रीतेश कुमार गुप्ता की रिपोर्ट
सीतापुर। उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले से शादी के नाम पर कथित धोखाधड़ी का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने कई परिवारों को हैरान कर दिया है। आरोप है कि एक युवक ने वैवाहिक विज्ञापनों को माध्यम बनाकर करीब 25 महिलाओं को शादी का झांसा दिया और उनसे करोड़ों रुपये की ठगी की। मामला उस समय और गंभीर हो गया, जब इस कथित ठगी के जाल में एक भाजपा विधायक का परिवार भी फंस गया।
बताया जा रहा है कि आरोपी युवक अखबारों में प्रकाशित होने वाले वैवाहिक विज्ञापनों के जरिए महिलाओं और उनके परिवारों तक पहुंच बनाता था। बातचीत आगे बढ़ने के बाद वह शादी का भरोसा दिलाता और कथित तौर पर अलग-अलग कारणों से रुपये हासिल करता था। अब इस पूरे मामले को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं और पीड़ित बताए जा रहे परिवारों के सामने अपनी रकम तथा सम्मान दोनों बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है।
वैवाहिक विज्ञापन बना कथित ठगी का रास्ता
मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कथित आरोपी ने सामान्य वैवाहिक रिश्तों की तलाश कर रहे परिवारों को निशाना बनाने के लिए अखबारों में प्रकाशित वैवाहिक विज्ञापनों का सहारा लिया। ऐसे विज्ञापनों के जरिए वह महिलाओं और उनके परिवारों से संपर्क स्थापित करता था।
शादी की बातचीत शुरू होने के बाद परिवारों को भरोसे में लेने की कोशिश की जाती थी। आरोप है कि रिश्ते को अंतिम रूप देने के नाम पर धीरे-धीरे आर्थिक लेन-देन का सिलसिला शुरू होता गया। किसी से शादी की तैयारी, किसी से पारिवारिक जरूरत और किसी से अन्य वजह बताकर पैसे लिए जाने का दावा किया जा रहा है।
यदि सामने आए आरोपों की जांच में यह पूरा घटनाक्रम सही पाया जाता है, तो यह केवल आर्थिक ठगी का मामला नहीं रहेगा, बल्कि वैवाहिक रिश्तों में भरोसे का फायदा उठाकर लोगों को निशाना बनाने का गंभीर मामला माना जाएगा।
25 महिलाओं को शादी का झांसा देने का आरोप
इस मामले में सबसे बड़ा दावा करीब 25 महिलाओं को शादी के नाम पर कथित तौर पर अपने जाल में फंसाने का है। आरोप है कि युवक अलग-अलग महिलाओं से विवाह का भरोसा जताता था और इसी विश्वास के आधार पर उनसे आर्थिक मदद या रकम हासिल करता था।
करोड़ों रुपये की कथित ठगी का आंकड़ा सामने आने के बाद यह मामला और अधिक गंभीर हो गया है। हालांकि, रकम की वास्तविक राशि, पीड़ितों की संख्या और पूरे नेटवर्क की पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
इस तरह के मामलों में सबसे बड़ी मुश्किल यह होती है कि पीड़ित परिवार लंबे समय तक यह समझ ही नहीं पाते कि जिस व्यक्ति को वे भावी जीवनसाथी या परिवार का सदस्य मान रहे हैं, उसके इरादे कुछ और हो सकते हैं।
भाजपा विधायक की बेटी की शादी से जुड़ा मामला भी सामने आया
मामले ने तब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी ध्यान खींचा, जब सीतापुर की सेवता विधानसभा सीट से भाजपा विधायक ज्ञान तिवारी ने अपनी बेटी की शादी से जुड़े घटनाक्रम पर सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी।
विधायक ने बीते गुरुवार को फेसबुक पर लाइव आकर अपनी बेटी की शादी को लेकर करीब चार मिनट तक बात की। इस दौरान उनके साथ उनकी बेटी डॉ. प्रज्ञा तिवारी भी मौजूद थीं।
लाइव प्रसारण में विधायक भावुक नजर आए। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी की शादी वर्ष 2024 में मिश्रिख निवासी अनुज त्रिवेदी के बेटे प्रखर से की थी। विधायक के मुताबिक, शादी से पहले उन्होंने परिवार के बारे में जानकारी जुटाने के बाद ही यह रिश्ता तय किया था।
हालांकि, अब विधायक का कहना है कि उन्हें महसूस हो रहा है कि उनके परिवार के साथ धोखा हुआ है।
‘पूरी जानकारी लेने के बाद की थी शादी’
विधायक ज्ञान तिवारी ने अपने सार्वजनिक बयान में यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि उनकी बेटी की शादी जल्दबाजी में नहीं हुई थी। उनके अनुसार, विवाह से पहले परिवार के बारे में जानकारी ली गई थी और उपलब्ध जानकारी के आधार पर ही रिश्ता तय किया गया।
