चिलचिलाती धूप में घर-घर पहुंच रहे प्रगणक, जनगणना 2027 से तय होगा देश के विकास का नया रोडमैप
भाटपार रानी में तेज़ी से चल रहा केंद्रीय दशकीय जनगणना अभियान
इरफान अली लारी की रिपोर्ट
देवरिया जनपद के भाटपार रानी नगर पंचायत क्षेत्र में भारत सरकार की केंद्रीय दशकीय जनगणना 2027 का अभियान पूरी गंभीरता और व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा रहा है। यह जनगणना केवल आंकड़ों का संग्रह भर नहीं है, बल्कि आने वाले वर्षों में देश की विकास योजनाओं, संसाधनों के वितरण और आधारभूत संरचना के विस्तार का सबसे महत्वपूर्ण आधार मानी जाती है। यही कारण है कि प्रशासनिक स्तर पर इस अभियान को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
नगर पंचायत भाटपार रानी में पर्यवेक्षक संतोष कुमार गुप्त के निर्देशन में प्रगणकों की टीम लगातार क्षेत्र के प्रत्येक घर तक पहुंचकर मकान गणना और परिवार संबंधी आंकड़ों का संकलन कर रही है। भीषण गर्मी और तेज धूप के बावजूद प्रगणक सुबह से देर रात तक अपने दायित्व का निर्वहन करते दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय लोगों के बीच भी इस अभियान को लेकर जागरूकता बढ़ी है और नागरिक प्रगणकों को सही जानकारी उपलब्ध कराने में सहयोग कर रहे हैं।
जनगणना से तय होती हैं विकास योजनाएं
भारत में हर दस वर्ष पर होने वाली जनगणना देश की सामाजिक, आर्थिक और भौगोलिक स्थिति का व्यापक चित्र प्रस्तुत करती है। सरकारें इन्हीं आंकड़ों के आधार पर शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पानी, रोजगार, आवास और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं की योजनाएं तैयार करती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जनगणना के आंकड़े सटीक और पारदर्शी हों तो विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना आसान हो जाता है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की वास्तविक जनसंख्या, परिवारों की स्थिति, आवासीय ढांचे और संसाधनों की उपलब्धता का स्पष्ट आंकलन होने से सरकारों को नीति निर्माण में मदद मिलती है।
भाटपार रानी क्षेत्र में चल रहे अभियान में भी इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक मकान और परिवार का विवरण सावधानीपूर्वक दर्ज किया जा रहा है।
घर-घर पहुंच रही प्रगणकों की टीम
सर्किल नंबर तीन में प्रगणक शशि शेखर, दुर्गेश पटेल, विजय कुमार दूबे, मनीष प्रजापति, सत्य प्रकाश तिवारी और मनीषा यादव समेत कई कर्मचारी लगातार क्षेत्र भ्रमण कर रहे हैं। टीम के सदस्य लोगों से संपर्क कर मकानों की स्थिति, परिवारों की संख्या तथा अन्य आवश्यक जानकारियों का संकलन कर रहे हैं।
प्रगणकों का कहना है कि सही आंकड़े जुटाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है, क्योंकि कई बार लोगों की अनुपस्थिति, जानकारी की कमी या जागरूकता के अभाव में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद टीम पूरी निष्ठा के साथ कार्य में जुटी हुई है।
स्थानीय नागरिकों ने भी प्रगणकों के प्रयासों की सराहना की है। लोगों का कहना है कि तेज गर्मी में लगातार क्षेत्र भ्रमण करना आसान नहीं है, लेकिन सरकारी कर्मचारी अपने दायित्व को गंभीरता से निभा रहे हैं।
भीषण गर्मी के बीच कठिन जिम्मेदारी
मई-जून की प्रचंड गर्मी में जनगणना का कार्य करना कर्मचारियों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। तापमान लगातार बढ़ रहा है और दोपहर के समय सड़कें लगभग सुनसान दिखाई देती हैं। इसके बावजूद प्रगणकों की टीम सुबह छह बजे से लेकर देर रात तक क्षेत्र में सक्रिय नजर आ रही है।
कई प्रगणकों ने बताया कि सही आंकड़ों का संकलन करने के लिए उन्हें एक ही परिवार से कई बार संपर्क करना पड़ता है। कहीं लोग काम पर चले जाते हैं तो कहीं परिवार के सदस्य बाहर रहते हैं। ऐसे में शाम के समय पुनः पहुंचकर जानकारी पूरी करनी पड़ती है।
इसके बावजूद टीम के सदस्यों में कार्य को लेकर उत्साह दिखाई दे रहा है। उनका कहना है कि जनगणना देश निर्माण की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है और इसमें योगदान देना गर्व की बात है।
आमजन से सहयोग की अपील
अभियान से जुड़े अधिकारियों और प्रगणकों ने नागरिकों से अपील की है कि वे जनगणना कार्य में पूर्ण सहयोग करें और सही जानकारी उपलब्ध कराएं। अधिकारियों का कहना है कि गलत या अधूरी जानकारी भविष्य की विकास योजनाओं को प्रभावित कर सकती है।
जनगणना केवल सरकारी औपचारिकता नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास का आधार है। किसी क्षेत्र की वास्तविक जनसंख्या, शिक्षा स्तर, आवासीय स्थिति और संसाधनों की उपलब्धता का सही आंकलन होने पर ही योजनाओं का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, शहरीकरण की बढ़ती गति, पलायन, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं की बदलती जरूरतों को समझने में भी जनगणना की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यही कारण है कि इस प्रक्रिया को बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जाता है।
डिजिटल युग में और अधिक महत्वपूर्ण हुई जनगणना
तकनीकी बदलाव और डिजिटल भारत अभियान के दौर में जनगणना की भूमिका पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। अब सरकारें डेटा आधारित योजनाओं पर विशेष ध्यान दे रही हैं। स्मार्ट सिटी, ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा विस्तार और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की दिशा तय करने में जनगणना के आंकड़े अहम भूमिका निभाते हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि किसी क्षेत्र की वास्तविक जरूरतों का सही डेटा उपलब्ध हो तो वहां विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करना आसान हो जाता है। यही कारण है कि जनगणना को लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में शामिल किया जाता है।
विकास की तस्वीर तय करेगी जनगणना 2027
दशकीय जनगणना 2027 को लेकर केंद्र सरकार और प्रशासनिक तंत्र गंभीर नजर आ रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में देश के विकास का नया खाका इन्हीं आंकड़ों के आधार पर तैयार होगा। गांवों से लेकर शहरों तक आधारभूत संरचना, सामाजिक योजनाओं और आर्थिक विकास की दिशा तय करने में यह जनगणना निर्णायक साबित हो सकती है।
भाटपार रानी में जिस प्रकार प्रगणकों की टीम मेहनत और समर्पण के साथ कार्य कर रही है, वह इस अभियान की गंभीरता को दर्शाता है। आमजन का सहयोग और सही जानकारी ही इस राष्ट्रीय अभियान को सफल बना सकती है।








