घूस मांगी 50 हजार, जवाब में पांच ट्रेलर लेकर एआरटीओ पहुंचा मालिक!

जौनपुर एआरटीओ कार्यालय में पांच ट्रेलर लेकर पहुंचा वाहन मालिक और रिपोर्टर की तस्वीर

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कीरत यादव की रिपोर्ट

जौनपुर: वाहन रजिस्ट्रेशन के लिए कथित तौर पर घूस मांगने का मामला उस समय बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया, जब परेशान वाहन मालिक अपने पांच नए ट्रेलरों को लेकर सीधे एआरटीओ कार्यालय पहुंच गया। वाहन मालिक ने कार्यालय के मुख्य गेट के बाहर पांचों ट्रेलरों को इस तरह खड़ा कर दिया कि कुछ समय के लिए आवागमन बाधित हो गया। मामला बिगड़ता देख परिवहन विभाग के अधिकारियों में खलबली मच गई। आरोप है कि पांच नए ट्रेलरों के रजिस्ट्रेशन के लिए 50 हजार रुपये की कथित रिश्वत मांगी गई थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए विभागीय अधिकारियों ने वाहन मालिक से बातचीत की। वाहन मालिक के अनुसार, उसके सभी जरूरी दस्तावेज पहले ही जमा किए जा चुके थे, इसके बावजूद रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा रही थी। बाद में उसके वाहनों का रजिस्ट्रेशन किए जाने के बाद उसने कार्यालय के बाहर खड़े ट्रेलरों को वहां से हटाया।

करीब तीन करोड़ रुपये में खरीदे गए पांच नए ट्रेलर

मड़ियाहूं कोतवाली क्षेत्र की टीचर्स कॉलोनी निवासी विनय कुमार सिंह लंबे समय से ट्रक और ट्रेलर के कारोबार से जुड़े हैं। उनका कहना है कि वह वर्ष 1996 से ट्रक चलवाने का काम कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने करीब तीन करोड़ रुपये की लागत से पांच नए ट्रेलर खरीदे हैं।

इन वाहनों की खरीद के लिए उन्हें बैंक की बड़ी मासिक किस्त भी चुकानी है। वाहन मालिक के मुताबिक, पांचों ट्रेलरों पर उन्हें हर महीने करीब डेढ़ लाख रुपये बैंक को किस्त के रूप में देने हैं। ऐसे में नए वाहनों का समय पर रजिस्ट्रेशन होना उनके कारोबार के लिए बेहद जरूरी था।

नए ट्रेलर खरीदने के बाद विनय कुमार सिंह ने नियमानुसार उनके रजिस्ट्रेशन के लिए जरूरी दस्तावेज परिवहन विभाग के एआरटीओ कार्यालय में जमा कर दिए। उनका आरोप है कि कागजात जमा करने के बावजूद रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।

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रजिस्ट्रेशन के बदले 50 हजार रुपये मांगने का आरोप

वाहन मालिक का आरोप है कि जब वह रजिस्ट्रेशन के कागजात लेने के लिए परिवहन कार्यालय पहुंचे तो पटल पर मौजूद बाबू ने रजिस्ट्रेशन को लेकर आनाकानी शुरू कर दी। विनय सिंह के मुताबिक, जब उन्होंने रजिस्ट्रेशन में देरी का कारण पूछा तो उनसे कथित तौर पर पांचों वाहनों के लिए 10-10 हजार रुपये की मांग की गई।

इस तरह पांच ट्रेलरों के रजिस्ट्रेशन के लिए कुल 50 हजार रुपये की कथित घूस मांगे जाने का आरोप है। वाहन मालिक के अनुसार, उन्हें बताया गया कि यह रकम दिए जाने के बाद ही उनके वाहनों का रजिस्ट्रेशन हो सकेगा।

इतनी बड़ी रकम की मांग से वह परेशान हो गए। उनका कहना है कि उन्होंने मामले की शिकायत विभाग के उच्चाधिकारियों से भी की, लेकिन जब तत्काल कोई समाधान नहीं हुआ तो उन्होंने अलग तरीके से अपना विरोध दर्ज कराने का फैसला किया।

शिकायत का समाधान नहीं हुआ तो पांचों ट्रेलर लेकर पहुंचे कार्यालय

कथित रिश्वत मांगने से परेशान वाहन मालिक ने शुक्रवार को ऐसा कदम उठाया, जिसने परिवहन विभाग के अधिकारियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। वह अपने पांचों नए ट्रेलरों को लेकर एआरटीओ कार्यालय पहुंच गए।

