नकली ‘सोने की बुद्ध प्रतिमा’ का झांसा, 10 लाख लेकर फरार हुए ठग: मजदूरों ने रची ऐसी साजिश कि परिवार रह गया स्तब्ध
हरदोई में सामने आए सोने की मूर्ति ठगी कांड ने लोगों को सतर्क रहने का संदेश दिया है। शाहजहांपुर की एक महिला और उसके परिवार को नकली सोने की बुद्ध प्रतिमा दिखाकर 10 लाख रुपये की ठगी का शिकार बनाया गया। मजदूरों ने पहले खुदाई में सोने की प्रतिमा मिलने का दावा किया, फिर जांच के नाम पर भरोसा जीतकर नकदी से भरा बैग लेकर फरार हो गए। पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। यह घटना बताती है कि प्राचीन खजाना, सोने की मूर्ति या बहुमूल्य वस्तु मिलने जैसे लालच में आकर कोई भी आर्थिक अपराध का शिकार हो सकता है।
अनुराग गुप्ता की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने लोगों को हैरान कर दिया है। सोने की बुद्ध प्रतिमा मिलने का झांसा देकर ठगों ने शाहजहांपुर की एक महिला और उसके परिवार से 10 लाख रुपये ऐंठ लिए। हैरत की बात यह है कि ठगी की पूरी पटकथा उन मजदूरों ने रची, जिन्होंने करीब 20 दिनों तक पीड़ित परिवार के घर में काम किया था। भरोसे का फायदा उठाकर उन्होंने पहले सोने की मूर्ति मिलने की कहानी गढ़ी, फिर जांच के नाम पर विश्वास पैदा किया और आखिरकार नकदी से भरा बैग लेकर फरार हो गए।
मामला हरदोई जिले के शाहाबाद कोतवाली क्षेत्र का है, जहां पुलिस ने शिकायत के आधार पर दो आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह सुनियोजित धोखाधड़ी और टप्पेबाजी का मामला प्रतीत होता है।
मजदूरी के दौरान बनी पहचान, फिर शुरू हुआ ठगी का खेल
शाहजहांपुर जिले के अहमदपुर रेकी गांव निवासी दिन्नी देवी के घर इन दिनों निर्माण कार्य चल रहा था। निर्माण कार्य के लिए उनके पुत्र सचिन ने पक्का पुल क्षेत्र से दो मजदूरों को काम पर लगाया था। इनमें राजा नाम का एक मजदूर भी शामिल था।
करीब 20 दिनों तक घर पर काम करने के दौरान मजदूरों ने परिवार का विश्वास जीत लिया। परिवार के लोगों को यह अंदाजा भी नहीं था कि जिन लोगों को वे मेहनतकश मजदूर समझ रहे हैं, वही बाद में लाखों रुपये की ठगी की साजिश रचेंगे।
निर्माण कार्य के दौरान बनी इसी पहचान का फायदा उठाते हुए मजदूर राजा ने एक ऐसा झांसा दिया, जिसने पूरे परिवार को अपने जाल में फंसा लिया।
फोन कर कहा- खुदाई में मिली है सोने की बुद्ध प्रतिमा
पीड़ित परिवार के अनुसार, 18 जून को मजदूर राजा ने दिन्नी देवी की विवाहित बेटी उजाला को फोन किया। उसने दावा किया कि खुदाई के दौरान उसे एक प्राचीन बुद्ध प्रतिमा मिली है, जो पूरी तरह सोने की बनी हुई है।
राजा ने कहा कि वह प्रतिमा को गुप्त रूप से बेचना चाहता है और इसके बदले 10 लाख रुपये लेने को तैयार है। उसने यह भी कहा कि यदि परिवार चाहे तो प्रतिमा की जांच कर सकता है।
सोने की मूर्ति मिलने की बात सुनकर उजाला के मन में उत्सुकता पैदा हुई। हालांकि उसने बिना जांच के सौदा करने से इनकार कर दिया। इसके बाद मजदूर ने विश्वास दिलाने के लिए प्रतिमा का थोड़ा सा बुरादा निकालकर उसे दे दिया।
सुनार की जांच में ‘सोना’ निकलने से बढ़ा भरोसा
उजाला ने मजदूर द्वारा दिया गया बुरादा एक सुनार के पास जांच के लिए भेजा। जांच रिपोर्ट में उसे सोना बताया गया। यह जानकारी मिलने के बाद परिवार को यकीन हो गया कि प्रतिमा वास्तव में बहुमूल्य धातु की हो सकती है।
यहीं से ठगों की योजना सफल होती दिखाई देने लगी। परिवार का विश्वास पूरी तरह जीतने के लिए आरोपियों ने अगला कदम भी बेहद सोच-समझकर उठाया।
