20 अक्टूबर 2026 1:07 अपराह्न

आज के दौर का शाहजहां: पत्नी की याद में लगाया दुनिया के सबसे महंगे मियाज़ाकी आमों का बाग

सहारनपुर के किसान शक्ति सिंह द्वारा पत्नी की स्मृति में लगाए गए मियाज़ाकी आमों के बाग की तस्वीर, साथ में रिपोर्टर ठाकुर बख्श सिंह की फोटो।

सुनने के लिए यहां क्लिक करें

The specified slider id does not exist.

सहारनपुर के किसान शक्ति सिंह द्वारा पत्नी रविप्रभा की स्मृति में लगाया गया मियाज़ाकी आमों का बाग इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। दुनिया के सबसे महंगे आमों में गिने जाने वाले मियाज़ाकी आमों को पत्नी के नाम से जोड़कर ‘रवि मियाज़ाकी’ नाम देना उनकी भावनात्मक श्रद्धांजलि का प्रतीक है। यह प्रेरणादायक कहानी सच्चे प्रेम, समर्पण और मानवीय संवेदनाओं का संदेश देती है तथा उत्तर प्रदेश की कृषि और बागवानी क्षेत्र में एक अनूठी मिसाल के रूप में देखी जा रही है।

रिपोर्ट: ठाकुर बख्श सिंह

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद से एक ऐसी भावुक कहानी सामने आई है, जो प्रेम, समर्पण और यादों की शक्ति को नई पहचान देती है। जहां आज के समय में रिश्तों को लेकर लोगों की सोच तेजी से बदल रही है, वहीं सहारनपुर के एक किसान ने अपनी दिवंगत पत्नी की स्मृति को जीवित रखने के लिए ऐसा कदम उठाया है, जिसकी चर्चा दूर-दूर तक हो रही है। नैनखेड़ी गांव निवासी किसान शक्ति सिंह ने अपनी पत्नी रविप्रभा की याद में दुनिया के सबसे महंगे और दुर्लभ माने जाने वाले मियाज़ाकी आमों का बाग तैयार किया है।

शक्ति सिंह की यह कहानी केवल खेती या बागवानी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सच्चे प्रेम और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बन चुकी है। स्थानीय लोग उन्हें आज के दौर का शाहजहां कहकर संबोधित कर रहे हैं, क्योंकि उन्होंने भी अपनी पत्नी की यादों को अमर बनाने के लिए एक अनूठा स्मारक खड़ा किया है। फर्क सिर्फ इतना है कि जहां शाहजहां ने ताजमहल बनवाया था, वहीं शक्ति सिंह ने दुर्लभ मियाज़ाकी आमों का बाग लगाकर अपनी पत्नी को श्रद्धांजलि दी है।

कोविड महामारी में खो दिया जीवनसाथी

शक्ति सिंह बताते हैं कि कोविड-19 महामारी उनके जीवन में एक बड़ा दुख लेकर आई थी। इसी महामारी के दौरान उन्होंने अपनी पत्नी रविप्रभा को खो दिया। पत्नी के निधन के बाद उनके जीवन में एक बड़ा खालीपन आ गया, लेकिन उन्होंने उनकी यादों को जीवित रखने का संकल्प लिया।

पत्नी को सुंदर और विशेष किस्म के फलों से बेहद लगाव था। इसी बात को ध्यान में रखते हुए शक्ति सिंह ने दुनिया के सबसे महंगे आमों में शामिल मियाज़ाकी प्रजाति के पौधे लगाने का निर्णय लिया। उनका मानना था कि यह बाग उनकी पत्नी की स्मृतियों को हमेशा जीवित रखेगा।

पत्नी के नाम पर रखा ‘रवि मियाज़ाकी’

अपनी पत्नी के प्रति प्रेम और सम्मान व्यक्त करने के लिए शक्ति सिंह ने इस विशेष आम को नया नाम भी दिया। उन्होंने मियाज़ाकी आमों को अपनी पत्नी के नाम से जोड़ते हुए ‘रवि मियाज़ाकी’ नाम दिया है।