कार्यालय के बाहर पहुंचने के बाद उन्होंने पांचों ट्रेलरों को मुख्य गेट के आसपास आड़े-तिरछे खड़ा कर दिया। बड़े वाहनों की मौजूदगी से कार्यालय के बाहर आवागमन प्रभावित हो गया। कुछ ही देर में वहां लोगों की नजर भी इस असामान्य स्थिति पर पड़ने लगी।

बताया गया कि पांच बड़े ट्रेलरों के कार्यालय के गेट के सामने खड़े होने की जानकारी जैसे ही परिवहन विभाग के अधिकारियों को हुई, वे मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने वाहन मालिक से बातचीत की और उसे समझाने का प्रयास किया।

अधिकारियों के सामने आई मुश्किल स्थिति

वाहन मालिक के विरोध के कारण एआरटीओ कार्यालय के बाहर पैदा हुई स्थिति ने विभागीय अधिकारियों को भी असहज कर दिया। एक ओर कार्यालय का कामकाज प्रभावित हो रहा था, तो दूसरी ओर मामला रिश्वत मांगने के गंभीर आरोप से जुड़ा था।

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वाहन मालिक का कहना था कि यदि उसके दस्तावेज पूरे हैं तो रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की जानी चाहिए। वह कथित तौर पर रिश्वत की मांग से नाराज था और इसी वजह से अपने पांचों ट्रेलरों को लेकर कार्यालय पहुंचा था।

मामला बढ़ता देख विभागीय स्तर पर वाहन मालिक से बातचीत की गई। इसके बाद उसके वाहनों से संबंधित रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी किए जाने की बात सामने आई। रजिस्ट्रेशन का काम पूरा होने के बाद विनय कुमार सिंह ने कार्यालय के बाहर खड़े अपने पांचों ट्रेलरों को वहां से हटा लिया।

रिश्वत के आरोपों की होगी जांच

मामले में परिवहन विभाग के आरआई अशोक यादव ने शिकायत को गंभीरता से लेने की बात कही है। उन्होंने बताया कि संबंधित अधिकारियों और पटल पर तैनात बाबू से बातचीत की गई है। वाहन मालिक द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच कराई जाएगी।

विभागीय अधिकारी के अनुसार, जांच के दौरान यदि रिश्वत मांगने के आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वाहन मालिक द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

सवालों के घेरे में परिवहन कार्यालय की कार्यप्रणाली

यह पूरा मामला केवल एक वाहन मालिक और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सरकारी कार्यालयों में आम लोगों के कामकाज को लेकर भी सवाल खड़े होते हैं। वाहन रजिस्ट्रेशन जैसी नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया में यदि किसी व्यक्ति से कथित तौर पर अतिरिक्त रकम की मांग की जाती है तो यह गंभीर विषय है।

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खास तौर पर तब, जब वाहन मालिक का कहना हो कि उसने सभी आवश्यक दस्तावेज पहले ही जमा कर दिए हैं। ऐसे में किसी काम को लंबित रखने या उसके लिए कथित रूप से अतिरिक्त धन की मांग किए जाने के आरोप की निष्पक्ष जांच जरूरी हो जाती है।

वहीं, इस मामले में वाहन मालिक द्वारा पांच बड़े ट्रेलरों को कार्यालय के बाहर खड़ा करके विरोध जताने का तरीका भी चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि सड़क और कार्यालय के प्रवेश मार्ग को बाधित करना सामान्य समाधान नहीं माना जा सकता, लेकिन इस घटना ने विभागीय अधिकारियों का ध्यान तत्काल उस शिकायत की ओर खींच दिया, जिसे वाहन मालिक के अनुसार पहले ही उठाया जा चुका था।

जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई

फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे अहम पहलू विभागीय जांच है। वाहन मालिक ने 50 हजार रुपये की कथित रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप लगाया है, जबकि विभाग ने जांच के बाद ही कार्रवाई की बात कही है। इसलिए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

इस घटना के बाद यह भी उम्मीद की जा रही है कि परिवहन विभाग रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और वाहन मालिकों की शिकायतों का समय पर समाधान करने पर अधिक ध्यान देगा। यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई विभाग की जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगी।

फिलहाल इतना जरूर है कि पांच नए ट्रेलरों के रजिस्ट्रेशन के लिए कथित 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप वाहन मालिक को इतना नागवार गुजरा कि वह अपने पांचों ट्रेलर लेकर एआरटीओ कार्यालय पहुंच गया। उसके इस विरोध के बाद मामला अधिकारियों के संज्ञान में आया और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी की गई। अब सबकी निगाहें विभागीय जांच और उसके परिणाम पर टिकी हैं।

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Author: यायावर

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