रिपोर्ट: इरफान अली लारी
गोरखपुर में ‘लेडी डॉन’ के नाम से चर्चित अंशिका सिंह की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया के जरिए कथित हनीट्रैप, ब्लैकमेलिंग, सेक्सटॉर्शन और रंगदारी के नेटवर्क को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस जांच के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार अंशिका पर आरोप है कि वह सोशल मीडिया और मैसेंजर ऐप के जरिए लोगों से संपर्क बनाती थी, बातचीत को निजी स्तर तक ले जाती थी और फिर वीडियो कॉल के दौरान रिकॉर्ड की गई कथित आपत्तिजनक सामग्री का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए करती थी।
अंशिका के बारे में सोशल मीडिया पर यह दावा तेजी से वायरल हुआ कि उसके 150 से अधिक बॉयफ्रेंड थे। हालांकि पुलिस जांच में सामने आई कहानी कथित प्रेम संबंधों से कहीं अधिक गंभीर बताई जा रही है। जांच एजेंसियों को शक है कि सोशल मीडिया संपर्कों का इस्तेमाल कथित तौर पर लोगों को फंसाने और उनसे रकम वसूलने के लिए किया जाता था। इन आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
खूबसूरती और सोशल मीडिया को बनाया कथित जाल का माध्यम
गोरखपुर के हरपुर-बुदहट थाना क्षेत्र से जुड़ी अंशिका बाद में संतकबीरनगर के खलीलाबाद में किराये के मकान में रहने लगी थी। बताया जाता है कि परिवार के सदस्यों को उसकी गतिविधियों पर आपत्ति थी, जिसके बाद उसने अलग रहना शुरू कर दिया।
पुलिस जांच से जुड़ी जानकारी के मुताबिक अंशिका को जल्दी पैसा कमाने की चाहत थी। आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों से वह सोशल मीडिया पर सक्रिय थी और रील तथा अन्य डिजिटल सामग्री के जरिए अपनी पहचान बना रही थी। इसी दौरान वह मैसेंजर ऐप और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर युवकों से दोस्ती करती थी।
आरोप है कि सामान्य बातचीत के बाद संपर्क को वीडियो कॉल तक पहुंचाया जाता था। इसके बाद निजी बातचीत अथवा आपत्तिजनक गतिविधियों की कथित रिकॉर्डिंग कर ली जाती थी। बाद में इसी सामग्री के आधार पर लोगों को बदनाम करने अथवा उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की धमकी देने का आरोप है।
मुकदमे की धमकी देकर समझौते का दबाव
जांच में सामने आई जानकारी के अनुसार कथित तौर पर कुछ लोगों को दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट और अन्य गंभीर मामलों में फंसाने की धमकी दी जाती थी। आरोप है कि डर और सामाजिक प्रतिष्ठा बचाने के दबाव में कई लोग कथित तौर पर समझौते के नाम पर रकम देने को तैयार हो जाते थे।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि ऐसे कितने मामले थे, किन-किन लोगों को निशाना बनाया गया और कथित तौर पर कितनी रकम की वसूली हुई। मीडिया रिपोर्टों में पुलिस जांच के हवाले से करीब 150 लोगों से संपर्क या कथित वसूली की बात कही गई है। हालांकि इस संख्या और प्रत्येक मामले की स्वतंत्र पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही संभव होगी।
रिपोर्टों के मुताबिक कथित तौर पर प्रभावित लोगों में आम नागरिकों के साथ कुछ पुलिसकर्मियों के नाम भी जांच के दौरान सामने आए हैं। इनमें अयोध्या में तैनात एक क्षेत्राधिकारी समेत करीब 15 पुलिसकर्मियों का दावा भी विभिन्न रिपोर्टों में किया गया है। इन दावों की पुष्टि और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का निर्धारण पुलिस जांच का विषय है।
2021 से शुरू होने का दावा
पुलिस जांच से जुड़ी रिपोर्टों में अंशिका की कथित गतिविधियों की शुरुआत वर्ष 2021 के आसपास होने की बात सामने आई है। बताया गया कि सबसे शुरुआती मामलों में देवरिया के एक युवक के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया था। बाद में कथित तौर पर समझौते के नाम पर रकम लिए जाने की बात सामने आई।
इसके बाद वर्ष 2023 में अंशिका खलीलाबाद में किराये के मकान में रहने लगी। वहां देर रात युवकों के आने-जाने को लेकर विवाद की बात सामने आई। आरोप है कि मकान खाली करने के लिए दबाव बनाए जाने के बाद मकान मालिक से कथित तौर पर दो लाख रुपये लिए गए।
इसी अवधि में सूरज सिंह समेत पांच लोगों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराने और बाद में समझौते के लिए पैसे मांगने का आरोप भी सामने आया। खलीलाबाद के एक अन्य युवक प्रियांशु सिंह से कथित तौर पर फर्जी मुकदमे की धमकी देकर 50 हजार रुपये लेने की बात भी जांच में बताई गई है।
इन सभी मामलों की वास्तविकता और आरोपों की पुष्टि पुलिस द्वारा जुटाए जा रहे दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य और संबंधित पक्षों के बयान से होगी।
