मौसम का डबल अटैक : कहीं आंधी-बारिश का कहर, कहीं लू का वार, जून में जल्दी मानसून की उम्मीद
सर्वेश यादव की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश में मौसम ने एक बार फिर अपना बेहद बदलता हुआ और खतरनाक मिजाज दिखाना शुरू कर दिया है। प्रदेश के लोगों को आने वाले दिनों में मौसम के दो अलग-अलग रूपों का सामना करना पड़ सकता है। एक ओर कई जिलों में तेज आंधी, बारिश, मेघगर्जन और वज्रपात का खतरा मंडरा रहा है, तो दूसरी ओर पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश भीषण गर्मी और लू की चपेट में आने वाले हैं। मौसम विभाग और मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 16 मई के बाद प्रदेश में मौसम तेजी से करवट लेगा और इसका असर आम जनजीवन से लेकर खेती-किसानी तक पर दिखाई देगा।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ अब धीरे-धीरे कमजोर पड़ रहा है। बीते कुछ दिनों में जिस कारण लोगों को हल्की बारिश और ठंडी हवाओं से राहत मिल रही थी, अब वह असर खत्म होने लगा है। जैसे-जैसे आसमान साफ होगा, वैसे-वैसे सूरज की तपिश और तेज होती जाएगी। वैज्ञानिकों का मानना है कि अगले कुछ दिनों में प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जिससे गर्मी बेहद खतरनाक रूप धारण कर सकती है।
27 जिलों में लू का रेड अलर्ट जैसा हाल
मौसम विभाग ने प्रदेश के 27 जिलों में लू चलने की चेतावनी जारी की है। प्रयागराज, वाराणसी, कानपुर, आगरा, इटावा, जालौन और आसपास के इलाकों में हालात सबसे अधिक गंभीर रहने की संभावना जताई गई है। इन जिलों में दिन के समय तेज पछुआ हवाएं चलेंगी, जो गर्मी को और ज्यादा खतरनाक बना देंगी। दोपहर के समय बाहर निकलना लोगों के लिए बेहद मुश्किल हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार केवल दिन में ही नहीं, बल्कि रात के तापमान में भी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। यानी लोगों को रात में भी गर्मी से राहत नहीं मिल पाएगी। उमस और गर्म हवाओं के कारण शहरों में बिजली की मांग बढ़ने की संभावना है, जबकि ग्रामीण इलाकों में पानी की समस्या भी गंभीर हो सकती है।
डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और चक्कर आने जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ सकती हैं। खासकर बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों को ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होगी।
कई जिलों में आंधी और वज्रपात का खतरा
जहां एक तरफ गर्मी लोगों को परेशान करेगी, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के कई हिस्सों में तेज आंधी और बारिश भी मुश्किलें बढ़ा सकती है। मौसम विभाग ने आगरा, मथुरा, कानपुर, कुशीनगर, वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर, चंदौली, मिर्जापुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, प्रयागराज, कौशांबी और फतेहपुर समेत कई जिलों में मेघगर्जन और वज्रपात की संभावना जताई है।
इसके अलावा पश्चिमी यूपी के सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर, हापुड़ और बुलंदशहर जैसे जिलों में भी तेज हवाओं के साथ मौसम खराब हो सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक कई स्थानों पर हवा की रफ्तार 50 से 65 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।
तेज हवाओं के कारण पेड़ गिरने, बिजली के खंभे टूटने और यातायात प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। पिछले दिनों आए तूफान और बारिश में प्रदेश के कई जिलों में भारी तबाही देखने को मिली थी, जिसमें जनहानि भी हुई थी। ऐसे में प्रशासन इस बार पहले से ज्यादा सतर्क दिखाई दे रहा है।
राजधानी लखनऊ में भी बढ़ेगी तपिश
