीं होगी, बल्कि यह देशभर में गौसेवा से जुड़े लोगों और संस्थाओं को जोड़ने वाला डिजिटल नेटवर्क बनेगा।
उन्होंने कहा कि कई बार ग्रामीण क्षेत्रों में लोग आर्थिक तंगी, बीमारी, खेती की समस्या या अन्य पारिवारिक कारणों से गाय बेचने को मजबूर हो जाते हैं। ऐसे में उनके सामने उचित विकल्प नहीं होता। इसी कमजोरी का फायदा उठाकर कुछ लोग गायों को खरीदकर अवैध कटान तक पहुंचा देते हैं।
शंकराचार्य के अनुसार, नई व्यवस्था में यदि कोई व्यक्ति अपनी गाय बेचना चाहता है तो वह वेबसाइट पर गाय की जानकारी, फोटो और स्थान साझा करेगा। इसके बाद संस्था या गौसेवा से जुड़े लोग संपर्क कर गाय खरीदेंगे और उसकी सेवा-संभाल की जिम्मेदारी लेंगे।
उन्होंने दावा किया कि इस योजना से हजारों गायों को कटने से बचाया जा सकेगा और गौशालाओं को भी नई दिशा मिलेगी।
“हिंदू कभी गाय को कटने के लिए नहीं बेचता”
अपने संबोधन के दौरान शंकराचार्य ने उन चर्चाओं पर भी प्रतिक्रिया दी, जिनमें यह कहा जा रहा था कि यदि मुसलमान गाय खरीदना बंद कर देंगे तो हिंदू पशुपालकों को आर्थिक नुकसान होगा।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर इस तरह का नैरेटिव फैलाया जा रहा है कि हिंदू अपनी गाय बेचने में परेशान हैं, क्योंकि अब खरीदार कम हो रहे हैं। इस पर उन्होंने कड़ा जवाब देते हुए कहा कि कोई भी हिंदू जानबूझकर अपनी गाय किसी कसाई को नहीं बेचता।
शंकराचार्य ने कहा कि एक हिंदू अपनी गाय को परिवार का हिस्सा मानता है। वह उसे केवल इस विश्वास पर बेचता है कि आगे उसकी सेवा होगी। यदि उसे यह पता चल जाए कि गाय को काटा जाएगा, तो वह किसी भी कीमत पर उसे नहीं बेचेगा।
उनके इस बयान को सभा में मौजूद लोगों ने जोरदार समर्थन दिया। कई संतों और गौसेवकों ने इसे “धार्मिक संवेदना से जुड़ा विषय” बताया।
गविष्ठी यात्रा के दौरान हुआ बड़ा ऐलान
इन दिनों शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती उत्तर प्रदेश में गविष्ठी यात्रा कर रहे हैं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य गौरक्षा, गौसंवर्धन और सनातन परंपराओं के संरक्षण का संदेश देना बताया जा रहा है।
सुल्तानपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में संत, गौसेवक और स्थानीय लोग मौजूद रहे। इसी मंच से “गो-LX” प्लेटफॉर्म की घोषणा की गई।
शंकराचार्य ने कहा कि वे इस अभियान में अकेले नहीं हैं। देशभर में बड़ी संख्या में ऐसे लोग जुड़े हैं, जो गौसेवा को धार्मिक कर्तव्य मानते हैं और इसके लिए आर्थिक सहयोग देने को तैयार हैं। उन्हीं लोगों के आग्रह और सहयोग से यह योजना आकार ले रही है।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यह प्लेटफॉर्म देश के विभिन्न राज्यों में कार्य करेगा और जरूरतमंद पशुपालकों को सीधा सहारा देने का प्रयास करेगा।
गौरक्षा संगठनों ने किया स्वागत
“गो-LX” की घोषणा के बाद कई गौरक्षा संगठनों और गौशाला संचालकों ने इस पहल का समर्थन किया है। उनका कहना है कि वर्तमान समय में बड़ी संख्या में बेसहारा और बूढ़ी गायें सड़कों पर घूमती दिखाई देती हैं। कई पशुपालक आर्थिक बोझ के कारण उन्हें छोड़ देते हैं।
ऐसे में यदि कोई संगठित डिजिटल प्लेटफॉर्म बनता है, जहां गायों की सुरक्षित खरीद और देखभाल सुनिश्चित हो सके, तो यह गौसंरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
कुछ संगठनों ने यह भी सुझाव दिया कि सरकार को भी ऐसी योजनाओं के साथ जुड़कर तकनीकी और प्रशासनिक सहयोग देना चाहिए, ताकि अवैध पशु तस्करी पर रोक लगाई जा सके।
सामाजिक और राजनीतिक बहस भी तेज
हालांकि इस घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे धार्मिक आस्था से जुड़ा सकारात्मक प्रयास बता रहे हैं, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि केवल भावनात्मक अपील से समस्या का समाधान संभव नहीं होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि “गो-LX” प्लेटफॉर्म को व्यवस्थित तरीके से चलाया गया और इसमें पारदर्शिता रखी गई, तो यह ग्रामीण पशुपालकों के लिए मददगार साबित हो सकता है। लेकिन इसके लिए मजबूत नेटवर्क, पर्याप्त गौशालाएं और आर्थिक संसाधनों की भी आवश्यकता होगी।
राजनीतिक हलकों में भी इस बयान को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। क्योंकि उत्तर भारत में गौरक्षा और गौसंवर्धन लंबे समय से संवेदनशील और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली मुद्दा रहे हैं।
डिजिटल युग में गौरक्षा का नया मॉडल
विशेषज्ञों का मानना है कि “गो-LX” जैसे प्लेटफॉर्म पारंपरिक धार्मिक अभियानों को डिजिटल तकनीक से जोड़ने का प्रयास हैं। जिस तरह ई-कॉमर्स वेबसाइटों ने खरीद-बिक्री की व्यवस्था बदली है, उसी तरह अब धार्मिक और सामाजिक संगठन भी तकनीक का इस्तेमाल कर अपने अभियानों को व्यापक बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
यदि यह योजना सफल होती है तो इससे न केवल गौसंरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि पशुपालकों को भी एक वैकल्पिक और भरोसेमंद व्यवस्था मिल सकती है।
फिलहाल शंकराचार्य के इस ऐलान ने देशभर में नई बहस छेड़ दी है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि “गो-LX” प्लेटफॉर्म किस रूप में सामने आता है और जमीन पर कितना प्रभाव छोड़ पाता है।








