मॉनसून से पहले बदला मौसम का मिजाज : यूपी में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट, जून में भीषण गर्मी की आशंका बरकरार
कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। भीषण गर्मी और लू की मार झेल रहे प्रदेशवासियों को बारिश और तेज हवाओं से कुछ राहत मिलने लगी है, लेकिन मौसम विभाग की ताजा चेतावनी ने लोगों की चिंता भी बढ़ा दी है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने प्रदेश के कई जिलों में अगले दो दिनों तक तेज आंधी, गरज-चमक, भारी बारिश और ओलावृष्टि की संभावना जताते हुए अलर्ट जारी किया है। कई जिलों के लिए रेड अलर्ट घोषित किया गया है, जहां तेज हवाओं की रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
यूपी में मौसम का बड़ा बदलाव, कई जिलों में अलर्ट
मौसम विभाग के अनुसार 30 और 31 मई को पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के अनेक जिलों में मौसम बेहद खराब रह सकता है। तेज गर्जना, बिजली चमकने, धूल भरी आंधी और भारी बारिश की संभावना है। कई स्थानों पर ओलावृष्टि भी हो सकती है। विभाग ने लोगों से खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के आसपास खड़े होने से बचने की सलाह दी है।
पिछले कई सप्ताह से प्रदेश के अधिकांश जिलों में तापमान 42 से 47 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ था। लगातार पड़ रही भीषण गर्मी के कारण जनजीवन प्रभावित हो रहा था। ऐसे में बारिश और तेज हवाओं ने लोगों को गर्मी से राहत दी है, लेकिन अचानक बदले मौसम ने कई जगह नुकसान भी पहुंचाया है।
मॉनसून की दस्तक का इंतजार, लेकिन चिंता भी कम नहीं
देशभर में लोगों को दक्षिण-पश्चिम मॉनसून का इंतजार है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मॉनसून अरब सागर, लक्षद्वीप और बंगाल की खाड़ी के क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सामान्य परिस्थितियों में मॉनसून जून के पहले सप्ताह तक केरल पहुंच जाता है और इसके बाद धीरे-धीरे पूरे देश में फैलता है।
इस बार मॉनसून की प्रगति सामान्य बनी हुई है और अगले कुछ दिनों में इसके केरल पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। इसके बाद जून के अंत तक उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों में मॉनसून के पहुंचने का अनुमान है।
हालांकि मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि मॉनसून के आगमन की खबर राहत देने वाली जरूर है, लेकिन वर्षा की मात्रा को लेकर तस्वीर पूरी तरह उत्साहजनक नहीं दिखाई दे रही है।
सामान्य से कम बारिश की आशंका
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस वर्ष देश में मॉनसूनी वर्षा दीर्घकालिक औसत से कम रहने की संभावना है। अनुमान है कि चार महीनों के मानसून सीजन में वर्षा सामान्य स्तर से कम रह सकती है। देश के अधिकांश हिस्सों में औसत से कम बारिश होने का अनुमान व्यक्त किया गया है, जबकि पूर्वोत्तर भारत के कुछ राज्यों में सामान्य या उससे अधिक वर्षा हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सिक्किम, असम, मेघालय, मिजोरम, त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में सामान्य से बेहतर वर्षा दर्ज की जा सकती है। इसके विपरीत उत्तर भारत, मध्य भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप के कई हिस्सों में वर्षा औसत से कम रहने की संभावना बनी हुई है।
अल नीनो बढ़ा सकता है मुश्किलें
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस बार अल नीनो की स्थिति फिर से प्रभावी हो सकती है। अल नीनो प्रशांत महासागर के तापमान में होने वाला एक महत्वपूर्ण बदलाव है, जिसका असर भारत समेत एशिया के बड़े हिस्से के मौसम पर पड़ता है।
