अनुशासन और आत्मनियंत्रण से ही जीवन में सफलता संभव: जेलर पवन कुमार कोठारी

देहरादून में दीक्षारम्भ 2026 के दौरान जेलर पवन कुमार कोठारी विधि विद्यार्थियों को अनुशासन, आत्मनियंत्रण और कानून की जिम्मेदारी के महत्व पर संबोधित करते हुए

सुनने के लिए यहां क्लिक करें

नयन ज्योति की रिपोर्ट

देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ लॉ में नए विद्यार्थियों के स्वागत और उनके शैक्षणिक जीवन की शुरुआत के अवसर पर ‘दीक्षारम्भ 2026’ कार्यक्रम का आयोजन उत्साह और गरिमापूर्ण वातावरण में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और गणेश वंदना के साथ हुई। इस अवसर पर देहरादून कारागार के जेलर पवन कुमार कोठारी ने विधि के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए अनुशासन, आत्मनियंत्रण, कानून के प्रति सम्मान और मानवीय दृष्टिकोण को जीवन का महत्वपूर्ण आधार बताया।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए जेलर पवन कुमार कोठारी ने कहा कि आज के समय में मन को नियंत्रित रखना सबसे बड़ी आवश्यकता है। मनुष्य के सामने अनेक प्रकार के आकर्षण, चुनौतियां और विचलन मौजूद हैं। ऐसे वातावरण में जो व्यक्ति अपने मन और व्यवहार पर नियंत्रण रखना सीख जाता है, वह अपने लक्ष्य की ओर अधिक मजबूती से आगे बढ़ सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि विधि की पढ़ाई केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज, संविधान, न्याय और मानवाधिकारों को समझने की जिम्मेदारी भी प्रदान करती है।

जेल प्रशासन का मूल उद्देश्य केवल दंड देना नहीं

जेलर पवन कुमार कोठारी ने जेल प्रशासन की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जेलर का दायित्व केवल जेल की व्यवस्था संभालना या कैदियों की निगरानी करना नहीं है। जेल प्रशासन का एक महत्वपूर्ण दायित्व न्यायपालिका के आदेशों का पालन सुनिश्चित करना तथा कैदियों के आचरण में सुधार का प्रयास करना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्यायपालिका, कानून और कारागार व्यवस्था एक-दूसरे से जुड़े हुए महत्वपूर्ण संस्थान हैं।

उन्होंने कहा कि कारागार में आने वाला प्रत्येक व्यक्ति केवल अपराध के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उसके व्यवहार में सुधार और उसे समाज की मुख्यधारा में वापस लाने की संभावना पर भी विचार किया जाना चाहिए। इसी सोच के साथ जेलों में सुधारात्मक गतिविधियों और अनुशासन को महत्व दिया जाता है।

See also  राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस पर डॉ. एस.आर. रंगनाथन को श्रद्धांजलि

जेलों में विचाराधीन कैदियों की संख्या बड़ी चुनौती

अपने संबोधन के दौरान पवन कुमार कोठारी ने भारत की जेल व्यवस्था से जुड़े एक महत्वपूर्ण पहलू की ओर विद्यार्थियों का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि देश की जेलों में लगभग 70 प्रतिशत कैदी विचाराधीन यानी अंडरट्रायल हैं, जबकि लगभग 30 प्रतिशत कैदी सजा प्राप्त कर चुके हैं। यह स्थिति विधि के विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि विचाराधीन कैदी का मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन होता है।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि भविष्य में कानून के क्षेत्र में कार्य करते समय उन्हें न्यायिक प्रक्रिया की गंभीरता, संवैधानिक मूल्यों और प्रत्येक व्यक्ति के कानूनी अधिकारों को समझना होगा। विधि का अध्ययन केवल कानून की धाराओं को याद करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि कानून के पीछे छिपे सामाजिक और मानवीय उद्देश्य को समझना भी उतना ही आवश्यक है।

अनुशासन को जीवन की सफलता का आधार बताया

पवन कुमार कोठारी ने विद्यार्थियों को अनुशासन का महत्व समझाते हुए कहा कि बिना अनुशासन के जीवन में स्थायी सफलता प्राप्त करना कठिन है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे पठन-पाठन के प्रति गंभीर रहें और अपने विद्यार्थी जीवन को लक्ष्यपूर्ण बनाएं।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मानव शरीर स्वयं एक अनुशासित व्यवस्था का उदाहरण है। शरीर के विभिन्न अंग एक निश्चित व्यवस्था और तालमेल के साथ कार्य करते हैं। यदि इस व्यवस्था में गंभीर असंतुलन उत्पन्न हो जाए तो शरीर का सामान्य संचालन प्रभावित हो जाता है। इसी प्रकार मनुष्य के व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में भी अनुशासन आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जीवन भविष्य की नींव तैयार करने का समय होता है। इस दौरान विकसित की गई आदतें आगे चलकर व्यक्ति के व्यक्तित्व और कार्यशैली को प्रभावित करती हैं। इसलिए विद्यार्थियों को समय का सदुपयोग, नियमित अध्ययन, संयमित व्यवहार और सकारात्मक सोच को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।

