हिंदी संपादकीय
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संपादकीय
बदबख्त नशा और बाअदब नशेड़ी
“बदबख्त नशा और बाअदब नशेड़ी” संपादकीय शराब के नशे से उत्पन्न भ्रम, झूठे आत्मविश्वास और उसके सामाजिक दुष्परिणामों का गहन…
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शख्शियत
बड़ी बेरहम राजनीति : फिल्मी चमक से संसद की सख्त चौखट तक कंगना रनौत की कहानी
रुपाली कश्यप की प्रस्तुति हिंदी सिनेमा की दुनिया में कई चेहरे आए, चमके और धीरे-धीरे धुंधले पड़ गए। लेकिन कुछ…
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विचार
औकात….? इंसान की हैसियत का सच, समाज का छल और आत्मसम्मान की अंतिम लड़ाई
✍️अनिल अनूप एक शब्द बहुत आसानी से लोगों के जंहा पर चढ़ जाता है – “औकात”। किसी को सपने में…
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संपादकीय
“पायल उतार दऽ… आवाज करऽता!” : रिश्तों, राजनीति और समाज के शोर का सच
अनिल अनूप ✍️ भोजपुरी लोकसंगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि वह भारतीय ग्रामीण जीवन की संवेदनाओं, संघर्षों, रिश्तों…
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JGD
बेपरवाही बनाम लापरवाही : आज़ादी और जिम्मेदारी के बीच की अनकही लड़ाई
✍️ अनिल अनूप सूफ़ी परंपरा में शब्द सिर्फ शब्द नहीं होते—वे अनुभव की आग में तपे हुए अर्थ होते हैं।…
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