सुनील शुक्ला की रिपोर्ट
सीतापुर। एक सप्ताह पहले तक बाढ़ का खतरा कम होने से राहत की सांस ले रहे सीतापुर के गांजरी क्षेत्र में अब एक बार फिर चिंता का माहौल बन गया है। उत्तराखंड से जुड़े बैराजों से लगातार बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के बाद शारदा और घाघरा नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा है। सिंचाई विभाग के आकलन के अनुसार अगले 24 घंटे इस पूरे इलाके के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं, क्योंकि छोड़ा गया पानी सीतापुर पहुंचने के बाद नदी के जलस्तर में और वृद्धि होने की संभावना है। प्रशासन ने संभावित स्थिति को देखते हुए निगरानी बढ़ा दी है और राहत एवं बचाव तंत्र को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
एक सप्ताह की राहत के बाद फिर बढ़ने लगा जलस्तर
पिछले सप्ताह तक नदियों के जलस्तर में गिरावट दर्ज होने से तटवर्ती गांवों के लोगों को राहत मिली थी। हालांकि यह राहत अधिक समय तक कायम नहीं रह सकी। रविवार सुबह जारी प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार शारदा और घाघरा नदियों का जलस्तर फिर तेजी से बढ़ने लगा है। हालांकि दोनों नदियां अभी खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं, लेकिन लगातार बढ़ता जलस्तर आने वाले समय के लिए चिंता का विषय बन गया है।
रविवार सुबह जारी रिपोर्ट के मुताबिक शारदा नदी खतरे के निशान से लगभग 0.54 मीटर नीचे तथा घाघरा नदी 1.43 मीटर नीचे बह रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऊपरी क्षेत्रों से पानी छोड़ने का क्रम जारी रहा तो दोनों नदियों के जलस्तर में और तेजी से वृद्धि हो सकती है।
तीन बैराजों से छोड़ा गया लाखों क्यूसेक पानी
सिंचाई विभाग के अनुसार बनबसा, शारदा और गिरिजा बैराजों से लगातार बड़ी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक शारदा बैराज से लगभग 1.35 लाख क्यूसेक, बनबसा बैराज से 71,844 क्यूसेक तथा गिरिजा बैराज से करीब 1.34 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह अतिरिक्त जलराशि अगले 24 घंटे के भीतर सीतापुर के गांजरी क्षेत्र तक पहुंचेगी। इसके बाद शारदा और घाघरा दोनों नदियों के जलस्तर में और वृद्धि दर्ज की जा सकती है। यही कारण है कि प्रशासन ने पहले से ही सतर्कता बढ़ा दी है।
तटवर्ती गांवों में बढ़ी बेचैनी
नदियों के बढ़ते जलस्तर ने रामपुर मथुरा और रेउसा विकासखंड के तटवर्ती गांवों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है। इन क्षेत्रों के ग्रामीणों को आशंका है कि यदि पानी इसी गति से बढ़ता रहा तो कई गांवों का संपर्क प्रभावित हो सकता है और जनजीवन पर असर पड़ सकता है।
प्रशासनिक आकलन के अनुसार रामपुर मथुरा विकासखंड के करीब 15 गांव तथा रेउसा विकासखंड के लगभग 12 गांव संभावित बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं। पिछले दो दिनों के दौरान नदियों का जलस्तर करीब 40 सेंटीमीटर बढ़ चुका है, जिससे ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है।
किसानों की फसलों पर भी मंडराने लगा संकट
बढ़ते जलस्तर का सबसे बड़ा असर खेती पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। अनुमान है कि यदि पानी इसी तरह बढ़ता रहा तो लगभग 150 बीघा कृषि भूमि जलमग्न हो सकती है। इससे धान समेत अन्य खरीफ फसलों को नुकसान पहुंचने का खतरा पैदा हो गया है।
किसानों का कहना है कि यदि खेतों में लंबे समय तक पानी भरा रहा तो फसल खराब होने से आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि जलस्तर नियंत्रित रहेगा और स्थिति गंभीर होने से पहले राहत मिलेगी।
प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी, राहत दल अलर्ट
संभावित बाढ़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने पूरी मशीनरी को सक्रिय कर दिया है। क्लस्टरवार लेखपालों की तैनाती की गई है, जबकि संबंधित उपजिलाधिकारियों (एसडीएम) को लगातार जलस्तर की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा राहत एवं बचाव से जुड़े विभागों को भी हर स्थिति के लिए तैयार रहने को कहा गया है ताकि जरूरत पड़ने पर प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके। प्रशासन का उद्देश्य किसी भी संभावित आपदा से पहले आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करना है।
ग्रामीणों से सतर्क रहने और अफवाहों से बचने की अपील
प्रशासन ने तटवर्ती गांवों के लोगों से अपील की है कि वे नदी के किनारे अनावश्यक आवाजाही से बचें और किसी भी प्रकार की अफवाह पर विश्वास न करें। अधिकारियों ने कहा है कि जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक कदम तत्काल उठाए जाएंगे।
ग्रामीणों से यह भी कहा गया है कि यदि कहीं जलभराव या किसी प्रकार की आपात स्थिति दिखाई दे तो उसकी सूचना तुरंत स्थानीय प्रशासन, राजस्व विभाग या संबंधित अधिकारियों को दें, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
अगले 24 घंटे रहेंगे बेहद महत्वपूर्ण
विशेषज्ञों का मानना है कि बैराजों से छोड़ा गया पानी सीतापुर पहुंचने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। यदि बारिश और जल निकासी की स्थिति सामान्य रही तो खतरा सीमित रह सकता है, लेकिन लगातार जलप्रवाह बढ़ने की स्थिति में तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का जोखिम बढ़ सकता है।
फिलहाल प्रशासन सतर्क है, राहत टीमें तैयार हैं और ग्रामीणों को लगातार सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। आने वाले 24 घंटे इस पूरे क्षेत्र की स्थिति तय करने में निर्णायक साबित हो सकते हैं।