जब अल नीनो सक्रिय होता है तो भारत में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून कमजोर पड़ सकता है और वर्षा में कमी देखने को मिल सकती है। अतीत में भी कई वर्षों में अल नीनो के कारण देश को सूखे जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अल नीनो का प्रभाव बढ़ा तो कृषि, जल भंडारण और भूजल स्तर पर इसका असर पड़ सकता है।
जून में बढ़ सकती है लू की मार
मौसम विभाग ने जून महीने को लेकर भी चेतावनी जारी की है। विभाग के अनुसार उत्तर प्रदेश सहित देश के कई राज्यों में सामान्य से अधिक गर्मी पड़ सकती है। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, ओडिशा, गुजरात, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश के अनेक हिस्सों में लू के अधिक दिनों तक चलने की संभावना जताई गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वर्षा सामान्य से कम रहती है तो दिन का तापमान तेजी से बढ़ सकता है। इसके साथ ही रात के तापमान में भी कमी नहीं आएगी, जिससे लोगों को गर्म रातों का सामना करना पड़ सकता है। यह स्थिति स्वास्थ्य के लिए भी चुनौती बन सकती है।
तेज हवाओं ने कई जिलों में बढ़ाई परेशानी
प्रदेश में आए आंधी-तूफान ने कई जिलों में जनजीवन को प्रभावित किया है। तेज हवाओं के कारण कई स्थानों पर पेड़ उखड़ गए, बिजली के खंभे गिर गए और यातायात बाधित हुआ। कुछ जिलों में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई है।
राजधानी लखनऊ में तेज हवाओं और बारिश के दौरान कई इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला। सार्वजनिक स्थलों पर लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी तेज हवाओं और बारिश का व्यापक असर देखने को मिला।
ओलावृष्टि ने किसानों की बढ़ाई चिंता
प्रदेश के कुछ जिलों में ओलावृष्टि की घटनाएं भी सामने आई हैं। सीतापुर, झांसी, बदायूं समेत कई क्षेत्रों में गिरे ओलों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में खड़ी सब्जियों और बागवानी फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
मौसम विभाग ने बांदा, वाराणसी, गोंडा, श्रावस्ती, बरेली और पीलीभीत सहित कुछ अन्य जिलों में भी ओलावृष्टि की संभावना जताई है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को मौसम की ताजा जानकारी पर नजर बनाए रखने की सलाह दी है।
इन जिलों के लिए जारी हुआ रेड अलर्ट
मौसम विभाग ने चित्रकूट, बांदा, कौशांबी, फतेहपुर, प्रयागराज, सोनभद्र, मिर्जापुर, प्रतापगढ़, भदोही, हरदोई, फर्रुखाबाद, कन्नौज, लखीमपुर खीरी, कानपुर नगर, कानपुर देहात, उन्नाव, रायबरेली, सहारनपुर, शामली, मथुरा, आगरा, हाथरस, एटा, कासगंज, मैनपुरी, इटावा, औरैया, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, बरेली, रामपुर, पीलीभीत, संभल, बदायूं, जालौन, हमीरपुर, महोबा, झांसी और ललितपुर समेत अनेक जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है।
इन क्षेत्रों में तेज आंधी, भारी बारिश, बिजली गिरने और ओलावृष्टि की आशंका को देखते हुए विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है।
1 जून के बाद फिर बढ़ सकती है गर्मी
मौसम विभाग का अनुमान है कि 1 जून के बाद बारिश की गतिविधियों में कमी आ सकती है। इसके बाद प्रदेश में तापमान दोबारा बढ़ने की संभावना है। 3 और 4 जून से गर्मी का असर फिर तेज हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में मौसम लगातार बदलता रहेगा। इसलिए किसानों, यात्रियों और आम नागरिकों को मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान देना चाहिए। फिलहाल बारिश ने राहत जरूर दी है, लेकिन मॉनसून के पूरे सीजन को लेकर अभी भी कई तरह की चुनौतियां और अनिश्चितताएं बनी हुई हैं।








