रिपोर्ट: कीरत यादव
JAUNPUR पुरानी पेंशन व्यवस्था (OPS) की बहाली, शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता समाप्त करने और सरकारी संस्थानों के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग को लेकर शिक्षकों ने शुक्रवार को जोरदार प्रदर्शन किया। अटेवा पेंशन बचाओ मंच के बैनर तले आयोजित इस आंदोलन में बड़ी संख्या में शिक्षक और महिला शिक्षिकाएं शामिल हुईं। प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की और पेंशन तिरंगा यात्रा निकालकर प्रशासन के माध्यम से सरकार तक अपनी मांगें पहुंचाईं।
शिक्षकों का कहना है कि पुरानी पेंशन व्यवस्था कर्मचारियों के सेवानिवृत्त जीवन की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। वहीं, लंबे समय से सेवा कर रहे शिक्षकों पर TET की अनिवार्यता को लेकर भी संगठन ने आपत्ति जताई। प्रदर्शनकारियों ने सरकारी संस्थानों के निजीकरण को आम लोगों, युवाओं और कर्मचारियों के हितों के विपरीत बताते हुए इस प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की।
पेंशन तिरंगा यात्रा से आंदोलन को दिया व्यापक रूप
शुक्रवार को शाम करीब 4 बजे शुरू हुआ प्रदर्शन लगभग 5:30 बजे तक चला। इस दौरान शिक्षकों ने पेंशन तिरंगा यात्रा निकाली। यात्रा अंबेडकर तिराहे से शुरू होकर निर्धारित मार्ग से गुजरते हुए कलेक्ट्रेट परिसर पहुंची। यात्रा के दौरान शिक्षक हाथों में तिरंगा और मांगों से संबंधित संदेश लेकर आगे बढ़े।
यात्रा के दौरान शिक्षकों ने पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने सहित विभिन्न मांगों के समर्थन में नारे लगाए। प्रदर्शन में महिला शिक्षिकाओं की भी उल्लेखनीय भागीदारी रही। शिक्षकों का कहना था कि पेंशन केवल सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाला आर्थिक लाभ नहीं, बल्कि वर्षों तक सरकारी सेवा देने वाले कर्मचारियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा विषय है।
अंबेडकर तिराहे से शुरू हुई यात्रा जोगियापुर, जैसीज चौराहा और रोडवेज तिराहे से होते हुए कलेक्ट्रेट परिसर पहुंची। यहां शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर प्रशासनिक अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से सरकार से मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए आवश्यक कार्रवाई करने की अपील की गई।
पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने की मांग
अटेवा पेंशन बचाओ मंच की अध्यक्ष इंदु यादव ने कहा कि वर्ष 2004 के बाद बड़ी संख्या में शिक्षक, कर्मचारी और अधिकारियों को पुरानी पेंशन व्यवस्था से अलग कर नई पेंशन व्यवस्था (NPS) के दायरे में लाया गया। संगठन का तर्क है कि नई पेंशन व्यवस्था को लेकर कर्मचारियों के बीच सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता बनी हुई है।
शिक्षकों का कहना है कि सरकारी सेवाओं में कार्यरत कर्मचारी अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए शासन की योजनाओं और नीतियों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षा विभाग से जुड़े शिक्षक बच्चों को शिक्षित करने के साथ-साथ विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों और अभियानों में भी अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं। ऐसे में सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें पर्याप्त सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिलना जरूरी है।
संगठन ने सरकार से पुरानी पेंशन व्यवस्था को फिर से लागू करने की मांग दोहराते हुए कहा कि कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए पेंशन व्यवस्था में आवश्यक बदलाव किया जाना चाहिए।
लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों पर TET की अनिवार्यता का विरोध
प्रदर्शन के दौरान शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET की अनिवार्यता का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। अटेवा पदाधिकारियों ने कहा कि देशभर में बड़ी संख्या में शिक्षक इस व्यवस्था से प्रभावित हो रहे हैं। संगठन का दावा है कि इनमें ऐसे शिक्षक भी शामिल हैं, जो दो से ढाई दशक तक शिक्षा विभाग में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
शिक्षकों का कहना है कि लंबे समय से विद्यालयों में अध्यापन कार्य कर रहे अनुभवी शिक्षकों के लिए TET की अनिवार्यता व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा कर सकती है। उनका तर्क है कि वर्षों की सेवा और अनुभव के बावजूद दोबारा पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता पर सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए।
संगठन ने मांग की कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए TET की अनिवार्यता से संबंधित प्रावधानों पर संवेदनशीलता के साथ विचार किया जाए। शिक्षकों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ-साथ अनुभवी शिक्षकों के हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
सरकारी संस्थानों के निजीकरण पर भी जताई आपत्ति
शिक्षकों ने सरकारी संस्थानों के निजीकरण का विरोध करते हुए इसे भी अपनी प्रमुख मांगों में शामिल किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सरकारी संस्थान केवल सेवाएं उपलब्ध कराने वाले केंद्र नहीं हैं, बल्कि आम जनता के लिए समान अवसर और सार्वजनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
संगठन के अनुसार सरकारी संस्थानों के निजीकरण का प्रभाव कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहता। इसका असर छात्रों, युवाओं और आम नागरिकों पर भी पड़ सकता है। शिक्षकों ने सरकार से मांग की कि सार्वजनिक संस्थानों को मजबूत किया जाए और निजीकरण की प्रक्रिया पर रोक लगाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाएं।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े संस्थानों की जवाबदेही जनता के प्रति बनी रहनी चाहिए। इसलिए सरकारी संस्थानों की भूमिका को कम करने के बजाय उन्हें आवश्यक संसाधन और सुविधाएं उपलब्ध कराकर मजबूत किया जाना चाहिए।
ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग
कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचने के बाद अटेवा पदाधिकारियों और प्रदर्शन में शामिल शिक्षकों ने प्रशासनिक अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली, शिक्षकों पर TET की अनिवार्यता समाप्त करने तथा सरकारी संस्थानों के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग प्रमुख रूप से शामिल रही।
शिक्षकों ने कहा कि इन मुद्दों को लेकर उनका आंदोलन किसी एक दिन के प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। संगठन आगे भी लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को उठाता रहेगा। पदाधिकारियों ने सरकार से आग्रह किया कि कर्मचारियों और शिक्षकों से जुड़े इन मुद्दों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।
मांगों के समर्थन में आंदोलन जारी रखने का ऐलान
अटेवा पेंशन बचाओ मंच ने स्पष्ट किया कि पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली उसके प्रमुख मुद्दों में शामिल है। संगठन का कहना है कि कर्मचारियों के भविष्य की आर्थिक सुरक्षा, शिक्षकों से जुड़ी पात्रता संबंधी नीतियां और सरकारी संस्थानों की सार्वजनिक भूमिका जैसे विषय व्यापक जनहित से जुड़े हैं।
शुक्रवार को हुए प्रदर्शन के माध्यम से शिक्षकों ने अपनी मांगों को एक बार फिर प्रमुखता से सामने रखा। पेंशन तिरंगा यात्रा के जरिए संगठन ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि पुरानी पेंशन व्यवस्था, TET की अनिवार्यता और निजीकरण जैसे मुद्दों पर वह आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाता रहेगा।
शिक्षकों का कहना है कि सरकार को कर्मचारियों और शिक्षकों की मांगों पर संवाद के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए। प्रदर्शन के बाद संगठन ने संकेत दिया कि यदि मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती है तो भविष्य में भी चरणबद्ध तरीके से आंदोलन जारी रखा जाएगा।

























