रिपोर्ट: परवेज़ अंसारी
नई दिल्ली, 1 अगस्त 2026। दिल्ली में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) अभियान के दौरान विधानसभा क्षेत्र AC-52 में बीएलओ (Booth Level Officer), बीएलओ सुपरवाइजर, वालंटियर्स, शिक्षक और प्रधानाचार्य अभूतपूर्व दबाव का सामना कर रहे हैं। एक ओर निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर 100 प्रतिशत डिजिटाइजेशन और गणना प्रपत्रों को पूरा करने का लक्ष्य है, तो दूसरी ओर विद्यालयों में नियमित शिक्षण, प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षा परिणाम, प्रशासनिक कार्य और अन्य शैक्षणिक जिम्मेदारियां भी समान रूप से निभानी पड़ रही हैं।
स्थिति यह है कि विद्यालयों में कार्यरत अधिकांश बीएलओ और बीएलओ सुपरवाइजर दोहरी जिम्मेदारियों के कारण मानसिक और शारीरिक रूप से थक चुके हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि चुनाव आयोग और दिल्ली शिक्षा विभाग की ओर से शिक्षकों की चुनावी ड्यूटी और विद्यालयी कार्यों को लेकर कोई स्पष्ट एवं समन्वित आदेश जारी नहीं किया गया है, जिससे भ्रम और दबाव दोनों लगातार बढ़ रहे हैं।
AC-52 में SIR अभियान की वर्तमान स्थिति
पिछले लगभग 20 दिनों से AC-52 के 150 से अधिक मतदान केंद्रों पर बीएलओ घर-घर जाकर गणना प्रपत्र भरने, मतदाताओं के दस्तावेजों का सत्यापन करने तथा मोबाइल एप के माध्यम से डेटा अपलोड करने में लगे हुए हैं।
बीएलओ का कहना है कि उन्हें प्रतिदिन औसतन 10 से 12 घंटे तक फील्ड में रहना पड़ रहा है। इसके बाद शाम और रात में विद्यालय से जुड़े कार्य तथा ऑनलाइन रिपोर्टिंग भी पूरी करनी पड़ती है।
अभियान से जुड़े कर्मचारियों के अनुसार कई बार नेटवर्क न मिलने के कारण देर रात तक डेटा अपलोड करना पड़ता है, जिससे कार्य का दबाव और बढ़ जाता है।
दोहरी जिम्मेदारी ने बढ़ाई शिक्षकों की परेशानी
इस अभियान में सबसे अधिक प्रभावित वे शिक्षक हैं जिन्हें बीएलओ की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सुबह विद्यालय में पढ़ाना, विद्यार्थियों की शैक्षणिक गतिविधियों को संचालित करना और उसके बाद पूरे दिन फील्ड में जाकर मतदाता सत्यापन करना उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण बन गया है।
प्रधानाचार्यों की स्थिति भी कम कठिन नहीं है। उन्हें विद्यालय संचालन के साथ-साथ सेक्टर अधिकारी के रूप में चुनावी कार्यों की निगरानी भी करनी पड़ रही है।
शिक्षकों का कहना है कि लगातार बढ़ते कार्यभार के कारण उनकी दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है। कई शिक्षकों का कहना है कि रात की नींद और दिन का चैन दोनों समाप्त हो गए हैं।
शिक्षक और प्रधानाचार्य के बीच बढ़ रही तकरार
विद्यालयों में एक नई समस्या शिक्षक और प्रधानाचार्य के बीच समन्वय को लेकर सामने आ रही है।
प्रधानाचार्य चाहते हैं कि विद्यालय में पढ़ाई, प्रवेश प्रक्रिया, प्रशासनिक कार्य और अन्य शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित न हों, जबकि निर्वाचन अधिकारियों की ओर से SIR अभियान का लक्ष्य हर हाल में समय पर पूरा करने का दबाव लगातार बना हुआ है। ऐसे में शिक्षक स्वयं को दो अलग-अलग प्रशासनिक व्यवस्थाओं के बीच फंसा हुआ महसूस कर रहे हैं।
एक शिक्षक ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया— “प्रधानाचार्य विद्यालय में उपस्थिति और पढ़ाई सुनिश्चित करने को कहते हैं, जबकि निर्वाचन अधिकारी पूरे दिन फील्ड में रहने का निर्देश देते हैं। दोनों कार्य एक साथ पूरी क्षमता से करना लगभग असंभव हो गया है।”
स्पष्ट आदेशों का अभाव बना सबसे बड़ी समस्या
शिक्षकों और प्रधानाचार्यों का कहना है कि यदि चुनाव आयोग और दिल्ली शिक्षा विभाग संयुक्त रूप से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर दें तो अधिकांश समस्याओं का समाधान हो सकता है। वर्तमान में यह स्पष्ट नहीं है कि—
- विद्यालयी कार्य को प्राथमिकता दी जाए या चुनावी कार्य को।
