तमीज से बात करिए…! सपा की बैठक में सांसद और विधायक के बीच तीखी नोकझोंक, वीडियो हुआ वायरल

बांदा में समाजवादी पार्टी की बैठक के दौरान सांसद कृष्णा देवी पटेल और विधायक विशंभर सिंह यादव के बीच हुई तीखी बहस को दर्शाती फीचर इमेज, साथ में रिपोर्टर संतोष कुमार सोनी का चित्र।

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रिपोर्ट: संतोष कुमार सोनी

बांदा। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में समाजवादी पार्टी (सपा) की अंदरूनी खींचतान एक बार फिर सार्वजनिक मंच पर सामने आ गई। पार्टी कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सपा सांसद कृष्णा देवी पटेल और बबेरू विधानसभा क्षेत्र के विधायक विशंभर सिंह यादव के बीच तीखी बहस हो गई। दोनों नेताओं के बीच हुई नोकझोंक ने बैठक का माहौल गर्म कर दिया और कुछ समय के लिए कार्यक्रम की कार्यवाही भी प्रभावित हुई।

घटना का वीडियो किसी कार्यकर्ता द्वारा मोबाइल फोन से रिकॉर्ड कर लिया गया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद जिले की राजनीति में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है और पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है।

छत्रपति शाहूजी महाराज जयंती कार्यक्रम में हुआ विवाद

जानकारी के अनुसार शुक्रवार को समाजवादी पार्टी के जिला कार्यालय में छत्रपति शाहूजी महाराज की जयंती के अवसर पर एक विशेष बैठक और विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद थे। बैठक का उद्देश्य सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों के उत्थान से जुड़े विचारों पर चर्चा करना था, लेकिन कार्यक्रम के दौरान राजनीतिक मतभेदों ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया।

बताया जा रहा है कि बैठक के दौरान विधायक विशंभर सिंह यादव ने अपने संबोधन में बिना किसी व्यक्ति का नाम लिए कहा कि पार्टी के भीतर कुछ ऐसे लोग सक्रिय हैं जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा से प्रभावित दिखाई देते हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं को ऐसे लोगों से सावधान रहने की सलाह दी और पार्टी की मूल समाजवादी विचारधारा को मजबूत बनाए रखने पर जोर दिया।

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सांसद ने समझा खुद पर निशाना, बढ़ा विवाद

विधायक के इस बयान के बाद माहौल अचानक बदल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सांसद कृष्णा देवी पटेल ने विधायक की टिप्पणी को अपने खिलाफ इशारा माना। उन्होंने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए विधायक का नाम लेते हुए कहा कि उनके खिलाफ जो भी राजनीतिक गतिविधियां और कथित साजिशें हो रही हैं, उनमें विधायक की भूमिका है।

सांसद के इस आरोप पर विधायक विशंभर सिंह यादव ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने खड़े होकर जवाब दिया कि जब उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया है तो उन पर व्यक्तिगत आरोप लगाना उचित नहीं है। इसी दौरान उन्होंने सांसद से कहा कि “तमीज से बात करिए” और बिना वजह आरोप लगाने से बचना चाहिए।

इसके बाद दोनों नेताओं के बीच कुछ देर तक तीखी बहस होती रही। बैठक में मौजूद कार्यकर्ता और पदाधिकारी भी असहज स्थिति में नजर आए। कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह राजनीतिक विवाद में बदल गया और कई लोग दोनों नेताओं को शांत कराने का प्रयास करते दिखाई दिए।

वरिष्ठ नेताओं ने संभाली स्थिति

स्थिति को बिगड़ता देख पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व जिलाध्यक्ष मधुसूदन कुशवाहा ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने दोनों नेताओं को शांत रहने की सलाह दी और कार्यक्रम के मूल उद्देश्य को ध्यान में रखने की अपील की। उनके हस्तक्षेप के बाद विवाद कुछ हद तक शांत हुआ और बैठक की कार्यवाही आगे बढ़ सकी।

हालांकि कार्यक्रम समाप्त होने के बाद भी इस बहस की चर्चा पूरे जिले में होती रही। पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच भी इस घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

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सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

बैठक के दौरान हुई बहस का वीडियो किसी कार्यकर्ता ने अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया था। कार्यक्रम समाप्त होने के कुछ ही समय बाद यह वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल होने लगा। वीडियो में दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस और नाराजगी साफ दिखाई दे रही है।

वीडियो वायरल होने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। विपक्षी दलों के समर्थक भी इस वीडियो को लेकर विभिन्न प्रकार की टिप्पणियां कर रहे हैं। वहीं सपा कार्यकर्ताओं के बीच भी यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

लंबे समय से गुटबाजी से जूझ रही है सपा

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बांदा जिले में समाजवादी पार्टी लंबे समय से आंतरिक गुटबाजी की समस्या का सामना कर रही है। सांसद और विधायक समर्थक खेमों के बीच मतभेद समय-समय पर सामने आते रहे हैं। कई मौकों पर संगठनात्मक बैठकों और कार्यक्रमों में भी इन मतभेदों की झलक दिखाई दी है।

सूत्रों के अनुसार पार्टी नेतृत्व भी जिले की मौजूदा परिस्थितियों से भलीभांति परिचित है। यही कारण है कि जिला संगठन लंबे समय से पूर्ण रूप से सक्रिय नहीं हो पाया है और संगठनात्मक पुनर्गठन का मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है।

आगामी चुनावों से पहले बढ़ सकती हैं चुनौतियां

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि पार्टी के भीतर जारी मतभेदों को समय रहते नहीं सुलझाया गया तो आगामी चुनावों में इसका असर संगठनात्मक मजबूती और चुनावी प्रदर्शन पर पड़ सकता है। कार्यकर्ताओं का एक बड़ा वर्ग चाहता है कि शीर्ष नेतृत्व हस्तक्षेप कर जिले में एकजुटता का माहौल बनाए ताकि पार्टी की राजनीतिक स्थिति मजबूत हो सके।

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फिलहाल सांसद कृष्णा देवी पटेल और विधायक विशंभर सिंह यादव के बीच हुई यह नोकझोंक बांदा की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है। वायरल वीडियो ने इस विवाद को और अधिक सुर्खियों में ला दिया है तथा समाजवादी पार्टी की अंदरूनी स्थिति पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

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Author: यायावर

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