भूतपूर्व सैनिकों के अधिकारों की आवाज बने सांसद रमाशंकर राजभर, लोकसभा में उठाए मुद्दे पर रक्षा मंत्री ने दिया विस्तृत जवाब
भूतपूर्व सैनिकों को आरक्षण, आयु सीमा में छूट और रोजगार अवसरों पर सरकार की स्थिति स्पष्ट
सलेमपुर सांसद रमाशंकर राजभर द्वारा लोकसभा में उठाए गए भूतपूर्व सैनिकों को आरक्षण के मुद्दे पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विस्तृत जवाब दिया। उन्होंने बताया कि केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों में 10 प्रतिशत आरक्षण, आयु सीमा में विशेष छूट और पुनर्वास संबंधी कई सुविधाएं भूतपूर्व सैनिकों को प्रदान की जा रही हैं। सरकार का उद्देश्य देश की सेवा करने वाले सैनिकों को सम्मानजनक रोजगार और बेहतर भविष्य उपलब्ध कराना है।
रिपोर्ट: इरफान अली लारी
देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले भूतपूर्व सैनिकों (एक्स-सर्विसमैन) के हितों और उनके पुनर्वास से जुड़े मुद्दे को सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र के समाजवादी पार्टी सांसद रमाशंकर राजभर ने संसद में प्रमुखता से उठाया। सांसद द्वारा लोकसभा में नियम-377 के अंतर्गत भूतपूर्व सैनिकों को मिलने वाले आरक्षण और अन्य सुविधाओं से संबंधित विषय पर प्रश्न उठाए जाने के बाद केंद्र सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सांसद के प्रश्न का विस्तृत उत्तर देते हुए बताया कि केंद्र सरकार द्वारा भूतपूर्व सैनिकों को रोजगार और पुनर्वास के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण सुविधाएं और आरक्षण संबंधी लाभ प्रदान किए जा रहे हैं।
यह जानकारी सांसद के मीडिया प्रभारी मंजूर आलम द्वारा जारी की गई है। उन्होंने बताया कि सांसद रमाशंकर राजभर लगातार क्षेत्रीय और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों को संसद में मजबूती के साथ उठाते रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने भूतपूर्व सैनिकों के भविष्य, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े विषय को लोकसभा में रखा था।
संसद में उठाया गया महत्वपूर्ण मुद्दा
लोकसभा में नियम-377 के अंतर्गत सांसद रमाशंकर राजभर ने भूतपूर्व सैनिकों को मिलने वाले आरक्षण, आयु सीमा में छूट तथा सरकारी नौकरियों में उनके प्रतिनिधित्व के संबंध में प्रश्न उठाया था। उन्होंने सरकार से जानना चाहा कि देश की रक्षा में वर्षों तक सेवा देने वाले सैनिकों को सेवानिवृत्ति के बाद रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने के लिए क्या व्यवस्थाएं की गई हैं।
सांसद का तर्क था कि सैन्य सेवा के दौरान जवान अपने जीवन का महत्वपूर्ण समय देश की सुरक्षा में समर्पित कर देते हैं। ऐसे में सेवा समाप्ति के बाद उन्हें सम्मानजनक रोजगार और पुनर्वास की सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।
रक्षा मंत्री ने दी विस्तृत जानकारी
सांसद के प्रश्न का उत्तर देते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार भूतपूर्व सैनिकों के पुनर्वास और रोजगार सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है। उन्होंने बताया कि समूह ‘क’ और समूह ‘ख’ की कई सरकारी सेवाओं में भूतपूर्व सैनिकों को विशेष आरक्षण और आयु सीमा में छूट का लाभ दिया जाता है।
रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) में सहायक कमांडेंट स्तर तक की रिक्तियों में भूतपूर्व सैनिकों को 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभ प्रदान किया जा रहा है। यह व्यवस्था उन सैनिकों के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है जो सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद भी राष्ट्र सेवा के क्षेत्र में योगदान देना चाहते हैं।
आयु सीमा में विशेष छूट का प्रावधान