- अनुपस्थिति की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी।
- विद्यालय की पढ़ाई प्रभावित होने पर उत्तरदायी कौन होगा।
- चुनावी कार्य के दौरान विद्यालयी दायित्वों का प्रबंधन कैसे किया जाए।
स्पष्ट आदेश न होने के कारण अधिकांश विद्यालयों में अलग-अलग तरीके से व्यवस्थाएं बनाई जा रही हैं।
फील्ड में सामने आ रही प्रमुख समस्याएं
बीएलओ और वालंटियर्स के अनुसार अभियान के दौरान कई व्यावहारिक कठिनाइयां सामने आ रही हैं।
1. बंद मकान और अनुपस्थित मतदाता
लगभग 20 से 25 प्रतिशत घरों में बार-बार जाने के बाद भी ताले लगे मिल रहे हैं। इससे सत्यापन कार्य समय पर पूरा नहीं हो पा रहा है।
2. मोबाइल नेटवर्क और एप की समस्या
कई क्षेत्रों, विशेषकर संकरी गलियों और बहुमंजिला इमारतों में नेटवर्क उपलब्ध नहीं होने से डेटा अपलोड में घंटों लग जाते हैं।
3. लोगों का असहयोग
कई नागरिक आधार कार्ड, बिजली बिल या अन्य आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने में सहयोग नहीं कर रहे हैं, जिससे सत्यापन प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
4. समय सीमा का दबाव
बीएलओ का कहना है कि निर्धारित समय के भीतर 100 प्रतिशत डिजिटाइजेशन पूरा करना मौजूदा परिस्थितियों में बेहद कठिन दिखाई देता है।
वालंटियर्स भी बढ़ते कार्यभार से परेशान
बीएलओ की सहायता के लिए लगाए गए वालंटियर्स भी लगातार बढ़ते कार्यभार से परेशान हैं।
कुछ वालंटियर्स के बीच में ही कार्य छोड़ देने के कारण शेष कर्मचारियों पर अतिरिक्त बोझ आ गया है। कई स्थानों पर मानदेय में देरी की शिकायतें भी सामने आई हैं।
प्रशासन का पक्ष
निर्वाचन अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है तथा जहां भी तकनीकी या स्टाफ संबंधी समस्या सामने आ रही है वहां आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार तकनीकी सहायता के लिए हेल्पडेस्क भी बनाया गया है तथा आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त वालंटियर्स की व्यवस्था की जा रही है।
बीएलओ और शिक्षकों की प्रमुख मांगें
अभियान से जुड़े कर्मचारियों ने कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए हैं—
- 100 प्रतिशत डिजिटाइजेशन के लिए समय सीमा बढ़ाई जाए।
- प्रत्येक सेक्टर में अतिरिक्त डेटा एंट्री ऑपरेटर उपलब्ध कराए जाएं।
- मोबाइल एप में ऑफलाइन सुविधा जोड़ी जाए।
- चुनावी और विद्यालयी ड्यूटी अलग-अलग शिफ्ट में निर्धारित की जाए।
- चुनाव आयोग और दिल्ली शिक्षा विभाग संयुक्त एवं स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करें।
- विद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जाए।
शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ रहा असर
शिक्षकों का कहना है कि लगातार चुनावी कार्यों के कारण नियमित कक्षाओं का संचालन प्रभावित हो रहा है। प्रवेश प्रक्रिया, उत्तरपुस्तिका मूल्यांकन, परिणाम तैयार करना तथा अन्य प्रशासनिक कार्य भी समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चुनावी कार्य और शैक्षणिक कार्यों के बीच बेहतर समन्वय नहीं बनाया गया तो इसका सीधा प्रभाव विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ सकता है।
दिल्ली के AC-52 में चल रहा SIR अभियान निर्वाचन प्रक्रिया की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन इस अभियान में लगे शिक्षक, प्रधानाचार्य, बीएलओ और वालंटियर्स दोहरी जिम्मेदारियों के कारण गंभीर दबाव में हैं। स्पष्ट प्रशासनिक निर्देशों के अभाव में भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
यदि चुनाव आयोग और दिल्ली शिक्षा विभाग समय रहते समन्वित दिशा-निर्देश जारी कर कार्य विभाजन, समय सीमा और अतिरिक्त मानव संसाधन की व्यवस्था सुनिश्चित करें, तो न केवल अभियान अधिक प्रभावी होगा बल्कि विद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था भी प्रभावित होने से बच सकेगी।
Author: यायावर
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