राष्ट्रपति पदक से सम्मानित हो चुके हैं पवन कुमार कोठारी

कार्यक्रम में स्कूल ऑफ लॉ के संकायाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार दीक्षित ने जेलर पवन कुमार कोठारी का परिचय विद्यार्थियों से कराया। उन्होंने बताया कि कारागारों में कैदियों के सुधार और जेल प्रशासन के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए पवन कुमार कोठारी को प्रदेश में पहली बार राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया जा चुका है।

See also  देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय में नए सत्र का श्रीगणेश, विधि विभाग में दीक्षारम्भ कार्यक्रम का आयोजन

डॉ. दीक्षित ने कहा कि विद्यार्थियों के लिए ऐसे व्यक्तित्वों से संवाद करना उपयोगी होता है, क्योंकि इससे उन्हें पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ वास्तविक जीवन और प्रशासनिक व्यवस्था को समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने विद्यार्थियों को कानून की शिक्षा के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने पर भी जोर दिया।

‘दीक्षारम्भ 2026’ का उद्देश्य विद्यार्थियों को नई दिशा देना

डॉ. अनिल कुमार दीक्षित ने दीक्षारम्भ 2026 की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दीक्षारम्भ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, नई दिल्ली की पहल के रूप में विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के नए वातावरण से परिचित कराने और उनके भीतर सीखने की भावना विकसित करने वाला प्रेरणात्मक कार्यक्रम है। इसका मूल उद्देश्य विद्यार्थियों को उनके नए शैक्षणिक सफर के लिए तैयार करना और विश्वविद्यालय की शैक्षणिक संस्कृति से जोड़ना है।

उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग राज्यों से विद्यार्थी देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय में अध्ययन के लिए आए हैं। ऐसे में दीक्षारम्भ जैसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को एक-दूसरे से परिचित होने, शिक्षकों से संवाद स्थापित करने और विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली को समझने का अवसर प्रदान करते हैं।

कानून के विद्यार्थियों के लिए जिम्मेदारी का क्षेत्र व्यापक

कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि विधि की शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की जिम्मेदारी सामान्य शिक्षा से कहीं व्यापक होती है। कानून समाज में व्यवस्था, अधिकार और न्याय के बीच संतुलन कायम करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे में विधि के विद्यार्थियों को भविष्य में वकील, न्यायिक अधिकारी, शिक्षक, प्रशासनिक अधिकारी अथवा अन्य विधिक क्षेत्र से जुड़े पेशेवर के रूप में काम करते समय संवेदनशीलता और निष्पक्षता को प्राथमिकता देनी होगी।

See also  डॉ. सागर सक्सेना ने हासिल की विधि में डॉक्ट्रेट की उपाधि, ‘हेट क्राइम और हेट स्पीच’ पर किया महत्वपूर्ण शोध

जेलर पवन कुमार कोठारी के संबोधन ने विद्यार्थियों को कानून की किताबों से बाहर निकलकर न्याय व्यवस्था और कारागार प्रशासन के व्यावहारिक पक्ष को समझने का अवसर दिया। उनके द्वारा अनुशासन और आत्मनियंत्रण पर दिया गया संदेश विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से प्रेरणादायक रहा।

शिक्षकों और विद्यार्थियों की रही सक्रिय भागीदारी

‘दीक्षारम्भ 2026’ कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से आकर देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं के साथ लॉ फैकल्टी के शिक्षक और कर्मचारी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सुश्री आकांक्षा भट्ट, हिमांशु जखमोला, डॉ. विनोद जोशी, नीलम सिंह, स्माइल गोयल और लाइब्रेरियन मीनाक्षी देवी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

कार्यक्रम का मंच संचालन सुश्री आकांक्षा भट्ट और स्माइल गोयल ने किया। दोनों ने कार्यक्रम की विभिन्न गतिविधियों को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाया और विद्यार्थियों को आयोजन से जोड़े रखा। अंत में विधि विभागाध्यक्ष डॉ. गौरव त्यागी ने अतिथियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

सीखने के साथ व्यक्तित्व निर्माण पर जोर

‘दीक्षारम्भ 2026’ केवल नए विद्यार्थियों के स्वागत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने उन्हें शिक्षा के साथ अनुशासन, आत्मनियंत्रण, कानून के प्रति सम्मान और सामाजिक जिम्मेदारी की दिशा में सोचने का अवसर दिया। जेलर पवन कुमार कोठारी का संबोधन इस दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा कि उन्होंने कारागार व्यवस्था के अपने अनुभवों को विद्यार्थियों के सामने रखा और उन्हें यह समझाने का प्रयास किया कि कानून का वास्तविक उद्देश्य केवल अपराध और दंड तक सीमित नहीं है।

कार्यक्रम का संदेश स्पष्ट रहा कि ज्ञान तभी सार्थक है, जब उसके साथ अनुशासन, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी जुड़ी हो। विधि के विद्यार्थियों के लिए यह संदेश आने वाले शैक्षणिक और पेशेवर जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। दीक्षारम्भ 2026 के माध्यम से विश्वविद्यालय ने नए विद्यार्थियों को उनके अध्ययन की शुरुआत के साथ एक ऐसे दृष्टिकोण से जोड़ने का प्रयास किया, जिसमें शिक्षा के साथ व्यक्तित्व निर्माण और सामाजिक उत्तरदायित्व को भी समान महत्व दिया गया।

यायावर
Author: यायावर

यायावर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Read More

Cricket Live Score

Rashifal

और पढ़ें