उनका कहना है कि जब भी वे इन आमों को देखते हैं, उन्हें अपनी पत्नी की याद आ जाती है। यह बाग उनके लिए केवल फलों का उत्पादन करने वाला स्थान नहीं, बल्कि उनकी भावनाओं और यादों का एक जीवंत संसार है।

जबलपुर से लाए थे दुर्लभ पौधे

शक्ति सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष वे मध्य प्रदेश के जबलपुर से मियाज़ाकी आम के पौधे लेकर आए थे। उन्होंने इन पौधों को अपने खेत में लगाया था, लेकिन कुछ समय बाद पौधे चोरी हो गए।

इस घटना के बाद उन्होंने सुरक्षा के मद्देनजर शेष पौधों को खेत से निकालकर अपने घर के बगीचे में स्थानांतरित कर दिया। वर्तमान में उनके पास कुल 10 मियाज़ाकी आम के पौधे सुरक्षित हैं, जिनकी वे विशेष देखभाल कर रहे हैं।

इस साल आए हैं करीब 30 दुर्लभ आम

किसान शक्ति सिंह के अनुसार इस वर्ष उनके बगीचे में लगे मियाज़ाकी आम के पेड़ों पर लगभग 30 फल आए हैं। इन आमों की बाजार में काफी मांग रहती है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनकी कीमत लाखों रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच जाती है।

दुर्लभता और ऊंची कीमत के कारण इन आमों को विशेष सुरक्षा में रखा गया है। बगीचे की देखभाल भी बेहद सावधानी से की जा रही है ताकि कोई नुकसान न हो।

बेचेंगे नहीं, गरीबों को खिलाएंगे

दुनिया के सबसे महंगे आमों में गिने जाने वाले मियाज़ाकी आमों की कीमत सुनकर लोग हैरान रह जाते हैं। इसके बावजूद शक्ति सिंह का कहना है कि उन्होंने इन आमों को व्यावसायिक लाभ के लिए नहीं लगाया है।

उनका उद्देश्य अपनी पत्नी की यादों को संजोना है, इसलिए इस वर्ष वे इन आमों को बेचने की योजना नहीं बना रहे हैं। उनका कहना है कि जब आम पूरी तरह पक जाएंगे, तब उन्हें अपने घर लाया जाएगा और उन लोगों को मुफ्त में खिलाया जाएगा जो इतने महंगे आम खरीदने में सक्षम नहीं हैं।

शक्ति सिंह मानते हैं कि उनकी पत्नी हमेशा दूसरों की मदद करने और लोगों को खुशियां बांटने में विश्वास रखती थीं। इसलिए वे भी उनकी स्मृति में यही कार्य करना चाहते हैं।

प्रेम की मिसाल बन गई कहानी

शक्ति सिंह की यह अनोखी पहल अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन चुकी है। गांव और आसपास के लोग उनकी भावनाओं की सराहना कर रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि आधुनिक दौर में जहां रिश्तों की अहमियत कम होती दिखाई देती है, वहां शक्ति सिंह ने यह साबित किया है कि सच्चा प्रेम समय और परिस्थितियों से कहीं ऊपर होता है।

उनकी यह कहानी यह संदेश भी देती है कि किसी प्रिय व्यक्ति की स्मृतियों को जीवित रखने के लिए बड़े-बड़े स्मारकों की आवश्यकता नहीं होती। सच्ची भावना और समर्पण ही सबसे बड़ा स्मारक बन जाते हैं।

यादों के बीच जी रहे हैं शक्ति सिंह

शक्ति सिंह बताते हैं कि जब वे अपने बगीचे में टहलते हैं और मियाज़ाकी आमों को देखते हैं, तो उन्हें ऐसा महसूस होता है जैसे उनकी पत्नी आज भी उनके साथ मौजूद हैं। हर पौधा और हर फल उन्हें अपनी जीवनसंगिनी की याद दिलाता है।

यही वजह है कि यह बाग उनके लिए केवल खेती का हिस्सा नहीं, बल्कि प्रेम, समर्पण और स्मृतियों का जीवंत प्रतीक बन गया है। सहारनपुर के इस किसान की कहानी आज उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है, जो रिश्तों की सच्ची अहमियत को समझते हैं।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Read More

Cricket Live Score

Rashifal

और पढ़ें