खास बात

राम मंदिर चढ़ावा चोरी जांच में नया मोड़, टिन्नू यादव की पुलिस रिमांड पर उठे सवाल

दुर्गा प्रसाद शुक्ला की रिपोर्ट

अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस मामले से जुड़े नए सवाल भी सामने आने लगे हैं। पुलिस अब तक इस प्रकरण में गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों में से छह को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ कर चुकी है। वहीं, मामले के दो चर्चित आरोपियों रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और उसके रिश्तेदार मनीष यादव को अब तक पुलिस रिमांड पर नहीं लिए जाने को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि पुलिस या जांच एजेंसियों की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है।

आठ गिरफ्तारियों के बाद जांच लगातार आगे बढ़ी

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस ने 26 जून को आठ लोगों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद जांच को आगे बढ़ाते हुए अलग-अलग चरणों में कई आरोपियों को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई। प्रारंभिक दौर में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय से पूछताछ की गई।

इसके बाद मंगलवार, 14 जुलाई को अदालत ने राम मंदिर में गणना प्रभारी रहे सिंडिकेट बैंक के सेवानिवृत्त कर्मचारी सुभाष श्रीवास्तव और आरोपी रमाशंकर मिश्र की 14 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड मंजूर की। न्यायालय के आदेश के बाद बुधवार सुबह दोनों आरोपियों को जेल से पुलिस अभिरक्षा में लेकर पूछताछ के लिए रवाना हुई।

टिन्नू यादव और मनीष यादव की रिमांड नहीं होने पर उठे सवाल

जांच की इस पूरी प्रक्रिया के बीच सबसे अधिक चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि गिरफ्तार आरोपियों में शामिल रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और उसके रिश्तेदार मनीष यादव को अब तक पुलिस कस्टडी रिमांड पर क्यों नहीं लिया गया। सोशल मीडिया पर कई लोग इसे लेकर सवाल उठा रहे हैं और तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

कई पोस्टों में यह दावा भी किया जा रहा है कि जिन आरोपियों से पुलिस ने कस्टडी में पूछताछ की, उनमें इन दोनों को शामिल नहीं किया गया। हालांकि इन दावों की किसी भी सरकारी एजेंसी अथवा पुलिस विभाग ने पुष्टि नहीं की है।

सोशल मीडिया पर दावों ने बढ़ाई चर्चाएं

सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों पर कुछ लोगों द्वारा यह भी दावा किया जा रहा है कि जिस प्रकार विशेष जांच दल (एसआईटी) ने पहले श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को किसी भी आपराधिक भूमिका से मुक्त बताया था, उसी प्रकार उनके करीबी बताए जाने वाले टिन्नू यादव को भी जांच में राहत मिल सकती है।

हालांकि यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि यह केवल सोशल मीडिया पर चल रहे दावे हैं। पुलिस, एसआईटी अथवा किसी सक्षम जांच एजेंसी ने अब तक इस प्रकार का कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। इसलिए इन दावों को तथ्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

पुलिस ने अब तक नहीं दिया कोई स्पष्टीकरण

जांच एजेंसियों की ओर से अभी तक यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि टिन्नू यादव और मनीष यादव की पुलिस कस्टडी रिमांड क्यों नहीं मांगी गई या भविष्य में मांगी जाएगी अथवा नहीं। ऐसे में फिलहाल इस विषय पर चल रही चर्चाएं केवल अटकलों तक सीमित हैं।

कानूनी विशेषज्ञों का भी मानना है कि किसी आरोपी को पुलिस रिमांड पर लेना पूरी तरह जांच की आवश्यकता, उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायालय की अनुमति पर निर्भर करता है। इसलिए केवल रिमांड न मिलने या न मांगे जाने के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं माना जा सकता।

सुरक्षा व्यवस्था में भी बड़े बदलाव की तैयारी

चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट मंदिर की आंतरिक व्यवस्थाओं की भी व्यापक समीक्षा कर रहा है। सूत्रों के अनुसार अब निजी सुरक्षा गार्डों, हाउसकीपिंग कर्मचारियों और अन्य संविदा कर्मियों की संख्या को नियंत्रित करने की योजना बनाई जा रही है।