जन्मदिन के दिन हुई फायरिंग से खुला मामला
अंशिका के खिलाफ जांच का दायरा उस समय तेजी से बढ़ गया जब 20 जनवरी 2026 को गोरखपुर के सिंघड़िया क्षेत्र में फायरिंग की घटना हुई।
पुलिस के अनुसार एक निजी अस्पताल के मैनेजर विशाल मिश्रा से रंगदारी मांगने को लेकर विवाद हुआ था। आरोप है कि अंशिका और उसके साथी आकाश वर्मा ने विशाल से रकम की मांग की। रकम देने से इनकार करने के बाद विवाद बढ़ गया और कथित तौर पर अंशिका ने पिस्टल से फायरिंग कर दी।
गोली विशाल मिश्रा को नहीं लगी। वह उनके ड्राइवर अमिताभ निषाद के पेट में जा लगी। गंभीर रूप से घायल अमिताभ को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने अंशिका और उसके साथियों को पकड़ लिया तथा पुलिस को सौंप दिया।
यही घटना आगे की पुलिस जांच में कथित सोशल मीडिया नेटवर्क की परतें खोलने वाली महत्वपूर्ण कड़ी बनी।
मोबाइल फोन में मिले वीडियो और चैट
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने अंशिका के मोबाइल फोन और डिजिटल उपकरणों की जांच शुरू की। पुलिस के मुताबिक मोबाइल से कई वीडियो, चैट और कॉल रिकॉर्डिंग मिलने की बात सामने आई।
जांच एजेंसियों को शक है कि इन्हीं डिजिटल सामग्रियों का इस्तेमाल कथित तौर पर लोगों को धमकाने और ब्लैकमेल करने में किया जाता था। अब पुलिस डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन संपर्कों का वास्तविक उद्देश्य क्या था और कथित तौर पर कितने लोग इस नेटवर्क से जुड़े थे।
किसी भी डिजिटल सामग्री की सत्यता, संदर्भ और कानूनी स्वीकार्यता का निर्धारण जांच तथा अदालत की प्रक्रिया के तहत ही होगा।
पूछताछ में पैसे कमाने की बात कहने का दावा
पुलिस पूछताछ के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक अंशिका ने कथित तौर पर कहा कि उसे पैसा कमाने का शौक था और वह इसी उद्देश्य से रील बनाती थी। उसके सोशल मीडिया अकाउंट पर बड़ी संख्या में फॉलोअर्स होने की बात भी सामने आई है।
सोशल मीडिया पर उसकी लोकप्रियता को लेकर भी कई दावे वायरल हैं। हालांकि फॉलोअर्स की संख्या अपने आप में किसी आपराधिक गतिविधि का प्रमाण नहीं होती। जांच का मुख्य विषय यह है कि सोशल मीडिया संपर्कों का इस्तेमाल कथित तौर पर आपराधिक गतिविधियों के लिए किया गया या नहीं।
नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल?
अंशिका की गिरफ्तारी के बाद पुलिस उसके कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। उसके साथी बंटी और अर्जुन वर्मा समेत अन्य लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी भी सामने आई है।
जांच एजेंसियां अब मोबाइल फोन, चैट, कॉल डिटेल, बैंक लेन-देन और सोशल मीडिया संपर्कों की पड़ताल कर सकती हैं। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि कथित वसूली का पैसा कहां गया और क्या इस गतिविधि में कोई संगठित गिरोह भी शामिल था।
पुलिस की ओर से इस मामले में गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की तैयारी की बात भी सामने आई है। यदि जांच में संगठित आपराधिक नेटवर्क के पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो आगे की कानूनी कार्रवाई उसी आधार पर होगी।
सोशल मीडिया यूजर्स के लिए बड़ा सबक
गोरखपुर का यह मामला सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के बीच एक गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जा सकता है। ऑनलाइन दोस्ती, वीडियो कॉल और निजी बातचीत के दौरान साझा की गई तस्वीर या वीडियो बाद में व्यक्ति के खिलाफ इस्तेमाल की जा सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार अनजान व्यक्ति के साथ निजी वीडियो कॉल करने, संवेदनशील तस्वीरें भेजने या व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से बचना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति निजी वीडियो या फोटो के आधार पर धमकी देकर रकम मांगता है तो डरकर भुगतान करने के बजाय तत्काल पुलिस और साइबर अपराध अधिकारियों को सूचना देना जरूरी है।
फिलहाल अंशिका सिंह जेल में है और पुलिस उसके कथित नेटवर्क की जांच कर रही है। इस मामले में सामने आए आरोपों की अंतिम सच्चाई जांच और अदालत के निर्णय से ही स्पष्ट होगी। लेकिन जिस तरह सोशल मीडिया संपर्कों, कथित हनीट्रैप, डिजिटल ब्लैकमेलिंग और रंगदारी की कड़ियां एक साथ सामने आई हैं, उसने साइबर अपराध के बदलते तौर-तरीकों को लेकर गंभीर चिंता जरूर पैदा कर दी है।

























