पत्रकारिता
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विचार
मेरी पहली चिट्ठी : जेब नहीं, आत्मा तय करती है सौभाग्य और दुर्भाग्य
सौभाग्य और दुर्भाग्य का असली अर्थ केवल आर्थिक लाभ या हानि तक सीमित नहीं है। यह विचारोत्तेजक लेख आत्मिक संतुष्टि,…
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राजनीति
बांग्लादेशी घुसपैठ और मतदाता सूची शुद्धिकरण : राष्ट्रीय सुरक्षा, लोकतंत्र और जनसांख्यिकीय संतुलन की चुनौती
कमलेश कुमार चौधरी भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति उसकी निष्पक्ष एवं विश्वसनीय…
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यात्रा वृत्तांत
चित्रकूट से केदारनाथ तक : एक पत्रकार की आंखों से भारत दर्शन
कभी-कभी यात्राएं केवल पैरों से नहीं, दृष्टि से भी की जाती हैं। कुछ लोग तीर्थों तक पहुंचते हैं और लौट…
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देवरिया
डॉ. संजय गुप्ता को मिली बड़ी जिम्मेदारी, भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार समन्वय समिति के जिला सूचना मंत्री बने
इरफान अली लारी की रिपोर्ट देवरिया। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने वाले डॉ. संजय गुप्ता को भारतीय राष्ट्रीय…
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संपादकीय
अगर खबरें बोल सकतीं, तो वे पत्रकारों से क्या कहतीं?
अनिल अनूप आज के समय में खबरें सिर्फ कागज़ पर छपे शब्द नहीं रहीं। वे मोबाइल स्क्रीन की चमक में…
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गुस्ताख दिल
गुस्ताख दिल ; “जब दिल हुआ गुस्ताख, तो सच हुआ बेनकाब!” चलते हैं सीतापुर….
[चाय की गरम-गरम चुस्कियों के बीच जब बातचीत सिर्फ फुल्की-फुल्की न हो, तो सच की परतें गेरुआ लगें, तो वही…
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