देहरादून। लॉ कॉलेज देहरादून, उत्तरांचल विश्वविद्यालय के विधि विभाग के शोधार्थी सागर सक्सेना ने “A Socio-Legal Study on Hate Crime in India with Special Reference to Hate Speech” विषय पर अपना शोध सफलतापूर्वक पूरा कर पीएचडी (लॉ) की उपाधि के लिए आवश्यक मौखिक परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है। उनके शोध कार्य में भारत में बढ़ती हेट क्राइम की घटनाओं, हेट स्पीच की सामाजिक एवं कानूनी चुनौतियों तथा मौजूदा विधिक प्रावधानों के प्रभाव का अध्ययन किया गया है।
शोध के सफल समापन के साथ ही सागर सक्सेना ने विधि के क्षेत्र में डॉक्ट्रेट की उपाधि हासिल करने के लिए अपनी योग्यता पूर्ण कर ली है। उनके शोध कार्य को अकादमिक एवं सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हेट क्राइम और हेट स्पीच को बनाया शोध का केंद्र
सागर सक्सेना ने अपने शोध के लिए भारत में हेट क्राइम और विशेष रूप से हेट स्पीच को विषय बनाया। यह ऐसा विषय है, जिसका संबंध केवल कानून से ही नहीं बल्कि समाज, लोकतांत्रिक मूल्यों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक सौहार्द से भी जुड़ा हुआ है।
शोध के दौरान हेट क्राइम की अवधारणा, इसके सामाजिक प्रभाव और भारत में इससे संबंधित कानूनी व्यवस्था का अध्ययन किया गया। इसके साथ ही हेट स्पीच के विभिन्न स्वरूपों तथा उसके कारण समाज में उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों को भी शोध का हिस्सा बनाया गया।
शोध में यह समझने का प्रयास किया गया कि कानून और सामाजिक परिस्थितियों के बीच किस प्रकार का संबंध है और हेट स्पीच अथवा घृणा आधारित अपराधों से निपटने के लिए मौजूदा कानूनी व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
मौखिक परीक्षा में प्रस्तुत किया शोध कार्य
पीएचडी की प्रक्रिया के तहत सागर सक्सेना ने अपने शोध कार्य को विश्वविद्यालय के समक्ष प्रस्तुत किया। इसके बाद उनकी मौखिक परीक्षा आयोजित की गई, जिसमें उन्होंने अपने शोध विषय, शोध पद्धति, निष्कर्षों और अध्ययन से संबंधित विभिन्न प्रश्नों के उत्तर दिए।
मौखिक परीक्षा में बाह्य परीक्षक के रूप में पंजाब यूनिवर्सिटी के लॉ विभाग की डीन प्रोफेसर वंदना अरोरा मौजूद रहीं। उन्होंने शोधार्थी के शोध कार्य का परीक्षण किया और शोध से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
इस दौरान उत्तरांचल विश्वविद्यालय के रिसर्च डीन प्रोफेसर अजय सिंह ने लॉ पीएचडी की थिसिस को पटल पर रखा। शोधार्थी ने अपने अध्ययन के प्रमुख निष्कर्षों और शोध की उपयोगिता के संबंध में विस्तार से जानकारी दी।
प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार दीक्षित का मिला मार्गदर्शन
सागर सक्सेना के शोध कार्य को पूरा करने में प्रोफेसर (डॉ.) अनिल कुमार दीक्षित का महत्वपूर्ण मार्गदर्शन रहा। उनके निर्देशन में शोधार्थी ने हेट क्राइम और हेट स्पीच जैसे गंभीर सामाजिक-कानूनी विषय पर अध्ययन किया।
शोध के दौरान विषय की कानूनी जटिलताओं के साथ-साथ इसके सामाजिक प्रभावों को समझने पर विशेष ध्यान दिया गया। शोध निर्देशन के माध्यम से शोधार्थी को विषय की गहराई में जाने, विभिन्न कानूनी पहलुओं का विश्लेषण करने और अध्ययन के निष्कर्षों को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत करने में सहयोग मिला।
लॉ कॉलेज में मौजूद रहे विभाग के शिक्षक और शोधार्थी
सागर सक्सेना की मौखिक परीक्षा के अवसर पर लॉ कॉलेज देहरादून और उत्तरांचल विश्वविद्यालय के विधि विभाग से जुड़े कई शिक्षक एवं शोधार्थी मौजूद रहे।
इस अवसर पर लॉ विभाग की प्राचार्य प्रोफेसर पूनम रावत सहित फैकल्टी के सदस्य डॉ. खालिक अहमद, डॉ. रमाकांत त्रिपाठी, डॉ. कुलजीत सिंह, डॉ. ऐश्वर्या सिंह, डॉ. प्रिया विनंजामुरी, डॉ. भुवनेश्वरी और डॉ. जीतेन्द्र सिंह उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त विधि विषय के अन्य शोधार्थियों में श्रीमती कल्पना बिलगेय और संगीत शर्मा सहित अन्य शोधार्थियों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।
सामाजिक और कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण विषय
हेट क्राइम और हेट स्पीच वर्तमान समय में सामाजिक एवं कानूनी विमर्श के महत्वपूर्ण विषयों में शामिल हैं। सोशल मीडिया और डिजिटल संचार के विस्तार के साथ हेट स्पीच से जुड़ी चुनौतियां भी लगातार चर्चा का विषय बनी हुई हैं। ऐसे में इस विषय पर किया गया अकादमिक अध्ययन कानून के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और विधि विशेषज्ञों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
सागर सक्सेना के शोध का महत्व इस दृष्टि से भी है कि इसमें हेट क्राइम को केवल कानूनी अपराध के रूप में देखने के बजाय उसके सामाजिक और कानूनी दोनों पहलुओं को समझने का प्रयास किया गया है। इसी वजह से उनके शोध का विषय समाज और कानून के परस्पर संबंधों को समझने के लिए महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
शोध उपलब्धि पर जताई प्रसन्नता
पीएचडी शोध की मौखिक परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण करने के बाद सागर सक्सेना ने अपनी अकादमिक यात्रा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विधि के क्षेत्र में डॉक्ट्रेट की उपाधि के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी होना उनके लिए गौरव का विषय है।
शोध के सफल समापन के अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षकों, शोधार्थियों और उपस्थित गणमान्य लोगों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। इस उपलब्धि से उनके परिवार और शुभचिंतकों में भी खुशी का माहौल है।
सागर सक्सेना का यह शोध हेट क्राइम इन इंडिया, हेट स्पीच, भारतीय कानून और सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर आगे होने वाले अकादमिक अध्ययन के लिए आधार प्रदान कर सकता है। साथ ही, यह अध्ययन कानून और समाज के बीच मौजूद जटिल संबंधों को समझने में भी उपयोगी भूमिका निभा सकता है।













