शनि मूर्ति स्थापना में उमड़ा आस्था का सैलाब, गौरक्षा संकल्प के साथ हजारों भक्तों ने किया भंडारे में प्रसाद ग्रहण
जोगिंदर सिंह उर्फ कालू छारा की रिपोर्ट
हरियाणा के झज्जर जिले स्थित छारा बस्ती में बाबा जत्ती वाले आश्रम पर आयोजित शनि भगवान की मूर्ति स्थापना समारोह आस्था, गौसेवा और सामाजिक एकता का बड़ा केंद्र बन गया। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा सहित कई राज्यों से पहुंचे गौरक्षकों, समाजसेवियों और भक्तों ने बाबा सागर नाथ का आशीर्वाद लिया और शनि भगवान की प्रतिमा स्थापना कार्यक्रम में भागीदारी निभाई। पूरे आयोजन में गौमाता के सम्मान, सुरक्षा और उन्हें राष्ट्रीय पशु घोषित किए जाने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई।
आश्रम परिसर में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की और शनि भगवान की प्रतिमा स्थापना के दौरान जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। कार्यक्रम में पहुंचे गौसेवकों ने गौरक्षा को समाज की सबसे बड़ी जिम्मेदारी बताते हुए लोगों से इस अभियान से जुड़ने की अपील भी की।
समारोह में मुख्य रूप से समाजसेवी एवं गौरक्षक कालू छारा, मनदीप खरकड़ा, हरि राजपूत, गौ भगत धर्म दास, अनिल शेरा बादली, अजय आसौदा, बाबा लाल नाथ पटौदी, गौरक्षक दुष्यंत यूपी, कलवा सोनीपत, गौ पुत्र रोहित गोधरा नजफगढ़, लाला प्रधान छारा, अमरजीत पहलवान, ताऊ ओमप्रकाश, समाजसेवी प्रमोद आर्य, हरविंदर काला, जोगिंदर कालू छारा, गौ सेवक सचिन महाराणा, गौरक्षक जगदीश, रणधीर भट्ट लोटा, भगत सेवक दलजीत ढीला, अनिल लीला, संजीत दलाल, धर्मबीर दलाल, भविष्य दलाल, अंस दलाल, गौ पुत्र सुनील दलाल, सोमबीर दलाल, गौ भगत नवीन राठी, गौ सेवक काला, नवीन पंडित, सुनील लल्लू, बबलू बाबा गौ भगत और सुमित संगवान खरकड़ा समेत बड़ी संख्या में गौभक्त उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में शामिल गौरक्षक टीमों ने कहा कि गौमाता भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की आत्मा हैं। आज जरूरत इस बात की है कि समाज केवल भावनात्मक रूप से ही नहीं, बल्कि व्यवहारिक रूप से भी गौसेवा और गौसंरक्षण के लिए आगे आए। कई वक्ताओं ने केंद्र सरकार से गौमाता को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग दोहराते हुए कहा कि इससे गौहत्या और अवैध तस्करी पर सख्त नियंत्रण संभव होगा।
आयोजन का सबसे प्रमुख आकर्षण शनि भगवान की मूर्ति स्थापना रही। वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच मूर्ति की स्थापना की गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने तेल, तिल और पुष्प अर्पित कर पूजा की। बाबा सागर नाथ ने उपस्थित भक्तों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि धर्म, सेवा और गौरक्षा एक-दूसरे से जुड़े हुए विषय हैं। समाज तभी मजबूत बनेगा जब लोग जीवों के प्रति दया और सेवा की भावना अपनाएंगे।
कार्यक्रम में बाबा सुनील महाराज भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि गौमाता सम्मान सुरक्षा आवाहन अभियान के तहत उन्होंने 42 दिनों का विशेष व्रत रखा था, जिसे 16 मई को गंगाजल ग्रहण कर पूर्ण किया गया। बाबा सुनील महाराज ने कहा कि गौरक्षा केवल आंदोलन नहीं बल्कि आध्यात्मिक चेतना का विषय है। उन्होंने लोगों से नशामुक्ति, गौसेवा और धार्मिक जागरूकता के लिए समाज में सकारात्मक भूमिका निभाने का आह्वान किया।
समारोह के दौरान विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया, जिसमें करीब 1500 से अधिक लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। विशेष रूप से भट्टों पर कार्य करने वाले गरीब मजदूर परिवारों, महिलाओं और बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई। आयोजकों ने बताया कि सेवा भाव से किया गया यह भंडारा सामाजिक समरसता का प्रतीक है। लोगों ने कतारबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया और पूरे आयोजन में अनुशासन एवं सहयोग की मिसाल देखने को मिली।
आश्रम परिसर को रंग-बिरंगी रोशनी और धार्मिक झंडों से सजाया गया था। ढोल-नगाड़ों और भजन-कीर्तन के बीच श्रद्धालु देर रात तक भक्ति में डूबे रहे। कई गौभक्तों ने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक और सामाजिक आयोजन समाज में एकजुटता और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देते हैं।
गौरतलब है कि हाल के वर्षों में गौरक्षा को लेकर देशभर में कई सामाजिक अभियान चलाए जा रहे हैं। हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में युवा गौसेवा से जुड़ रहे हैं। छारा बस्ती का यह आयोजन भी उसी कड़ी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। आयोजन समिति ने बताया कि भविष्य में भी गौसेवा, धार्मिक जागरूकता और सामाजिक सहयोग के लिए ऐसे कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाएंगे।
समारोह के अंत में सभी भक्तों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया गया। आयोजकों ने कहा कि हजारों लोगों की सहभागिता ने यह साबित कर दिया है कि गौमाता के सम्मान और धर्म के प्रति समाज में गहरी आस्था आज भी जीवित है। बाबा जत्ती वाले आश्रम में आयोजित यह कार्यक्रम श्रद्धा, सेवा और सामाजिक एकता का एक यादगार उदाहरण बन गया।








