20 अक्टूबर 2026 3:56 अपराह्न

नई-नई ब्याही बहू की संदिग्ध मौत से मचा हड़कंप, फांसी की कहानी पर उठे सवाल

बांदा में नवविवाहिता की संदिग्ध मौत और दहेज हत्या के आरोप को दर्शाती भावनात्मक तस्वीर

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धर्मेंद्र की रिपोर्ट

बांदा। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के सुदूर ग्रामीण इलाके मऊ गांव में एक नवविवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। महज करीब एक वर्ष पहले विवाह के बंधन में बंधी 22 वर्षीय किरन बाई की मौत को शुरुआत में ससुराल पक्ष ने आत्महत्या बताया, लेकिन मायके वालों की शिकायत और पुलिस जांच के बाद मामला कथित हत्या की ओर मुड़ गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला घोंटने की बात सामने आने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पति समेत ससुराल पक्ष के तीन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है।

पुलिस जांच के अनुसार, मृतका के मायके वालों ने दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए उसकी मौत को आत्महत्या मानने से इनकार किया था। परिवार का कहना था कि घटना से कुछ समय पहले ही किरन ने फोन पर अपनी परेशानी बताई थी। इसके बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की परिस्थितियों की जांच शुरू की। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने हत्या की आशंका को केंद्र में रखते हुए आगे की कार्रवाई की।

कमरे में मिला नवविवाहिता का शव, ससुराल पक्ष ने बताया आत्महत्या

जानकारी के मुताबिक मऊ गांव निवासी 22 वर्षीय किरन बाई की शादी पिछले वर्ष मोनू राजपूत से हुई थी। विवाह के बाद वह अपने पति और ससुराल वालों के साथ रह रही थी। परिवार के अनुसार, घटना वाली रात घर के एक कमरे में किरन का शव मिला। ससुराल पक्ष की ओर से प्रारंभिक तौर पर पुलिस को बताया गया कि उसने कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

पति मोनू ने पुलिस के समक्ष कथित तौर पर यह भी कहा कि दंपती के बीच कभी-कभी सामान्य विवाद होता था, लेकिन उसे इस बात का अंदाजा नहीं था कि किरन इतना बड़ा कदम उठा लेगी। ससुराल पक्ष की ओर से उसकी मानसिक परेशानी को भी आत्महत्या की संभावित वजह बताया गया।

घटना के बाद परिवार की ओर से अंतिम संस्कार की तैयारी किए जाने लगी। हालांकि, जैसे ही किरन के मायके वालों को उसकी मौत की जानकारी मिली, उन्होंने पूरे घटनाक्रम पर सवाल खड़े कर दिए।

मायके वालों ने आत्महत्या की कहानी पर जताया संदेह

किरन के पिता रामलाल ने पुलिस को दिए बयान में कहा कि उनकी बेटी स्वभाव से खुशमिजाज थी और विवाह के बाद भी उसने कभी आत्महत्या करने की बात नहीं कही थी। उनके मुताबिक शादी को अभी लगभग एक वर्ष ही हुआ था और इसलिए अचानक उसके आत्महत्या करने की बात उन्हें स्वीकार नहीं हुई।

मृतका के पिता ने पुलिस को यह भी बताया कि घटना से एक दिन पहले रात करीब 10 बजे किरन ने उन्हें फोन किया था। परिवार के मुताबिक फोन पर वह काफी परेशान और रो रही थी। उसने कथित तौर पर ससुराल में दहेज को लेकर प्रताड़ित किए जाने की बात कही थी।

रामलाल का कहना है कि फोन पर उनकी बेटी ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की थी। इसी बातचीत को आधार बनाकर मायके वालों ने पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी बेटी की मौत आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या हो सकती है और बाद में घटना को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बदली जांच की दिशा

मायके पक्ष की शिकायत के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद मामले की जांच का रुख बदल गया। पुलिस के अनुसार, रिपोर्ट में मौत का कारण गला घोंटने से संबंधित पाया गया, जबकि प्रारंभिक तौर पर ससुराल पक्ष ने फांसी लगाने की बात कही थी।

जांच अधिकारियों ने फांसी और गला घोंटने से होने वाली मौत के चिकित्सकीय संकेतों को ध्यान में रखते हुए पूरे घटनाक्रम की पड़ताल शुरू की। शरीर पर चोट के निशान मिलने की बात भी जांच में सामने आई, जिसके बाद पुलिस ने कथित घरेलू प्रताड़ना और हत्या की आशंका को गंभीरता से लिया।

हालांकि किसी भी मामले में अंतिम दोषसिद्धि अदालत के फैसले के बाद ही होती है, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पुलिस को यह जांचने के लिए महत्वपूर्ण आधार दिया कि क्या मौत को आत्महत्या का रूप देने का प्रयास किया गया था।