लखनऊ में भी मौसम लगातार करवट बदल रहा है। मौसम विभाग के अनुसार राजधानी में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है, जबकि न्यूनतम तापमान 28 डिग्री तक जा सकता है। दिन में तेज धूप और उमस लोगों को परेशान करेगी, हालांकि कुछ समय के लिए बादल और हवाएं थोड़ी राहत दे सकती हैं।
राजधानी में भी गर्मी का असर लगातार बना रहेगा। सड़कें दोपहर के समय लगभग सुनसान दिखाई दे सकती हैं और लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकलेंगे।
प्रशासन अलर्ट मोड पर
गर्मी और हीट स्ट्रोक के बढ़ते खतरे को देखते हुए प्रदेश सरकार और प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गए हैं। सभी जिलों के अस्पतालों को जरूरी दवाइयां और पर्याप्त इंतजाम रखने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग को विशेष निगरानी रखने के लिए कहा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
राहत आयुक्त कार्यालय ने लोगों से अपील की है कि वे दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक धूप में निकलने से बचें। प्रशासन ने ज्यादा से ज्यादा पानी पीने, हल्के कपड़े पहनने और शरीर को हाइड्रेट रखने की सलाह दी है।
इसके साथ ही जिन इलाकों में आंधी और बारिश की संभावना है, वहां लोगों को पेड़ों, बिजली के खंभों और खुले मैदानों से दूर रहने की चेतावनी दी गई है। वज्रपात के दौरान मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग और खुले स्थानों में खड़े रहने से भी बचने की सलाह दी गई है।
समय से पहले मानसून आने की उम्मीद
भीषण गर्मी के बीच एक राहत भरी खबर भी सामने आ रही है। मौसम विभाग के अनुसार इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से पहले दस्तक दे सकता है। अनुमान है कि 26 मई तक मानसून केरल तट पर पहुंच सकता है, जबकि अगले 24 घंटों में अंडमान सागर और निकोबार द्वीप समूह में मानसून की गतिविधियां तेज हो सकती हैं।
आमतौर पर केरल में मानसून 1 जून के आसपास पहुंचता है, लेकिन इस बार इसकी एंट्री जल्दी होने की संभावना मौसम वैज्ञानिकों को उत्साहित कर रही है। यदि मानसून तेजी से आगे बढ़ता है, तो जून के दूसरे सप्ताह तक उत्तर प्रदेश में भी अच्छी बारिश शुरू हो सकती है।
प्री-मानसून बारिश से किसानों को उम्मीद
दक्षिण भारत में शुरू हुई प्री-मानसून बारिश का असर जल्द ही उत्तर भारत में भी दिखाई दे सकता है। मौसम विभाग का कहना है कि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बन रहे सिस्टम के कारण वातावरण में नमी बढ़ रही है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश में बार-बार आंधी और बारिश जैसी स्थितियां बन रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून सामान्य से पहले पहुंचता है तो खरीफ फसलों को बड़ा फायदा मिल सकता है। धान की खेती करने वाले किसानों के लिए यह मौसम काफी राहत देने वाला साबित हो सकता है। समय पर बारिश होने से सिंचाई का दबाव कम होगा और उत्पादन बेहतर होने की संभावना बढ़ेगी।
जून के दूसरे सप्ताह तक झमाझम बारिश के संकेत
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार यदि मानसून की रफ्तार इसी तरह बनी रही, तो जून के दूसरे सप्ताह तक उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में झमाझम बारिश शुरू हो सकती है। वहीं 18 जून तक पूरे प्रदेश में मानसून के प्रभावी होने का अनुमान जताया गया है।
हालांकि मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून आने से पहले लोगों को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ेगा। यानी अगले कुछ दिन प्रदेशवासियों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहने वाले हैं। एक तरफ लू और उमस लोगों को परेशान करेगी, तो दूसरी तरफ अचानक आने वाली आंधी और बारिश भी मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं। ऐसे में मौसम विभाग लगातार लोगों को सतर्क रहने और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करने की सलाह दे रहा है।