लेकिन शादी के करीब दो वर्ष बाद परिस्थितियां ऐसी बनीं कि विधायक को अपने फैसले पर सवाल उठाने पड़े। उनका कहना है कि अब उन्हें इस रिश्ते में धोखे का एहसास हो रहा है।
विधायक का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कथित ठगी का शिकार बनने वालों में आम परिवारों के साथ-साथ एक जनप्रतिनिधि का परिवार भी शामिल होने की बात सामने आई है।
विधायक को भी ‘जाल’ में फंसाने का दावा
इस पूरे प्रकरण में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि कथित आरोपी ने केवल आम महिलाओं या उनके परिवारों को ही निशाना नहीं बनाया, बल्कि एक भाजपा विधायक के परिवार तक अपनी पहुंच बना ली।
यही वजह है कि सोशल मीडिया पर आरोपी को लेकर तरह-तरह की उपमाएं और टिप्पणियां सामने आ रही हैं। कुछ लोग उसे ‘यूपी का रावण’ तक कह रहे हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति को इस तरह की उपाधि देना सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया है, इसे जांच एजेंसियों द्वारा स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
कानूनी रूप से आरोपी के खिलाफ लगाए गए प्रत्येक आरोप की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही होगी।
शादी के नाम पर आर्थिक ठगी ने बढ़ाई चिंता
यह मामला उन परिवारों के लिए भी चेतावनी की तरह देखा जा रहा है, जो वैवाहिक विज्ञापनों या ऑनलाइन माध्यमों से रिश्ते तलाशते हैं। आज के समय में वैवाहिक रिश्ते तय करने के लिए अखबार, वेबसाइट और सोशल मीडिया महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं। लेकिन इन माध्यमों पर मिलने वाले हर व्यक्ति की पहचान और पारिवारिक पृष्ठभूमि की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना बेहद जरूरी है।
सिर्फ बातचीत, सोशल मीडिया प्रोफाइल या किसी परिचित के बताए भरोसे पर विवाह संबंध तय करना कई बार जोखिम भरा हो सकता है। खासतौर पर जब शादी से पहले अचानक बड़ी रकम की मांग की जाए तो परिवारों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
कई सवालों के जवाब जांच के बाद मिलेंगे
सीतापुर के इस कथित ठगी प्रकरण में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि वास्तविक रूप से कितनी महिलाओं से संपर्क किया गया, कितने परिवार आर्थिक रूप से प्रभावित हुए और कथित ठगी की कुल रकम कितनी है।
इसके अलावा यह भी जांच का विषय होगा कि क्या आरोपी अकेले यह सब कर रहा था या उसके साथ अन्य लोग भी जुड़े थे। वैवाहिक विज्ञापनों के जरिए संपर्क बनाने, पहचान और पारिवारिक पृष्ठभूमि से संबंधित दावों तथा कथित आर्थिक लेन-देन की भी पड़ताल आवश्यक होगी।
मामले की निष्पक्ष जांच से ही यह साफ हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और कथित तौर पर ठगी की प्रक्रिया किस तरह संचालित की गई।
विधायक के बयान के बाद मामले ने पकड़ा तूल
भाजपा विधायक ज्ञान तिवारी के फेसबुक लाइव के बाद यह मामला व्यापक चर्चा में आया है। विधायक ने अपनी बेटी के साथ सामने आकर जो बातें रखीं, उससे संकेत मिलता है कि परिवार इस रिश्ते को लेकर गंभीर संकट से गुजर रहा है।
वर्ष 2024 में हुई शादी के बाद अब सामने आए विवाद ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर तब, जब इसी व्यक्ति पर कई महिलाओं को शादी का भरोसा देकर आर्थिक रूप से ठगने के आरोप लगाए जा रहे हों।
फिलहाल इस पूरे मामले में सामने आए आरोपों की स्वतंत्र और कानूनी जांच बेहद जरूरी है। जांच के निष्कर्ष ही यह तय करेंगे कि कथित ठगी का पूरा नेटवर्क कितना बड़ा था, कितने लोग प्रभावित हुए और इस प्रकरण में आगे कौन-कौन से कानूनी कदम उठाए जाते हैं।
सीतापुर का यह मामला एक बार फिर बताता है कि शादी जैसे महत्वपूर्ण जीवन-निर्णय में भावनात्मक भरोसे के साथ-साथ दस्तावेजी और स्वतंत्र सत्यापन भी बेहद जरूरी है। वैवाहिक विज्ञापन में दी गई जानकारी, नौकरी-व्यवसाय, परिवार की पृष्ठभूमि और आर्थिक स्थिति की पुष्टि किए बिना किसी बड़े आर्थिक लेन-देन से बचना चाहिए।

