मोबाइल कॉल और घटनाक्रम की भी जांच

पुलिस ने घटना के दिन और उससे पहले परिवार के सदस्यों के बीच हुई फोन बातचीत की भी पड़ताल की। जांच के दौरान पति मोनू और उसके परिवार के सदस्यों के बीच हुई बातचीत को भी जांच का हिस्सा बनाया गया।

पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ ही परिवार के सदस्यों से पूछताछ की और घटना के समय घर में मौजूद लोगों की भूमिका की जांच की। पुलिस की कोशिश यह पता लगाने की रही कि किरन की मौत से पहले वास्तव में क्या हुआ था और क्या उसकी मौत को आत्महत्या बताने के पीछे कोई साजिश थी।

दहेज के आरोप ने मामले को बनाया गंभीर

मृतका के मायके वालों ने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया कि विवाह के बाद से ही किरन को दहेज के लिए परेशान किया जा रहा था। परिवार का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण वे ससुराल पक्ष की कथित मांगें पूरी नहीं कर पा रहे थे।

पुलिस जांच में यदि दहेज उत्पीड़न और हत्या के आरोप प्रमाणित होते हैं, तो मामला केवल संदिग्ध मृत्यु तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दहेज संबंधी अपराधों के साथ हत्या के गंभीर आरोपों के दायरे में आएगा।

किरन के पिता का आरोप है कि उनकी बेटी ने अंतिम बातचीत में मदद की गुहार लगाई थी। उनका कहना है कि वह अपनी बेटी को बचा नहीं सके और अब चाहते हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच हो तथा दोषी पाए जाने वालों को कानून के अनुसार कठोर सजा मिले।

पति, सास और ननद पर पुलिस कार्रवाई

पुलिस ने इस मामले में मृतका के पति मोनू राजपूत, उसकी मां सुशीला देवी और बहन प्रियंका के खिलाफ कार्रवाई की है। पुलिस के मुताबिक पूछताछ के दौरान मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी मिली है और इन्हीं के आधार पर आरोपियों की भूमिका की जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

पुलिस का दावा है कि घटना अचानक हुई आत्महत्या नहीं, बल्कि एक सुनियोजित वारदात हो सकती है। जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि क्या मृतका की हत्या के बाद उसे फांसी पर लटकाकर आत्महत्या का रूप देने का प्रयास किया गया था।

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ हत्या और साजिश सहित दहेज से जुड़े प्रावधानों के तहत कार्रवाई किए जाने की जानकारी दी है। हालांकि मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगी।

पिता ने मांगी कड़ी सजा

किरन की मौत से उसके मायके में मातम पसरा हुआ है। पिता रामलाल का कहना है कि उनकी बेटी की जिंदगी विवाह के महज एक वर्ष बाद ही खत्म हो गई। उन्होंने पुलिस से मामले की गहराई से जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

रामलाल के मुताबिक उनकी बेटी ने घटना से पहले फोन कर अपनी परेशानी बताई थी। यही बात अब परिवार के लिए सबसे बड़ा सवाल बनी हुई है कि अगर किरन आत्महत्या करने की स्थिति में थी तो उसने अपने पिता से मदद की गुहार क्यों लगाई और उसकी मौत के बाद परिस्थितियां इतनी अलग क्यों मिलीं।

पुलिस जांच में सामने आएगा मौत का पूरा सच

बांदा की यह घटना कई गंभीर सवाल छोड़ गई है। एक ओर ससुराल पक्ष की ओर से इसे आत्महत्या बताया गया, वहीं दूसरी ओर मायके वालों ने दहेज उत्पीड़न और हत्या का आरोप लगाया। इसके बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों ने मामले को और गंभीर बना दिया।

अब पुलिस की जांच का मुख्य केंद्र यह पता लगाना है कि किरन की मौत की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं, घटना के समय घर में कौन-कौन मौजूद था, उसकी मौत से पहले क्या घटनाक्रम हुआ और क्या हत्या के बाद इसे आत्महत्या का रूप देने का प्रयास किया गया।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले से जुड़े चिकित्सकीय साक्ष्य, मोबाइल कॉल विवरण, घटनास्थल की परिस्थितियां और आरोपियों के बयानों को जांच में शामिल किया जा रहा है। इन सभी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखेगी।

नवविवाहिता की संदिग्ध मौत का यह मामला फिलहाल पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। परिवार जहां अपनी बेटी की मौत के लिए न्याय की मांग कर रहा है, वहीं पुलिस जांच के जरिए उस रात की पूरी कहानी सामने लाने में जुटी है। अब मामले में अदालत के समक्ष प्रस्तुत होने वाले साक्ष्य ही यह तय करेंगे कि किरन की मौत वास्तव में आत्महत्या थी या जैसा कि मायके वालों और पुलिस जांच में आशंका जताई गई है, उसके पीछे हत्या की कोई साजिश थी।

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