अगले दिन 19 जून को उजाला शाहाबाद कोतवाली क्षेत्र के हर्रई मोड़ पर राजा से मिलने पहुंची। यहां भी आरोपी ने प्रतिमा में एक छोटा छेद कर उसमें से बुरादा निकाला और दोबारा जांच कराने को कहा। जब दूसरी बार भी जांच में बुरादा सोना निकला, तब परिवार को विश्वास हो गया कि प्रतिमा असली है और यह सौदा उनके लिए फायदे का साबित हो सकता है।
10 लाख रुपये लेकर पहुंचा परिवार, खेत में हुआ सौदा
दो बार जांच में सोना निकलने के बाद उजाला ने अपनी मां दिन्नी देवी और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ प्रतिमा खरीदने का फैसला किया। तय योजना के अनुसार वे 10 लाख रुपये की नकदी लेकर शाहाबाद क्षेत्र पहुंचे। आरोपियों ने उन्हें एक खेत में बुलाया, जहां कथित रूप से प्रतिमा सौंपी जानी थी। परिवार नकदी से भरा बैग लेकर मौके पर पहुंच गया।
प्रतिमा देखने के बाद उजाला ने कहा कि वह अंतिम बार इसकी जांच कराना चाहती है और आरोपी भी उसके साथ चलें। लेकिन यहीं पर पूरी कहानी ने अचानक खतरनाक मोड़ ले लिया।
रुपयों से भरा बैग देखते ही दिखाया तमंचा
पीड़ित परिवार का आरोप है कि जैसे ही आरोपियों ने 10 लाख रुपये से भरा बैग देखा, उनका व्यवहार बदल गया। उन्होंने अचानक तमंचा निकाल लिया और परिवार को धमकाने लगे।
डरे-सहमे परिवार के हाथ में उन्होंने एक झोला थमा दिया, जिसमें कथित बुद्ध प्रतिमा रखी थी। इसके बाद आरोपियों ने नकदी से भरा बैग छीना और तेजी से खेतों की ओर भाग निकले। घटना इतनी तेजी से हुई कि परिवार को संभलने का मौका तक नहीं मिला। जब तक वे कुछ समझ पाते, आरोपी आंखों से ओझल हो चुके थे।
जांच में खुली सच्चाई, सोना नहीं पीतल निकली प्रतिमा
ठगी का एहसास होने के बाद परिवार ने प्रतिमा की वास्तविक जांच कराई। जांच रिपोर्ट सामने आने पर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
जिस प्रतिमा को सोने की बुद्ध प्रतिमा बताया गया था, वह वास्तव में पीतल की बनी हुई निकली। इससे साफ हो गया कि शुरुआत से ही पूरा खेल सुनियोजित धोखाधड़ी का था।
संभावना जताई जा रही है कि आरोपियों ने जांच के लिए जो बुरादा दिया था, वह किसी अन्य सोने की वस्तु का हो सकता है। इसी के आधार पर उन्होंने पीड़ित परिवार को विश्वास में लेकर लाखों रुपये की ठगी को अंजाम दिया।
पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा, आरोपियों की तलाश जारी
घटना की शिकायत मिलने के बाद शाहाबाद कोतवाली पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने दो आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा ने बताया कि मामला धोखाधड़ी और टप्पेबाजी से जुड़ा हुआ है। आरोपियों की पहचान कर ली गई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा।
लालच और भरोसे का खतरनाक मिश्रण
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि ठग अब लोगों को फंसाने के लिए बेहद शातिर तरीके अपना रहे हैं। पहले भरोसा जीतना, फिर बहुमूल्य वस्तु मिलने का लालच देना और जांच के जरिए विश्वास पैदा करना—यह सब सुनियोजित अपराध का हिस्सा था।
विशेषज्ञों का मानना है कि खुदाई में खजाना, प्राचीन मूर्ति या सोने-चांदी की वस्तु मिलने जैसे दावों पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए। किसी भी प्रकार का लेन-देन करने से पहले पुलिस और संबंधित विभागों को सूचना देना आवश्यक है। हरदोई की यह घटना लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि लालच और जल्द लाभ कमाने की चाह कभी-कभी भारी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है।