सरकार द्वारा भूतपूर्व सैनिकों को दी जाने वाली सबसे महत्वपूर्ण सुविधाओं में आयु सीमा में छूट शामिल है। रक्षा मंत्री ने बताया कि समूह ‘क’ और ‘ख’ की सेवाओं में सीधी भर्ती के माध्यम से नियुक्ति के लिए भूतपूर्व सैनिकों तथा कमीशन प्राप्त अधिकारियों को उनकी सैन्य सेवा की अवधि में तीन वर्ष जोड़कर आयु सीमा में छूट दी जाती है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सेना में बिताए गए वर्षों के कारण कोई सैनिक नागरिक सेवाओं में आवेदन करने से वंचित न रह जाए। चूंकि सैनिक अपने जीवन का बड़ा हिस्सा सैन्य सेवा में व्यतीत करते हैं, इसलिए उन्हें समान अवसर प्रदान करने के लिए यह विशेष छूट दी जाती है।
पांच वर्ष की अतिरिक्त छूट भी उपलब्ध
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने उत्तर में यह भी बताया कि कुछ विशेष परिस्थितियों में भूतपूर्व सैनिकों को अतिरिक्त लाभ प्रदान किया जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे अधिकारी और सैनिक जिन्होंने कम से कम पांच वर्ष की सैन्य सेवा पूरी की हो और सामान्य रूप से सेवानिवृत्त हुए हों अथवा शारीरिक अक्षमता के कारण सेवा से मुक्त किए गए हों, उन्हें ऊपरी आयु सीमा में पांच वर्ष तक की अतिरिक्त छूट देने का प्रावधान है।
यह सुविधा विशेष रूप से उन सैनिकों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है जो किसी कारणवश अपेक्षाकृत कम आयु में सेना से बाहर हो जाते हैं और बाद में नागरिक क्षेत्र में रोजगार की तलाश करते हैं।
भूतपूर्व सैनिकों के पुनर्वास की दिशा में प्रयास
विशेषज्ञों का मानना है कि देश के लाखों भूतपूर्व सैनिकों के लिए रोजगार और पुनर्वास एक बड़ी चुनौती होती है। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें नई परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालना पड़ता है। ऐसे में आरक्षण, आयु सीमा में छूट और विशेष भर्ती अभियान जैसी योजनाएं उनके जीवन को नई दिशा देने में सहायक साबित होती हैं।
केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में भूतपूर्व सैनिकों के लिए रोजगार अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं। इसके अलावा कौशल विकास और पुनर्वास कार्यक्रमों के माध्यम से भी उन्हें नागरिक जीवन में स्थापित करने का प्रयास किया जाता है।
सांसद रमाशंकर राजभर की पहल की सराहना
सलेमपुर क्षेत्र के लोगों ने सांसद रमाशंकर राजभर द्वारा संसद में इस विषय को उठाने की सराहना की है। क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं जिनके सदस्य सेना में सेवा दे चुके हैं या वर्तमान में देश की रक्षा में लगे हुए हैं। ऐसे में भूतपूर्व सैनिकों के हितों से जुड़ा विषय संसद में उठाया जाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों का कहना है कि संसद में जनहित और सैनिक हितों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाना लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती का संकेत है। इससे सरकार को भी विभिन्न वर्गों की समस्याओं पर ध्यान देने का अवसर मिलता है।
लोकसभा में सांसद रमाशंकर राजभर द्वारा उठाए गए प्रश्न के जवाब में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार भूतपूर्व सैनिकों को आरक्षण, आयु सीमा में छूट और रोजगार अवसरों के माध्यम से विशेष सुविधाएं प्रदान कर रही है। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में 10 प्रतिशत आरक्षण, सैन्य सेवा अवधि के आधार पर आयु सीमा में छूट तथा अतिरिक्त पांच वर्ष तक की विशेष छूट जैसे प्रावधान भूतपूर्व सैनिकों के पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।
सैनिकों के सम्मान और उनके भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में यह व्यवस्था न केवल उनके जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास है, बल्कि देश की सेवा करने वालों के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता का भी प्रतीक है।