राम मंदिर की सुरक्षा पहले से ही केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के विभिन्न सुरक्षा बलों के जिम्मे है। यहां सीआरपीएफ की छह कंपनियों के अलावा एसएसएफ, पीएसी तथा सिविल पुलिस के अधिकारी और जवान लगातार तैनात रहते हैं। इसके अतिरिक्त श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ट्रस्ट ने निजी सुरक्षा एजेंसी आईएसआई के माध्यम से भी बड़ी संख्या में सुरक्षा गार्ड नियुक्त किए हैं।

तीन एजेंसियों के जिम्मे है सफाई व्यवस्था

मंदिर परिसर और उससे जुड़े क्षेत्रों की सफाई व्यवस्था तीन अलग-अलग एजेंसियों को सौंपी गई है। इनमें बीवीजी इंडिया आधुनिक मशीनों और उपकरणों के साथ मुख्य मंदिर तथा परकोटा क्षेत्र की सफाई का कार्य करती है, जबकि अन्य एजेंसियां मंदिर परिसर के बाहरी हिस्सों में साफ-सफाई की जिम्मेदारी निभाती हैं।

इसके अलावा निजी सुरक्षा गार्ड केवल मुख्य मंदिर तक सीमित नहीं हैं। उनकी तैनाती तीर्थ क्षेत्र भवन, बाग बिजैसी स्थित कार्यालय, श्रीराम निवास मंदिर, रामसेवक पुरम तथा विहिप तीर्थ यात्री निवास सहित कई अन्य परिसरों में भी की गई है। यही कारण है कि सुरक्षा कर्मियों की संख्या काफी अधिक मानी जा रही है।

नए महासचिव ने मंगवाए अनुबंधों का पूरा ब्योरा

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नए महासचिव कृष्ण मोहन ने सभी निजी एजेंसियों के अनुबंधों का विस्तृत विवरण तलब किया है। साथ ही इन एजेंसियों को किए जा रहे भुगतान और उनकी कार्यप्रणाली का भी आकलन शुरू करा दिया गया है।

सूत्रों के अनुसार ट्रस्ट यह भी समीक्षा कर रहा है कि वर्तमान परिस्थितियों में सुरक्षा गार्डों और सफाई कर्मियों की इतनी बड़ी संख्या वास्तव में आवश्यक है या नहीं। समीक्षा के बाद कर्मचारियों की संख्या और कार्य व्यवस्था में बदलाव किए जा सकते हैं।

हाउसकीपिंग कर्मियों का भी तैयार हो रहा लेखा-जोखा

जानकारी के अनुसार ट्रस्ट ऐसे कर्मचारियों का अलग से विवरण तैयार करा रहा है, जिन्हें हाउसकीपिंग के पद पर नियुक्त किया गया था, लेकिन बाद में अन्य व्यवस्थाओं में लगाया गया। अब प्रस्ताव है कि ऐसे कर्मचारियों से उनकी नियुक्ति के अनुरूप ही कार्य कराया जाए।

बताया जा रहा है कि इसी संभावित व्यवस्था परिवर्तन के कारण चढ़ावा गणना से जुड़े कुछ कर्मचारियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। यदि भविष्य में उन्हें पुनः अपने मूल कार्य पर लौटना पड़ा तो उनकी वर्तमान जिम्मेदारियों में बदलाव आ सकता है।

जांच और प्रशासनिक सुधार दोनों पर नजर

राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण अब केवल आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है। इसके साथ-साथ मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों की नियुक्ति, कार्य आवंटन और निजी एजेंसियों की भूमिका की भी व्यापक समीक्षा शुरू हो चुकी है।

दूसरी ओर, टिन्नू यादव और मनीष यादव की पुलिस रिमांड को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब भी फिलहाल जांच एजेंसियों के पास सुरक्षित है। जब तक पुलिस इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं देती या न्यायालय की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती, तब तक सोशल मीडिया पर चल रहे दावों और अटकलों की पुष्टि नहीं मानी जा सकती।

ऐसे में पूरे मामले पर सभी की निगाहें पुलिस की आगामी कार्रवाई और न्यायालय में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और प्रशासनिक निर्णय इस बहुचर्चित प्रकरण की तस्वीर को और अधिक स्पष्ट कर सकते हैं।

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